वयस्क होंगे सुरक्षित तो बच्चों को कोविड 19 से बचाना होगा आसान: डॉ अरोड़ा

संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: कोरोना महामारी के दूसरी लहर के दौरान जिस तरह से इसका प्रकोप देखने को मिला, बड़ी संख्या में युवा तो इससे प्रभावित हुए ही साथ ही यह भी आशंका जताई गई कि तीसरी लहर भी आयेगी और बच्चों को कोविड 19 पर प्रभाव ज्यादा होगा। लेकिन इस बीच देश भर से सभी आयु वर्ग के हजारों बच्चों में कोविड -19 पॉजिटिव पाया गया है, जिससे माता-पिता में दहशत पैदा हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि ज्यादातर बच्चों को हल्की बीमारी हो जाती है, लेकिन उन्हें संक्रमण से बचाने की जरूरत है।

…बच्चों को कोविड 19
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
कोविड-19 नेशनल टास्क फोर्स (ऑपरेशनल रिसर्च ग्रुप), आईसीएमआर के अध्यक्ष व डब्लूएचओ जैसी तमाम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़े डा. नरेन्द्र कुमार अरोड़ा कोविड-19 से संक्रमित बच्चों का इलाज और देखभाल कैसे किया जाए इसके संबंध में महत्वपूर्ण बातें हमारे सामने रखते हैं ​जो निश्चित रूप से कोरोना के खिलाफ लड़ाई और बच्चों को कैसे बचाया जाए उस लिहाज से काफी उपयोगी होगा।

डॉ नरेंद्र कुमार साफ शब्दों में कहते हैं कि बच्चे भी वयस्कों की तरह ही कोविड-19 संक्रमण को पकड़ने के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं और हमारे नवीनतम राष्ट्रीय सीरो-सर्वे के अनुसार भी, सर्वेक्षण किए गए 25 प्रतिशत बच्चे कोविड -19 से प्रभावित पाए गए। यहां तक ​​कि 10 साल से कम उम्र के बच्चे भी अन्य आयु समूहों की तरह ही संक्रमित पाए गए। कोरोना को लेकर जारी किये राष्ट्रीय आंकड़े भी हमें बताते हैं कि लगभग 3-4 प्रतिशत बच्चों में कोविड -19 की पहली लहर के दौरान रोग के लक्षण नजर आये थे। और दूसरी लहर के दौरान भी यह प्रतिशत लगभग समान है। हालांकि, दूसरी लहर के दौरान कोरोना के कुल मामलों में काफी बढ़ोतरी देखी गई यही कारण कि कोरोना के दूसरी लहर ने अधिक संख्या में बच्चों को प्रभावित किया है।                                                        …बच्चों को कोविड 19
हमने पाया कि अधिकांश बच्चे लोगों के एसिम्टोमेटिक होते हैं। उनके अंदर हल्की बीमारी के लक्षण दिखाई देता है। एक घर में, यदि कई वयस्कों में कोविड 19 संक्रमण का पता चलता है, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि बच्चे भी संक्रमित होंगे। सौभाग्य से, ऐसे ज्यादातर मामलों में, विशेष रूप से 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चे आमतौर पर स्पर्शोन्मुख होते हैं या हल्के, सामान्य सर्दी जैसे लक्षण या दस्त होते हैं।

बीमार बच्चों में संक्रमण का खतरा ज्यादा

हालांकि बीमारियों से ग्रसित मसलन जन्मजात हृदय रोग, मधुमेह, अस्थमा, या बचपन के कैंसर से पीड़ित या प्रतिरक्षा-दमनकारी वाले बच्चों में गंभीर बीमारी विकसित होने का खतरा अधिक होता है।
ऐसे में माता-पिता को कोविड से बीमार बच्चों पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। बच्चों में कई गंभीर जटिलताएं संक्रमण प्राप्त करने के दूसरे सप्ताह में या उसके बाद होती हैं।

कुल मिलाकर, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि इस लहर के दौरान बच्चों के अंदर कोविड 19 रोग विकसित होने की विशेष प्रवृत्ति हो। बावजूद इसके बड़ी संख्या में लोगों के संक्रमित होने से प्रभावित बच्चों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।          …बच्चों को कोविड 19
सामान्य तरीकों से हो सकता है बच्चों का ईलाज

