Air Pollution Fine: वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला ले लिया है। किसानों को पराली जलाने पर 30 हजार रुपए जुर्माना देना पड़ेगा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में इस समय वायु गुणवत्ता जहरीली होती जा रही है। इस समय राजधानी और एनसीआर में सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।

अब वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग संशोधन नियम 2024 प्रभावी होंगे। इसके तहत दो एकड़ से कम भूमि वाले किसान को 5000 रुपए का पर्यावरण क्षतिपूर्ति देना होगा। दो एकड़ या उससे अधिक लेकिन पांच एकड़ से कम भूमि वाले किसान को 10,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को 30,000 रुपए से अधिक जुर्माना देना होगा।
बता दें कि इस समय राजधानी दिल्ली में खराब हवा का स्तर बढ़ता जा रहा है और सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक कुछ दिन से दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स में सुधार हो रहा है। लेकिन बुधवार को दिल्ली में वायु गुणवत्ता स्तर 352 पर था। वायु गुणवत्ता स्तर 301 से 400 के बीच रहने पर इसे ‘बेहद खराब’ की श्रेणी में रखा जाता है। अगर वायु गुणवत्ता स्तर 400 के पार हुआ तो इसे ‘गंभीर’ माना जाता है।
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दरअसल हर साल राजधानी में वायु प्रदूषण को लेकर यही हाल रहता है। दिवाली के बाद और सर्दियों के आगमन से पहले यह दमघोंटू हवा और जहरीली हो जाती है। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सरकारों की ओर से तमाम तरह के उपाय किए जाते हैं। इस बार भी केन्द्र सरकार ने पराली जलाने पर तीस हजार रूपए जुर्माना कर दिया है।
हालांकि दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने की बड़ी वजहों में से एक पराली जलाने को भी माना जाता है। लेकिन स्टडी से पता चलता है कि पराली जलाने से दिल्ली में उतना प्रदूषण नहीं बढ़ता जितना शोर मचाया जाता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्मेंट ने दिल्ली के वायु प्रदूषण पर एक स्टडी की है। इस स्टडी में बताया है कि दिल्ली में जो प्रदूषण बढ़ता है। उसमें पराली की हिस्सेदारी सिर्फ 8.2 फीसदी है। दिल्ली में 30 फीसदी से ज्यादा प्रदूषण लोकल सोर्स की वजह से बढ़ता है। जबकि एनसीआर जिलों की वजह से लगभग 35 फीसदी प्रदूषण बढ़ता है। इसके अलावा प्रदूषण बढ़ने की वजह गाड़ियां हैं।
