देश में बेहतर काम करने वाली पंचायतों को प्रत्येक वर्ष पंचायती राज दिवस पर राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जाता है। कुछ पंचायतों को पंडित दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार दिए जाते हैं तो कुछ पंचायतों को नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा अवार्ड। इसके साथ ही कुछ पंचायतों को बाल मैत्री अवार्ड से भी सम्मानित किया जाता है। वर्ष 2020 में अवार्ड प्राप्त करने वाले पंचायतों की सूची जारी कर दी गई है, हालांकि कोरोना महामारी के कारण पुरस्कार समारोह अभी नहीं हो पाया है। ऐसे में पंचायत खबर ने ये तय किया है पंचायत की कहानी आपके सामने लायेगा कि कैसे इन पंचायतों ने आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की दिशा में कदम बढ़ाया है..तो इस कड़ी में आपके लिए दूसरी कहानी है उत्तर प्रदेश बाराबंकी के चंदवारा गांव की ग्राम प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल की….जिसे इस वर्ष भी पंडित दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार गया है साथ ही नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा अवार्ड के लिए चयनित किया गया है।
संतोष कुमार सिंह
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले का मसौली ब्लॉक क्षेत्र का ग्राम पंचायत चंदवारा। प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल किसी परिचय का मोहताज नहीं। लेकिन साल 2015 में प्रधान के रूप में सफर शुरू हुआ तो सबकुछ इतना आसान नहीं था, लेकिन आज जब 2020 में पहले कार्यकाल का सफर लगभग समाप्त होने वाला है, यानी चुनाव की अनौपचारिक घोषणा हो गई तो पंचायत की झोली में कई राष्ट्रीय सम्मान हैं। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री सम्मानित कर चुके हैं। सफलता ऐसी की लगातार तीन बार से यानी वर्ष 2018,वर्ष 2019 व वर्ष 2020 में लगातार तीसरी बार दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित किये जाने घोषणा की घोषणा की गई है। इतना ही नहीं इस वर्ष ” नाना जी देशमुख राष्ट्रीय ग्राम सभा गौरव पुरस्कार” के लिए भी चंदवारा पंचायत का चयन किया गया है।
तो चले चलते हैं चंदवारा की सफर पर ग्राम प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल से ही गांव की बदलाव की कहानी को समझते हैं और टटोलते हैं गांव चंदवारा में आये बदलाव को। कहते हैं न सफलता पहचान दिलाती है, लेकिन उस सफलता तक पहुंचने में रोजाना की जद्दोजहद और बदलाव के प्रति आंकाक्षा का अहम रोल होता है। पुरस्कार पाने से उत्साहित प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल कहती हैं कि ‘इच्छाशक्ति हो, तो कुछ भी संभव’ है। पंचायत के विकास में नवाचार अपनाने के लिए लगाकर तीसरी बार पंडित दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार के लिए चयन हुआ है। ऐसा ग्रामवासियों और जिले के अधिकारियों का पूरा सहयोग मिल पाने से ही संभव हो सका है। ओवरहेड टैंक और बहुद्देशीय पंचायत कार्यालय बनवाने सहित आगे भी अन्य विकास कार्य जारी रखे जाएंगे।

व्हाट्सएप्प ग्रुप के जरिए गांव को जोड़ा
प्रकाशिनी कहती हैं कि चुनाव जीतने के बाद गांव के विकास का खाका खींचकर योजनाबद्ध तरीके से गांव का विकास कार्यों को अंजाम दिया गया। सबसे ज्यादा ध्यान स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता पर रहा। इसकी शुरूआत हुई संवाद से,त्वरित शिकायत निवारण की व्यवस्था से और रास्ता अपनाया गया व्हाट्सएप्प ग्रुप का निर्माण। नाम रखा गया ‘राइजिंग चंदवारा’: गांव का व्हाट्सएप्प ग्रुप। साफ है प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया के गांव में बदलाव का सपना बुना था। प्रकाशिनी जायसवाल उसे हकीकत में बदलते दिखी। बाराबंकी के चंदवारा गांव की महिला प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल ने उन्होंने गांव के लोगों को एक बेहतर और जागरूक नागरिक बनाने के लिए ‘ राइजिंग चंदवारा’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें गांव के लोग अपनी शिकायतें दर्ज कराते हैं। इसके अलावा प्रकाशिनी जायसवाल ने गांव में वाई-फाई, सीसीटीवी कैमरे भी लगवाएं हैं ताकि उनका गांव डिजिटल रूप से साक्षर हो सके और गांव की सुरक्षा पर कोई खतरा भी नहीं आए। इस व्हाट्सएप्प ग्रुप से ना सिर्फ ग्राम पंचायत की जवाबदेही तय हुई बल्कि गांव के लोग भी अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक भी हुए।”

