डॉक्टर भैया के प्रयास से आदर्श गांव बनेगा छोटा सा गांव लोहानीपुर

मंगरूआ

गया:सांसदों द्वारा गोद लिये आदर्श गांव की कथा और उसके हालात के विषय में आप अक्सर खबर पढ़ते ही होंगे लेकिन आईये आज आपको गांव लोहानीपुर में लिये चलते हैं जिसे एक प्रवासी भारतीय डॉक्टर ने गोद लेने की बात कही है। जी हां यह गांव लोहानीपुर  गया मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर एक छोटा और समृद्ध गांव है। यहां की आबादी क़रीब 500 है. यह डिहुरा पंचायत में पड़ता है। य​ह टिकारी विधानसभा क्षेत्र टिकारी और संसदीय क्षेत्र औरंगाबाद में अवस्थित है और इसे गोद लिया है डॉक्टर भैया ने। डॉक्टर भैया कुवैत स्वास्थ्य मंत्रालय में तैनात हैं और उन्होंने लोहानी पुर गांव के लोगों को जागरूक करने और उनके सहयोग गांव के विकास को तेज करने की बात कही है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि डॉक्टर भैया के गोद लेने के बाद इस गांव के सभी लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और जीविकोपार्जन के प्रति जागरुक किया जाएगा। बच्चों के लिए किड्स स्टडी सेंटर खोला जाएगा। कॉलेज छात्रों के लिए डिजिटल स्टडी सेंटर खोला जाएगा। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। कहा जाए तो लोहानीपुर गांव को देश में एक विशेष तरह का मॉडल गांव बनाया जाएगा।

शिक्षा व जागरुकता की है कमी

लोहानीपुर गांव में शिक्षा और जागरुकता की बहुत कमी है। एक हजार की आबादी वाले इस गांव में 250 से ज्यादा संख्या युवाओं की है। यहां के युवाओं को नए तकनीकों से परिचय करवाया जाएगा ताकि गांव का विकास हो और देश का विकास हो। डॉक्टर भैया कहते हैं कि इस गांव को चयन करने पीछे कई कारण है। कम जनसंख्या और गांव छोटा होने के कारण इस गांव का चयन किया गया है। सबसे पहले हम देखना चाहते है कि इस छोटे से गांव में हम कितना बेहतरीन काम कर सकते हैं। हम 2 साल इस गांव में मेहनत करेंगे। यहां के सभी युवाओं को, छात्राओं को, महिलाओं को सशक्त बनाएंगे।

डॉ. सुमंत मिश्रा

कौन हैं डॉक्टर भैया

डॉक्टर भैया का असली नाम डॉ. सुमंत मिश्रा है। ये प्रवासी बिहारी हैं। इनका घर छपरा में है। मगर नोएडा में रहते हैं। वर्तमान कुवैत सरकार के स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर के रूप में कार्यरत हैं। ये बिहार का विकास करने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं।

ये तो रही डॉक्टर भैया की बात लेकिन गांव की कहानी यहीं नहीं शुरू होती ​अगर बिहार के किसी गांव में विकास और सौहार्द देखना चाहते हैं तो आप गांव लोहानीपुर आइए एक समृद्ध और ख़ुशहाल गांव में आने के बाद यहीं बस जाने का मन करेगा। छोटा सा गांव। युवा कमोबेश शिक्षित और नौकरी पेशा लोग। लोहानीपुर गांव आदर्श गांव से बढ़कर डिजिटल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस गांव में रहने वाले ग्रामीण पर्यावरण को लेकर काफी जागरुक हैं। गांव में दाखिल होते ही चारो तरफ से हरियाली नज़र आएगी। ऐसा लगेगा कि आप किसी जंगल में जा रहे हैं।

बिहार के अन्य गांवों की तरह ही गांव लोहानीपुर पूरी तरह से खेती पर निर्भर है साथ ही साथ कुछ लोग बिज़नेस करते हैं। अन्य गांवों से हमारा गांव काफ़ी सशक्त है. आज डिजिटल हो, सोशल हो या फिर सामाजिक सद्भभाव हो या फिर कृषि हो, हर मामले में ये गांव सबसे आगे है। इस गांव को सशक्त करने के पीछे कई लोगों का हाथ है। आइए डॉक्टर भैया के अलावा उन लोगों से भी मिलते हैं जिन्होंने गांव को गढ़ने में योगदान दिया है।

