सात दिन के अंदर बनाना होगा राशन कार्ड,लाखों परिवारों को मिलेगा लाभ

अमरनाथ झा
पटना:गरीबों को सस्ते दर पर अनाज देने की सरकारी योजनाओं की ढ़ोल चाहे जितनी पीटी जाए, लेकिन अक्सर भूख से मरने की खबरें भी आती रहती हैं। इसका कारण है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सत्ते दर पर अनाज पाने के लिए जिस राशन कार्ड की जरूरत होती है, वह गांवों के सभी गरीबों के पास नहीं होता। राशन कार्ड बनवाना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए सरकारी दफ्तरों की जितनी दौड़ लगानी पड़ती है, उसमें वास्तविक गरीब अक्सर असमर्थ हो जाते हैं। इसप्रकार राशन कार्ड मोटे तौर पर गरीबों में अमीर के पास ही मिल पाता है। अतिशय गरीब इसके दायरे में नहीं समेटे जा पाते। बिहार की स्थिति कहीं अधिक खराब है। अभी प्रवासी मजदूरों के वापस लौटने पर उन्हें सरकारी अनुदान देने के लिए राशनकार्ड देने की खोज हुई तो पता चला कि राज्य में राशनकार्ड के करीब 30 लाख आवेदन लंबित पड़े हैं।
राशन कार्ड बनाने में बड़े पैमाने पर होने वाले घपले का खुलासा पिछले साल तब हुआ जब मुजफ्फरपुर जिले में कुपोषण के चलते एईएस नामक बीमारी से सैकड़ों बच्चे मारे गए। उनमें से अधिकतर महादलित परिवारों के पास राशनकार्ड नहीं थे जिससे उन परिवारों को राशन का अनाज नहीं मिल पाता था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बकायदा अभियान चलाकर सभी पात्र परिवारों को चिन्हिंत करने और उन्हें यथाशीघ्र राशनकार्ड मुहैया कराने का निर्देश दिया। तब जिले के पांच प्रखंडों में 15 हजार परिवारो को राशन कार्ड देना था। पर मुख्यमंत्री के निर्देश का भी कोई खास असर नहीं पड़ा। नियत समय के भीतर उन्हें कार्ड मुहैया नहीं कराया जा सका। हालांकि कार्रवाई की चेतावनी के बाद प्रशासन तत्पर हुआ।


अब जब कोरोना जनित देशबंदी की वजह से दूसरे राज्यों में कमाने गए मजदूर वापस आने लगे तो उन्हें सरकारी अनुदान और राशन देने के लिए राशन कार्ड की खोज हुई तो पता चला कि राज्य में पहले से ही 30 लाख लोग बिना राशन कार्ड के हैं। उनके आवेदन इस या उस कारण से रद्द कर दिए गए हैं या लंबित रखा गया है।
सरकार ने लंबित आवेदनों का निपटारा यथाशीघ्र करने का निर्देश दिया और बकायदा अभियान चलाकर राशन कार्ड बनाए गए। हालत यह रही कि सात दिनों में सात लाख राशन कार्ड बनाए गए। इस दौरान राशन कार्ड के उन सभी आवेदनों पर विचार किया गया जो या तो रद्द कर दिए गए थे या छोटी-छोटी त्रुटियों के कारण अस्वीकृत कर दिए गए थे। इन आवेदनों पर विचार कर 12 लाख कार्ड 7 मई के पहले निर्गत कर दिए गए थे। इसी क्रम में अगले सात दिनों में तीन लाख कार्ड बनाए गए। सरकारी सूत्रों के अनुसार इस महीने 25 लाख नए राशन कार्डों का वितरण कर देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राशन कार्ड बनाने में तेजी लाने के लिए सरकार ने लोक सेवा अधिकार अधिनियम में तत्काल संशोधन कर दिया है। एक सप्ताह के भीतर राशन कार्ड देने का निर्देश दिया गया है। इस दौरान जीविका के माध्यम से गांव-गांव में सर्वेक्षण कर उन लोगों को चिन्हित किया गया जो राशन कार्ड पाने के पात्र हैं, पर उनके पास कार्ड नहीं हैं। यह सर्वेक्षण बुनियादी तौर पर कोरोना काल में एक हजार रुपए की सहायता राशि देने के लिए कराया गया था, पर बाद में इसके आधार पर राशन कार्ड निर्गत करने का फैसला किया गया।


नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रखंड विकास पदाधिकारी आवेदन मिलने के दो दिनों के भीतर उसकी जांच पूरी करेंगे और सात दिनों के अंदर राशन कार्ड निर्गत कर दिया जाएगा। पहले यह समय सीमा तीन महीना तय थी। अब आवेदन थोक में भी लिया जा सकता है। जीविका के अधिकारी एक साथ बड़ी संख्या में आवेदन जमा कर सकेंगे। आरटीपीएस के कर्मचारियों को उन्हें एक दिन में निबंधित करना होगा। हस्ताक्षर और शपथपत्र की जगह अब स्व-घोषित प्रमाणपत्र भी लिया जा सकेगा। आवासीय प्रमाणपत्र की जगह जीविका सामुदायिक संगठन के प्रमाणपत्र भी मान्य होगा। इस सर्वेक्षण के आधार पर राशनकार्ड देने के साथ ही इनका ईपीडीएस पोर्टल पर निबंधन की कराया जाएगा।
इसी सर्वेक्षण के आधार पर राज्य के खाद्य व उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन साहनी ने 30 लाख नए परिवारों के लिए अधिक अनाज की मांग केंन्द्र से की। केन्द्र ने इससे इनकार कर दिया। लेकिन लंबी रस्साकस्सी के बाद राज्य के एक करोड़ 64 लाख लोगों को राशन का अनाज मिलने का रास्ता साफ हो सका। केन्द्र ने जिन लोगों के लिए अनाज आवंटित करने से इनकार कर दिया था, उन्हें राज्य सरकार की ओर से अनाज देने के ऐलान हुआ। बाद में केन्द्र सरकार भी अतिरिक्त अनाज देने पर राजी हो गई। राज्य सरकार ने 75 हजार टन अतिरिक्त अनाज की मांग की थी। अभी राज्य को 4.57 लाख टन अनाज मिलता है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत 85.12 प्रतिशत ग्रामीण और 74.53 प्रतिशत शहरी आबादी को अनाज देने की व्यवस्था है। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार की आबादी में से 8.71 करोड़ लोगों को अनाज दिया जा सकता है। लेकिन राज्य के 8.57 करोड़ लोगों को ही इस योजना का लाभ मिल पा रहा था। केन्द्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्री रामविलास पासवान ने बाकी 14 करोड़ लोगों की सूची मांगी थी, उसके मिलने के बाद उनके लिए भी अनाज का आवंटन कर दिया गया। राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क सचिन अनुपम कुमार के अनुसार इस दौर में अभी तक 21 लाख 85 हजार राशनकार्ड बनाए जा चुके हैं। इनका बंटवारा शुरु हो गया है। आगे भी राशनकार्ड बनाने की वर्तमान व्यवस्था लागू रहेगी।

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