
नयी दिल्लीः गणतंत्र के दिन जिस तरह किसान संगठनों द्वारा आयोजित ट्रैक्टर मार्च में दिल्ली की सड़कों पर हिंसक वारदातें हुई उसने किसान नेताओं और प्रशासन के बीच विश्वास की खाई बहुत गहरी कर दी है। यही कारण है कि किसान संगठनों द्वारा आयोजित चक्का जाम दिल्ली और उत्तर प्रदेश में आयोजित न किये जाने के घोषित कार्यक्रम के बावजूद दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा से जुड़े पुख्ता इंतजामात किये और हर संभावित स्थान जहां किसान आ सकते थे वहां भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई। दिल्ली मेट्रो ने एहतियातन 10 स्टेशनों पर आवाजाही को बंद कर दिया गया है। सभी प्रमुख स्थानों पर आवाजाही प्रतिबंधित की गई। साथ ही दिल्ली के सभी बोर्डरों जहां किसान धरने पर बैठे हैं चाहे सिंघु बोर्डर हो,गाजीपुर बोर्डर हो या फिर टिकड़ी बोर्डर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई।

चक्का जाम का आह्वाण
कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले दो महीने से भी ज्यादा समय से किसानों का प्रदर्शन जारी है। गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के बाद अब किसान आंदोलन को और धार देने के लिए किसान संगठनों का देशव्यापी चक्का जाम का आह्वाण दिन के तीन घंटे यानी 12 से 3 बजे तक किया था। किसान संगठनों ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से देश के अन्य हिस्सों में राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों को अवरुद्ध करेंगे। कांग्रेस सहित लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने इसे अपना समर्थन देने की घोषणा की थी।
हाई अलर्ट पर दिल्ली
जिन बॉर्डर्स पर किसान आंदोलन चल रहा है वहां पहले से ही पुलिस ने सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी है और इन बॉर्डर्स को पूरी तरह सील कर दिया गया है। आज बाकी बॉर्डर्स पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी और हर आने जाने वाले की चेकिंग की व्यवस्था है। संदिग्ध लोगों की शहर में एंट्री पर नजर रखी जा रही है। खासतौर से बदरपुर बॉर्डर, रजोकरी बॉर्डर, कापसहेड़ा बॉर्डर, चिल्ला बॉर्डर, डीएनडी, कालिंदी कुंज, महाराजपुर बॉर्डर, अप्सरा बॉर्डर, भोपुरा बॉर्डर समेत सभी प्रमुख बॉर्डर्स पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा बाहरी दिल्ली में सिंघु और टीकरी बॉर्डर के आस.पास की अन्य छोटी बॉर्डर्स के रास्ते आवाजाही को भी शनिवार के दिन नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई है।
लाल किला में कड़ा पहरा
दिल्ली के अंदर लाल किला, आईटीओ, अक्षरधाम, इंडिया गेट, राजपथ, विजय चौक, संसद भवन, जंतर-मंतर, प्रधानमंत्री आवास, गृह मंत्री और अन्य केंद्रीय वरिष्ठ मंत्रियों के आवास के बाहर भी कड़ा पहरा रहेगा। साथ ही रिंग रोड, आउटर रिंग रोड, मथुरा रोड, एनएच.8, एनएच.24, जीटी रोड, रोहतक रोड समेत सभी प्रमुख सड़कों पर भी जगह.जगह पिकेट्स लगाकर निगरानी की जा रही है।

बंद का दिखा मिला जुला असर
जम्मू-पठानकोट राजमार्ग पर जम्मू में किसान संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रर्दशनकारियों ने सरकार से इन कानूनों को वापस लाने की मांग दुहराते हुए कहा कि हम सरकार से इन कानूनों को रद्द करने की अपील करते हैं। हम दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे किसानों का समर्थन करते हैं। इसी तरह हरियाणा के पलवल के अटोहन चौक पर किसानों द्वारा दिए गए देशव्यापी आह्वान के तहत विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। शांहजहां पुर में भी किसानो ने भारी संख्या में राष्ट्रीय राजमार्ग पर एकत्रित होकर वाहनों की आवाजाही रोक दी। बंग्लोर से भी ऐसी ही खबर मिली। बंगलूरू में किसानों द्वारा बुलाए गए देशव्यापी चक्का जाम के तहत लहंका पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। वहीं पंजाब में जगह-जगह पर किसान एकत्रित हुए और शांतीपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों को मिला कांग्रेस का साथ
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों के चक्का जाम का समर्थन किया। उन्होंने शनिवार को ट्वीट कर कहा शांतिपूर्ण सत्याग्रह देशहित में है. ये तीन कानून सिर्फ किसान.मजदूर के लिए ही नहीं, जनता व देश के लिए भी घातक हैं। पूर्ण समर्थन! वहीं कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश के ग्वालियर में कहा, सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे कृषि कानूनों का विरोध करते हुए सड़कों पर आएं और आज दोपहर 12 से 3 बजे के बीच धरना में शामिल हों।
