पर्यावरण

क्लाइमेट इमरजेंसी को झेलता बिहार

अमरनाथ पटना: बिहार में क्लाइमेट इमरजेंसी की स्थिती बनती दिख रही है। सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिहाज से तैयार नीति आयोग की रिपोर्ट तो यही संकेत देते हैं। क्योंकि सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिहाज से तैयार नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार को सबसे नीचले पादान पर रखे जाने …

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जलवायु परिवर्तन के मामले में नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार फिसड्डी, राज्य सरकार अपने मुंह मियां मिट्ठू

अमरनाथ झा पटना: जलवायु परिवर्तन से बुरी तरह प्रभावित बिहार में इसे लेकर कोई जागरुकता नहीं है। हाल ही में नीति आयोग ने सतत विकास लक्ष्य के लिहाज से राज्यों की स्थिति के बारे में एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बिहार को कई मामलों में सबसे निचले पायदान पर रखा गया है। …

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थोड़ी सी हो सजगता तो कर सकते हैं जल एवं पर्यावरण संरक्षण

रणविजय निषाद कौशाम्बी:आज सम्पूर्ण विश्व जल एवं पर्यावरण संरक्षण तथा इसके गिरते स्तर और शुद्धता के प्रति चिंतित है। हमको इस भयावह और विनाशकारी दृश्य के कारण के मूल में जाना ही होगा। स्वयंसेवी संस्थाओं और विभिन्न शासकीय प्रयासों के बावजूद भी हम चारो तरफ शुद्ध जल, भोजन एवं शीतल हवा के लिए त्राहिमाम-त्राहिमाम की …

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नहीं रहे प्रख्यात पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा

संतोष कुमार सिंह ​देहरादून: चिपको आंदोलन के प्रणेता व जंगलों की रक्षा के लिए समर्पित योद्धा गांधीवादी सांचे में ढले प्रख्यात पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा नहीं रहे। शुक्रवार 12 बजे 94 वर्ष के उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका जन्म नौ जनवरी, 1927 को टिहरी जिले में हुआ था। वे डायबिटीज के साथ कोविड निमोनिया …

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याद किए जा रहे हैं प्रख्यात पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा

मंगरूआ देहरादून: चिपको आंदोलन के प्रणेता व जंगलों की रक्षा के लिए समर्पित योद्धा गांधीवादी सांचे में ढले प्रख्यात पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा नहीं रहे। शुक्रवार 12 बजे 94 वर्ष के उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका जन्म नौ जनवरी, 1927 को टिहरी जिले में हुआ था। वे डायबिटीज के साथ कोविड निमोनिया से …

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हर घर नल से जल योजना: चेहरा सामाजिक.. एजेंडा काॅरपोरेट का

अरूण तिवारी हर घर नल से जल योजना में स्रोत से लेकर गांव की हद तक पानी पहुंचाने का काम कंपनियों को सौंपा गया है। कोई गारंटी नहीं कि कंपनी आपूर्ति के मूल जल-स्रोत पर अपना हक़ नहीं जताएगी। एकाधिकार हुआ तो सिंचाई आदि के लिए पानी से इनकार किया जा सकता है, वसूली भी …

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आओ! प्राकृतिक संसाधनों को बचाएं

प्रयागराज: आज सम्पूर्ण विश्व जल एवं पर्यावरण संरक्षण तथा इसके गिरते स्तर और शुद्धता के प्रति चिंतित है। हमको इस भयावह और विनाशकारी दृश्य के कारण के मूल में जाना ही होगा। स्वयंसेवी संस्थाओं और विभिन्न शासकीय प्रयासों के बावजूद भी हम चारो तरफ शुद्ध जल, भोजन एवं शीतल हवा के लिए त्राहिमाम-त्राहिमाम की स्थिति …

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लॉकडाउन का दिखा दूरगामी असर, देहात मे पक्षियों की संख्या बढ़ी

प्रयागराज: कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉक डाउन से जहां आम लोगों को परेशानी हुई। न बाहरी अर्थव्यवस्था पर बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक असर हुआ। लाखों लोगों ने जान गंवाई। हजारों लोगों का रोजगार छिना। लेकिन कहते हैं किसी न नुकसान किसी का फायदा होता है। यही आलम देश व्यापी लॉक …

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कंक्रीट का जंगल उगाना तो ठीक पर्यावरण को दरकिनार कर नहीं बचेगा जीवन

डॉ रणविजय निषाद कालान्तर में भौतिक समृद्धि के साथ सम्पूर्ण विश्व उत्तरोत्तर प्रगतिपथ पर अग्रसर है, तो दूसरी तरफ हमारी उदात्त सभ्यता और संस्कृति से विमुखता, भोगवादी जीवनशैली के कारण जल-थल और वायुमण्डल पूर्णतयः संदूषित हो चुका है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई, जल का अतिशय दोहन, प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण प्रबंधन तथा ईंट-भट्टों की अत्यधिक …

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पत्तल, दौना तथा पंगत वाली संस्कृति, प्लास्टिक मुक्त भारत

रणविजय निषाद, पर्यावरणविद वर्त्तमान में वैश्विक स्तर पर अपने स्वास्थ्य को लेकर लोकमानस चिन्तित हैं। प्राचीन संस्कृति में आमजनमानस और बुद्धजीवी प्रकृतिप्रेमी हुआ करते थे। शादी-विवाह या अन्य कार्यक्रमों में हम इन्ही पेड़-पौधों के पत्तियों, लकड़ी, छाल आदि का प्रयोग करते थे। नीम की दातून का प्रयोग दाँतों की सफाई के लिए किया करते थे। …

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