ये हैं गांव लोहानीपुर की पहचान
सबसे पहले बात करते हैं देव प्रसाद सिंह का। ‘देव प्रसाद सिंह’ जैसा नाम वैसा काम। यूं तो गांव को तोड़ने का काम कई लोगों ने किया मगर इन्होंने लोगों को बिखरने नहीं दिया। इसी वजह से इन्हें 20 वर्षों तक निर्विवादित गांव का अध्यक्ष चुना गया।
सामाजिक समरसता और सांस्कृति विकास की बात करें तो गांव के अध्यक्ष देव प्रसाद सिंह का नाम सबसे पहले आता है। देव प्रसाद सिंह के कारण यहां कई सामाजिक त्योहार मनाए जाते हैं। चैत्र महारामनवमी इस गांव की पहचान है। यह त्योहार इस गांव की शान है और इस मौके पर गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। गांव के सभी बड़े-बुजुर्ग लोग आपस में मिलकर जुलुस निकालते हैं और मर्यादा पुरुषोतम भगवान राम की पूजा करते हैं। इतना ही नहीं, ढ़ोलक, करताल और झाल के धून पर चैती गाते हैं। ये ऐसा अवसर होता है, जिसमें हर गांववासी शामिल होना चाहता है। नौकरीपेशा लोग अपनी छुट्टियां इसी समय बचा कर रखते हैं। यह हमारे गांव की शान है। इस मौके पर गांव में छोटा बाज़ार भी लगता है। जिसमें देशी व्यंजन व पकवान ग्रामीण लेते हैं।

पूरे गांव को डिजिटल कर रहे हैं बिक्रम

लिट्टी चोखा और संवाद के जरिए गंवई मिट्टी को पहचान दिलाने वाले पत्रकार बिक्रम सिंह इस गांव को बहुत ही अलग तरीके से निखार रहे हैं। आज उनके प्रयास के कारण ही गांव के बच्चों को इंटरनेट और कंप्यूटर की जानकारी हुई है। गांव में सबसे पहला कंप्यूटर लाने का श्रेय बिक्रम को ही जाता है। युवाओं और बच्चों के विकास के लिए ये कई कार्यक्रम चला रहे हैं। कंप्यूटर की शिक्षा हो या फिर मौलिक अधिकार, हर चीज़ के बारे में बिक्रम गांव के बच्चों को समझाते हैं।

आज गांव लोहानीपुर में कई युवा डिजिटल इंडिया में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इतना ही नहीं बिक्रम के प्रयास के कारण लोहानीपुर गांव में ‘ज्ञान प्रतियोगिता महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के ज़रिए गांव-जवार के बच्चों के बीच कॉम्पीटिशन करवाया जाता है। इस कॉम्पीटिशन​ के ज़रिए गांव के बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है। इतना ही नहीं बिक्रम सिंह के प्रयास के कारण गांव के बच्चे जल्दी ही कंप्यूटर और प्रोजेक्टर पर पढ़ाई करने लगेंगे। गांव में डिजिटल स्कूल की स्थापना होने होने से आस-पास के करीब 1500 बच्चों को लाभ मिलेगा।

कृषि विशेषज्ञ रामाधार सिंह पूरे जिले की जान हैं

बात हो रही थी कृषि की तो गांव लोहानीपुर कृषि विशेषज्ञ रामाधार सिंह का गांव है। खेती के मामले में गांव-जवार की जनता इन्हें अपना गुरु मानती है। हाईब्रीड खेती हो या परंपरागत खेती, सभी लोग इनकी सलाह ज़रूर लेते हैं। इस लिहाज से गांव से सम्मानित होने वाले रामाधार सिंह का गांव लोहानीपुर की पहचान दिलवाने में बहुत बड़ा योगदान है।

मिलिए युवाओं के रोल मॉडल धर्मवीर सिंह से

आज के समय में नौकरी मिलना मुश्किल है। एक नौकरी के लिए लोग परेशान हैं ऐसे में धर्मवीर सिंह ने एक रिकॉर्ड कायम किया है। आज इनके कारण 200 से ज़्यादा लोगों को नौकरी मिली है। धर्मवीर सिंह बैंकिंग से जुड़े एक संस्थान में काम करते हैं। गांव व आसपास के गांव में कई लड़के बेरोजगार थे ऐसे में धर्मवीर ने कई लोगों की जिंदगी में रौशनी लाने का काम किया है। युवाओं के लिए ये किसी रोल मॉडल से कम नहीं हैं।

तो गांधी के सपनों के अनुरूप गांव के विकास में योगदान देते इन ग्रामीणों की मदद से गांव लोहानीपुर जल्द ही विकास के नये अध्याय लिखेगा ऐसी उम्मीद की जा सकती है। गांधी जी कहा करते थे कि गांव के विकास से ही देश का विकास संभव है और इस बात को गांव के युवा अच्छे तरीके से समझते हैं. आज हमारे गांव में डॉक्टर, इंजीनीयर, कृषि विशेषज्ञ और सरकारी कर्मचारी हैं। गांव में विकास भी हो रहा है और इसके पीछे ये युवा हैं। लोहानीपुर को आने वाले दिनों में इनोवेशन और रोज़गार का सबसे बड़ा हब बनाया जाएगा। इस काम के लिए गांव के कई युवा दिन रात मेहनत कर रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर भैया का साथ मिलने पर गांव में विकास का काम और तेज होगा और लोहानी पुर जल्द ही देश के नक्शे पर आदर्श गांव के रूप में पहचान बन पायेगा।

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