सरकारी योजना की जानकारी से पूरा हक मिला गांव को
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गांव को पंचायती सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित प्रकाशिनी जायसवाल को न प्रकाशिनी जायसवाल को राज्य सरकार की तरफ से रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार मिल चुका है। वह कहती हैं, “जब मैं प्रधान बनीं तो मैंने गांव के लोगों के साथ मिलकर बैठक की और उनकी परेशानियों, दिक्कतों और शिकायतों को समझा। हम ने गांव की प्राथमिकता तय की और उसी प्राथमिकता के हिसाब से काम करना शुरू किया। अभी साढ़े चार साल में गांव की स्थिति काफी हद तक बेहतर हो चुकी है।” वे साफगोई से कहती हैं कि “सरकारी कामों में मुश्किल तो आती है लेकिन अगर आपको अपने कर्तव्यों और अधिकारों के बारे में पता है तो आपको कोई रोक भी नहीं सकता। मैंने ग्राम प्रधानों के लिए आने वाले गाइडलाइन को पढ़ा है। हम ने जो भी सीसीटीवी या वाई-फाई लगवाएं हैं, वे सरकारी फंड की मदद से ही लगवाएं हैं। इसके अलावा गांव में पार्क, कूड़ा फेंकने और नष्ट करने के लिए अपशिष्ट गृह, प्राथमिक स्कूल में स्मार्ट क्लास, खेलने का मैदान, पार्क, झूला और वाटर प्यूरीफायर सब सरकारी फंड की मदद से ही बना है।”

शिक्षा को दी तवज्जो,साफ—सफाई—सुरक्षा का रखा ख्याल
ग्राम प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल की मेहनत और विजन का ही परिणाम है कि चंदवारा आज आदर्श गांव के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। चंदवारा गांव की साफ-सफाई और यहां के स्कूल देखने लायक हैं। इस गांव को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। पिछले कुछ साल में गांव में काफी बदलाव आया है। गांव में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे होते थे लेकिन अब सभी जगहों पर सफाई है। पार्क खुलने से लोग सुबह-शाम उसमें ठहलने और मन बहलाने जाते हैं। इससे उनका स्वास्थ्य भी सही रहता है। प्रकाशिनी जायसवाल ने बताया कि उनके गांव के लोग घर में ही शौचालय जाते हैं। बाहर जाने पर उनपर 200 रुपए का जुर्माना लगाया जाता है। जिसके चलते गांव का माहौल भी काफी अच्छा और सुरक्षित बन गया है। गांव में आगनबाड़ी केंद्र बनाया गया है, जहां पर समय-समय पर महिलाओं को आयरन की गोली मिलती है। टीकाकरण भी अब समय से होता है।

प्राईमरी विद्यालय मॉडल स्कूल से कम नहीं
गांव के प्राइमरी विद्यालय किसी मॉडल स्कूल से कम नहीं हैं। इन प्रयासों से गांव के प्राथमिक स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ी है। गांव में सीसीटीवी कैमरे की उपयोगिता प्रधान बताती हैं कि इससे सुरक्षा की भावना को बल मिलता है और अपराध कम होते हैं। इसलिए 8 सीसीटीवी कैमरे गांव की मुख्य सड़क पर लगाए गए हैं। इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई में मदद के लिए चार वाई-फाई लगाए गए हैं। साथ ही साथ लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ई-रिक्शा ट्रेनिंग और कम्प्यूटर ट्रेनिंग कोर्स भी सिखाया गया है।
डिजिटल इंडिया का मंत्र
प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल कहती हैं कि वैसे तो कई लोग ये कहते मिल जाएंगे कि गांव में सीसीटीवी की क्या जरूरत है। लेकिन इसका फायदा चंदवारा के लोग बखूबी समझते हैं। सीसीटीवी कैमरे लग जाने से गांव की लड़कियां अपने आप को सुरक्षित महसूस करती हैं। गांव की लड़कियां अब कभी भी कहीं भी जा सकती हैं। गांव में लड़कियों के साथ जो छेड़छाड़ की घटनाएं होती थीं, कैमरे लग जाने से वह भी अब नहीं होती। सीसीटीवी कैमरे के डर से ग्रामीण खुले में नशेबाजी नहीं कर पाते। उनके मन में डर है कि वह पकड़ जाएंगे। इंटरनेट की सुविधा मिल जाने से गांव के बच्चों को बाहर नहीं जाना पड़ता।