यह सवाल भी बार—बार उठ रहा है कि आखिर कोरोना संक्रमित बच्चों का ईलाज क्या है। ऐसे में स्पर्शोन्मुख बच्चों के लिए किसी भी दवा की सलाह नहीं देते हैं। हल्के मामलों में, लेकिन बुखार और अन्य हल्के लक्षणों के प्रबंधन के लिए साधारण पैरासिटामोल लिखिए। इसी तरह, दस्त को मौखिक पुनर्जलीकरण तरल पदार्थ और बहुत सारे तरल पदार्थ के साथ रोकथाम किया जाता है। यदि कोरोना से प्रभावित बच्चों की स्थिती थोड़ी ज्यादा गंभीर हो,ऐसे मामले में उनका उपचार वयस्कों के समान ही होता है।

यदि आपको सांस लेने में तकलीफ, तेजी से सांस चल रहा है, गंभीर खांसी है जो दूध पिलाने में बाधा उत्पन्न कर रही हो, हाइपोक्सिया, अनियंत्रित बुखार, या कोई अन्य असामान्य लक्षण जैसे त्वचा पर लाल चकत्ते, बच्चों में अत्यधिक नींद आना, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
यह भी देखा गया है कि बच्चों में भी कोविड-19 के दीर्घकालिक प्रभाव वाले मामले सामने आये हैं, जिसमें मरीज को ठीक होने के 3-6 महीने बाद भी डायबिटीज, हाइपरटेंशन जैसी नई बीमारी हो जाती है। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता अपने डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए ताकि उन बच्चों की निगरानी की जा सके जो कोविड जैसी गंभीर बीमारी से उबर चुके हैं।        …बच्चों को कोविड 19

यह चुनौती तब और बढ़ जाती है जब बच्चा तो कोविड 19 से प्रभावित हो लेकिन उनके लेकिन माता-पिता नहीं हैं। ऐसे में चुनौती बच्चों के देखभाल को लेकर है। उनकी देखभाल करने वालों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। ऐसा संभव है कि बच्चे को परिवार के बाहर किसी व्यक्ति से संक्रमण हुआ हो। इसलिए, सबसे पहले, परिवार के प्रत्येक सदस्य को कोविड -19 के लिए अपना परीक्षण करवाना चाहिए। बच्चे की देखभाल करते समय देखभाल करने वाले को पूर्ण सुरक्षा गियर-डबल मास्क, फेस शील्ड, दस्ताने पहनना चाहिए। एक डॉक्टर के मार्गदर्शन और देखरेख में देखभाल प्रदान की जानी चाहिए। देखभाल करने वाले और बच्चे को बाकी परिवार से खुद को अलग करना चाहिए।
मां के दूध में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज
ऐसे भी मामले सामने आये हैं जिसमें माता नव प्रसूता हो या बच्चों को दूध पिलाती हो तो सवाल उठता है कि क्या उसे अपने बच्चों को दूध पिलानी चाहिए। हमारा सुझाव होगा कि ऐसे मामलों में कोई भी व्यक्ति जो कोविड पॉजिटिव नहीं है, उसे बच्चे को दूध पिलाना चाहिए। हालांकि, एक स्तनपान कराने वाली मां को अपना दूध निकालना चाहिए और बच्चे को खिलाना चाहिए। अगर बच्चे की देखभाल करने वाला कोई और नहीं है, तो मां को डबल मास्क और फेस शील्ड पहनना चाहिए, हाथ धोना चाहिए और अपने आस-पास को नियमित रूप से साफ करना चाहिए। बच्चे के समुचित विकास और विकास के लिए मां का दूध महत्वपूर्ण है। संक्रमित मां के दूध में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज होती हैं।                                                                                                                         … बच्चों को कोविड 19

बच्चों को बचाना ज्यादा चुनौती पूर्ण
कोविड 19 से बच्चों को कैसे बचाया जाए ये बड़ा सवाल है। यदि बच्चा बड़ा है तो वह खुद को बचाने के लिए कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन कर सकते हैं। लेकिन चुनौती ज्यादा छोटे बच्चों को लेकर है।
हम 2 साल से कम उम्र के बच्चों में मास्क की सलाह नहीं देते हैं। वास्तव में, हमने देखा है कि 2 से 5 साल के बच्चों को मास्क पहनाना मुश्किल है। इसलिए, उन्हें घर के अंदर रखने की सलाह दी जाती है। लेकिन उन्हें खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में शामिल करना न भूलें क्योंकि पहले पांच साल बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।                                                                                                                                               …बच्चों को कोविड 19

वयस्क सुरक्षित तो बच्चे भी होंगे सुरक्षित

परिवार के प्रत्येक सदस्य जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक है, उसे टीका लगवाना चाहिए। यदि वयस्क सुरक्षित हैं, तो हमारे बच्चे भी सुरक्षित रहते हैं।
साथ ही साथ स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए टीके सुरक्षित पाए गए हैं। इसलिए उन्हें भी वैक्सीन लेनी चाहिए।               ….  बच्चों को कोविड 19

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