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बाढ़ और अगलगी की विपदा को अब भी नहीं भूल पाते हरिवंश

पंचायत खबर टोलीआज प्रभात खबर के पूर्व संपादक हरिवंश दूसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गये.इस मौके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में उनका जीवन परिचय देते हुए दो प्रसंगों की चर्चा की; एक- जूते की, दूसरा उनके गांव की. दोनों बड़े रोचक व प्रेरक प्रसंग हैं. ये प्रसंग डॉ आर‌ के नीरद की …

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राफेल: गौरवान्वित हुआ विंग कमांडर मनीष सिंह का गांव,आसमान की ओर तकते रहे परिजन

आलोक रंजन बलिया: बागी बलिया आज बल्लियों उछल रहा है। अपने लाल के करतब पर गौरवान्वित हो रहा है। मंगल पांडे का बलिया, चित्तु पांडे का बलिया, पूर्व प्रधानमंत्री और समाजवादी नेता चंद्रशेखर का बलिया, जनेश्वर मिश्र का बलिया। हजारी प्रसाद द्विवेदी का बलिया, केदार नाथ सिंह का बलिया। जी हां खुश हो भी क्यों …

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कोरोना के साथ बाढ़ की आशंका में दिन रात गुजार रहे हैं बलिया वासी

आलोक रंजन बलिया: कोरोनाकाल में पहले से ही रोजी रोटी के लाले पड़े हुए हैं। संक्रमण का खतरा और आंकड़े निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। इस बीच बलिया वालों के लिए एक नई आफत सामने आ गयी है। आप यह भी कह सकते हैं कि कोरोना नया है, मानसून में वर्षा और नदियों के पानी …

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उतार-चढ़ाव के हिचकोलों भरी जिंदगी में चलते रहना ही नियति है…

प्रशांत बलिया चंद्रशेखर जी जैसे युगदृष्टा कभी दिवंगत नहीं होते, वे मृत्यु को भी प्राप्त नहीं होते। वे तो सदा वर्तमान रहते हैं, अपने आदर्शों के जरिये, अपने दूरदर्शी विचारों के जरिये अपने लाखों-करोडों समर्थकों के हृदय में सुनहरे भविष्य की आशा की एक धड़कन बन कर। आज चंद्रशेखर जी की पुण्यतिथि है। आज से …

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जहाँ भी रहे गाँव वाला बने रहे

 डॉ संध्या सिंह मेरे बाजी (डॉ. केदारनाथ सिंह) कहीं भी रहे पर गाँव उनकी रगो में बसता था और बहता था। गाँव, गाँव के लोग, खेत खलिहान, भागड़ यहाँ तक कि खेत में खड़ा ‘कुदाल’ भी उनको आमंत्रित करते रहे। उनकी कविताओं में ये बिंब बार-बार आते हैं। ड्राइंगरूम में कुदाल की जगह ढूढँते-ढूढँते वे …

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सोशल मीडिया पर नहीं रूक रहा अध्यक्ष जी को याद करने का सिलसिला

मंगरूआ नयी दिल्ली: देश में कोरोना महामारी के कारण आपात काल जैसी स्थिति है। लॉक डाउन के दौरान बाहर निकलना मना है। कोई सार्वजनिक सभा समारोह भी नहीं किया जा सकता। लेकिन इस बीच आपात काल के दौरान और उसके बाद के संसदीय राजनीति में, देश में जनमानस के नायक, लोकयात्री और युवा तुर्क के …

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कोरोना के कहर बीच…यूं सोशल मीडिया पर याद किये गये अध्यक्ष जी

मंगरूआ देश में कोरोना महामारी के कारण आपात काल जैसी स्थिती है। बाहर निकलना मना है। कोई सार्वजनिक सभा समारोह भी नहीं किया जा सकता। लेकिन इस बीच आपात काल के दौरान और उसके बाद के संसदीय राजनीति में, देश में जनमानस के नायक, लोकयात्री और युवा तुर्क के रूप में अपनी पहचान बना चुके …

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अब न वह गांव है, न वे लोग हैं, न वह परिवेश है…

हरिवंश जिस गांव में शिक्षा की भूख बढ़ी, वह भी खुद के कारण नहीं, अध्यापकों के कारण. वे पुराने किस्म के अध्यापक थे, धोती-कुर्ता वाले, हर साल इंक्रीमेंट और तनख्वाह बढ़ाने के लिए आंदोलन करने वाले नहीं, बल्कि अपने बच्चों को शिक्षित करने की प्रक्रिया में आत्मसुख पाने वाले (अपवाद हर दौर में होते हैं, …

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बहुत बदला गांव, पर कुछ अनमोल खो गया

  हरिवंश ग्राम्य जीवन को गांधी ने भी नजदीक से देखा था और उनका सही निष्कर्ष था कि इन गांवों को स्वायत्त बनाकर विकसित करना ही भारत के हक में होगा। शायद गांव की सांस्कृतिक धारावाहिकता या पुरातनता के कारण ही मुहम्मद इकबाल को लिखना पड़ा- यूनां, मिस्र, रोमा, सब मिट गए जहां से, बाकी …

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बचपन में समझते थे कि जगदीश बाबू जेपी के घर के हैं…

हरिवंश एक बार चंद्रशेखर जी से मैंने कहा कि आज जो भी राजनेता हैं वे सभी अपने संसदीय या विधानसभा क्षेत्र के विकास में डूबे हुए हैं. जयप्रकाश जी का यह गांव पीछे छूट गया था, आपने कुछ काम कराया. उनका जवाब था देखो, उत्तर प्रदेश से कितने प्रधानमंत्री और बड़े नेता हुए. हाल की …

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