खोला साइकिल बैंक ताकि ना छूटे लड़कियों की पढ़ाई
महिला प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल नित नया करने को उत्सुक रहती हैं। इसी क्रम में उन्होंने देखा कि किशोरावस्था की दहलीज पर पहुंचने से पहले यानी उपरी कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियां स्कूल जाने को लेकर परेशान हैं। क्योंकि चंदवारा (बाराबंकी) से उनके स्कूल की दूरी लगभग दो किलोमीटर है। इस वजह से कई लड़कियों की शिकायत थी कि दूर होने की वजह वे देर से स्कूल पहुंचती है या फिर स्कूल छोड़ देती है। साइकिल बैंक के इस अनोखी पहल पर प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल कहती हैं, “जब मैं प्रधान बनी, तब मैंने, अपने कर्मचारियों की मदद से गांव में एक आन्तरिक सर्वे कराया। इसमें हमने पाया कि गांव से स्कूल से दूरी, ट्रान्सपोर्ट सुविधाओं की कमी, असुरक्षा की भावना और आर्थिक कारणों से गांव की लड़कियां 8 वीं के बाद पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो रही हैं। जो पढ़ने जा भी रही हैं, वे भी नियमित नहीं हैं। इस वजह से उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। इसे हम ने गांव की एक गंभीर समस्या के रूप में लिया और इसे दूर करने के लिए साइकिल बैंक का विचार आया।” प्रकाशिनी आगे बताती हैं कि इसके बाद हम ने गांव के कुछ समाजिक कार्यकर्ताओं की आर्थिक मदद से कुछ साइकिलें खरीदीं और उन लड़कियों में बांटा जो पढ़ाई करने की इच्छा तो रखती थीं लेकिन विभिन्न वजहों से पढ़ने नहीं जा पा रही थीं। ‘किशोरी साइकिल बैंक’ नाम की इस योजना में गांव की 15 लड़कियों को साइकिल निःशुल्क बांटा गया है। इन लड़कियों की बारहवीं की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनसे साइकिल ले लिया जाएगा और फिर गांव की दूसरी जरूरतमंद लड़कियों को बांटा जाएगा। उन्होंने गांव को बेहतर बनाने के लिए साइकिल बैंक के अलावा गांव में कई नई और अनोखी पहल की है, जिसकी वजह से यह गांव आस-पास के गांव सहित प्रदेश और देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कुल मिला के देखें तो चंदवारा को देखकर यह बात जेहन में आती है कि बदहाल गांवों की दशा को भी बदला जा सकता है, बस उसके लिए एक मजबूत इच्छाशक्ति का होना जरूरी है। यदि प्रधान के रूप में प्रकाशिनी के सफर पर समग्रता में नजर डालें तो 4465 आबादी वाला ग्राम पंचायत जहां 587 परिवार रहते हैं। इसमें शत-प्रतिशत शौचालय निर्माण, टीकाकरण, सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरों से लैस, कूड़ेदान, कूड़ाघर का निर्माण, शिक्षा क्षेत्र में मॉडल स्कूल, पोषण वाटिका, डॉ. भीम राव आंबेडकर पार्क ग्राम पंचायत की पहचान हैं। गांव के किशोर एव किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जहां ई-रिक्शा की ट्रेंनिग दी गई है, वहीं गांव में साइकिल बैंक खोल कर लड़कियों को उच्च शिक्षा के प्रोत्साहित किया जा रहा है। ग्राम प्रधान प्रकाशिनी जायसवाल ने गांव को बेरोजगारी मुक्त करने के लिए गांव में डिजिटल पेंटिग का प्रोजेक्ट बनाया है जो करीब डेढ़ करोड़ की लागत से निर्माण प्रस्तावित है।
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