पर्यावरण

हर घर नल से जल योजना: चेहरा सामाजिक.. एजेंडा काॅरपोरेट का

अरूण तिवारी हर घर नल से जल योजना में स्रोत से लेकर गांव की हद तक पानी पहुंचाने का काम कंपनियों को सौंपा गया है। कोई गारंटी नहीं कि कंपनी आपूर्ति के मूल जल-स्रोत पर अपना हक़ नहीं जताएगी। एकाधिकार हुआ तो सिंचाई आदि के लिए पानी से इनकार किया जा सकता है, वसूली भी …

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आओ! प्राकृतिक संसाधनों को बचाएं

प्रयागराज: आज सम्पूर्ण विश्व जल एवं पर्यावरण संरक्षण तथा इसके गिरते स्तर और शुद्धता के प्रति चिंतित है। हमको इस भयावह और विनाशकारी दृश्य के कारण के मूल में जाना ही होगा। स्वयंसेवी संस्थाओं और विभिन्न शासकीय प्रयासों के बावजूद भी हम चारो तरफ शुद्ध जल, भोजन एवं शीतल हवा के लिए त्राहिमाम-त्राहिमाम की स्थिति …

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लॉकडाउन का दिखा दूरगामी असर, देहात मे पक्षियों की संख्या बढ़ी

प्रयागराज: कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉक डाउन से जहां आम लोगों को परेशानी हुई। न बाहरी अर्थव्यवस्था पर बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक असर हुआ। लाखों लोगों ने जान गंवाई। हजारों लोगों का रोजगार छिना। लेकिन कहते हैं किसी न नुकसान किसी का फायदा होता है। यही आलम देश व्यापी लॉक …

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कंक्रीट का जंगल उगाना तो ठीक पर्यावरण को दरकिनार कर नहीं बचेगा जीवन

डॉ रणविजय निषाद कालान्तर में भौतिक समृद्धि के साथ सम्पूर्ण विश्व उत्तरोत्तर प्रगतिपथ पर अग्रसर है, तो दूसरी तरफ हमारी उदात्त सभ्यता और संस्कृति से विमुखता, भोगवादी जीवनशैली के कारण जल-थल और वायुमण्डल पूर्णतयः संदूषित हो चुका है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई, जल का अतिशय दोहन, प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण प्रबंधन तथा ईंट-भट्टों की अत्यधिक …

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पत्तल, दौना तथा पंगत वाली संस्कृति, प्लास्टिक मुक्त भारत

रणविजय निषाद, पर्यावरणविद वर्त्तमान में वैश्विक स्तर पर अपने स्वास्थ्य को लेकर लोकमानस चिन्तित हैं। प्राचीन संस्कृति में आमजनमानस और बुद्धजीवी प्रकृतिप्रेमी हुआ करते थे। शादी-विवाह या अन्य कार्यक्रमों में हम इन्ही पेड़-पौधों के पत्तियों, लकड़ी, छाल आदि का प्रयोग करते थे। नीम की दातून का प्रयोग दाँतों की सफाई के लिए किया करते थे। …

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जल की महत्ता बताती रणविजय निषाद की पुस्तक जल संचेतना

मनीश अग्रहरि दुनिया भर में जल की समस्या है फलत: जल एक गंभीर विषय है। लेकिन सोशल मीडिया के इस दौर मेंं किताब कौन पढ़ना चाहता है बावजूद इसके कोरोना महामारी के दौर में लोगों में पाठकों में किताबों के प्रति आकर्षण देखा जा रहा है। आप भी यदि इस लॉक डाउन पीरियड में गंभीर …

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एक इंजीनियर की रूफ गार्डन में गुलजार होता जीवन और खिलखिलाते पौधे

गोविंद नारायण सिंह बरेली: पेड़ पौधे हमारे जीवन का बिल्कुल वैसा ही आधार है जैसे भोजन और जल । हालांकि भोजन और जल भी अप्रत्यक्ष रूप से बहुत हद तक पौधों पर निर्भर है । आदिकाल से ही मानव पेड़ पौधों की अहमियत समझता था ,प्रकृति की अहमियत जानता था इसीलिए दुनिया में विकसित हर …

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पराली की समस्या से निपटने के लिए आगे आया आईआईआरडी शिमला

संतोष कुमार सिंह चंडीगढ़: पराली की समस्या को लेकर संसद से लेकर सड़क तक चर्चा है। आम जन हैरान हैं, किसान परेशान है, कोई यज्ञ का सुझाव दे रहा है तो कोई मौसम को दोषी बता रहा है। कहीं अन्नदाता निशाने पर हैं तो कहीं ​नीति नियंता। एक तरफ संसद में पराली की समस्या को …

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प्लास्टिक से डीजल बनाने का संयंत्र देहरादून में शुरू

उमाशंकर मिश्र पर्यावरण पर बढ़ते प्लास्टिक कचरे के बोझ का प्रबंधन मौजूदा दौर की प्रमुख चुनौती है। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसका उपयोग प्लास्टिक कचरे से डीजल बनाने में किया जा सकेगा। प्लास्टिक अपशिष्ट से डीजल बनाने के लिए एक संयंत्र देहरादून में स्थापित किया गया है। इस संयंत्र की …

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सरकार सस्‍ती दर पर स्‍वच्‍छ और हरित ऊर्जा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए प्रति मेगावाट 30,000 रुपये की दर से लिए जाने वाले अनिवार्य पट्टा किराये में छूट देने का फैसला किया है। एक समीक्षा बैठक में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिएप्रति मेगावाट 30,000 रुपये की दर से पट्टा …

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