कोरोना के कहर बीच…यूं सोशल मीडिया पर याद किये गये अध्यक्ष जी

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मंगरूआ
देश में कोरोना महामारी के कारण आपात काल जैसी स्थिती है। बाहर निकलना मना है। कोई सार्वजनिक सभा समारोह भी नहीं किया जा सकता। लेकिन इस बीच आपात काल के दौरान और उसके बाद के संसदीय राजनीति में, देश में जनमानस के नायक, लोकयात्री और युवा तुर्क के रूप में अपनी पहचान बना चुके पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 93 जयंती भी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने नेता को खूब याद किया। उनके साथ के संस्मरण लिखे। भारतीय राजनीति में उनके अवदान को याद किया। बदले हुए दौर में चंद्रशेखर जैसे गांव—गंवई से निकले इस ठेठ चरित्र वाले नेता की आज के दौर में और भी ज्यादा जरूरत होने की बात लोगों ने कही। साथ ही चंद्रशेखर जी की अलग—अलग तस्वीर के जरिए लोगों ने उन्हें याद किया। सोशल मीडिया माध्यमों पर चंद्रशेखर को लेकर जो लिखा, कहा गया उससे उनके विराट व्यक्तित्व का पता चलता है। पेश है इनमें कई लोगों के फेसबुक पोस्ट का संपादित,संक्षेपित अंश
बात शुरू करते हैं चंद्रशेखर के बेटे और भाजपा से राज्यसभा सांसद नीरज शेखर के पोस्ट से। नीरज शेखर लिखते हैं कि
आज पिता जी श्री चन्द्रशेखर भूतपूर्व प्रधानमंत्री, भारत सरकार के 93वी जयंती पर कोरोना महामारी के कारण भारत सरकार के आदेशानुसार सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए उनकी समाधि ‘जननायक स्थल’ दिल्ली में श्रद्धांजलि अर्पित किया। इसके साथ ही नीरज ने अपने दिल्ली स्थित सांसद आवास की एक तस्वीर भी डाली है जिसमें वे परिवार के साथ श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

ट्वीटर पर चंद्रशेखर जी को याद करते हुए योगी आदित्यनाथ ने लिखा है
उत्तर प्रदेश के महान सपूत, प्रखर वक्ता, जनप्रिय नेता एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्ण नमन।
समाज के हर वर्ग के उत्थान को समर्पित आपका कृतित्व और व्यक्तित्व सभी के लिए अनुकरणीय और प्रेरणादायक है।
उत्तर प्रदेश वि​धान परिषद सदस्य और चंद्रशेखर के अनुयायी यशवंत सिंह लिखते हैं इस लड़ाई में एक तरफ कोरोना है तो दूसरी तरफ पूरा देश। देशहित में इस लॉकडाउन को सहर्ष लेना ही राष्ट्रपुरुष चंद्रशेखर को वास्तविक श्रद्वांजलि है।
भोजपुरी मैथिली समाज के पूर्व अध्यक्ष अजीत दुबे ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय चन्द्रशेखर जी की 93 वीं जयंति (17 अप्रैल) के अवसर पर कुछ पुरानी तस्वीरों/संस्मरण को साझा करते हुए उन के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ…
श्री चन्द्रशेखर जी स्वतंत्र भारत के उन सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेताओं में से थे जिनका देश के राजनीतिक परिदृश्य पर व्यापक प्रभाव था.उन्हें प्रथमत: उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार से 1995 में नवाज़ा गया था एवं विधायिका में अनुशासन और मर्यादा के वो प्रतीक थे.
1983 में चन्द्रशेखर जी की भारत पदयात्रा के दौरान मुम्बई के रात्रि विश्रामस्थल में उनके दर्शन का मुझे भी सौभाग्य मिला था,जब उनकी लोकप्रियता शायद अपने शिखर पर थी.मुझे आज भी स्मरण है मुम्बई के समाचार पत्र का शीर्षक कुछ इस प्रकार था..’Watch this man,He isn’t alone’.
चन्द्रशेखर जी की 75 वीं वर्षगाँठ ‘अमृत महोत्सव’ के मौक़े पर 2002 विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह की स्मृतियाँ मन मस्तिष्क में आज भी ताज़ा हैं,तत्कालीन उपराष्ट्रपति श्री कृष्णकांत,तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी,तत्कालीन गृहमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी,वरिष्ठ राजनेतागण जॉर्ज फ़र्नांडिस, मुलायम सिंह यादव, लालू यादव, शरद यादव के अतिरिक्त नेपाल से श्री कोईराला जी भी जिसमें उपस्थित थे। प्रमुख राजनेताओं के सम्बोधन के उपरान्त अटल जी ने अपने विशिष्ट अन्दाज़ में चन्द्रशेखर जी के व्यक्तित्व का ज़िक्र करते हुए कुछ यूँ कहा,’चन्द्रशेखर जी एक कुशल वक्ता हैं,परन्तु जब ग़ुस्से में होते हैं तो और भी अच्छा बोलते हैं’…आख़िरी वक्ता होने के नाते चन्द्रशेखर जी ने आभार इत्यादि प्रकट करने के उपरान्त अपने ही अन्दाज़ में बताया कि शुरू से ही वो अटल जी की अध्यक्षता वाली सांसदों की समिति के सदस्य होने के नाते उनको गुरु जी कह के सम्बोधित करते आए हैं। आज जब गुरुजी ने मेरे ग़ुस्से का ज़िक्र किया है तो मैं विनम्रतापूर्वक बताना चाहूँगा, “ मैं श्री भृगु ऋषि की तपोभूमि बलिया से आता हूँ एवं भृगुऋषि के ग़ुस्से को कौन नहीं जानता,जिन्होंने भगवान विष्णु के सिंहासन को भी लात मार दी थी.” सभागार में गूंजी तालियों की गड़गड़ाहट उस जननायक की स्मृति को ताज़ा कर दे रही हैं.
अपने दिल से निकले विभिन्न सम्बोधन के दौरान चन्द्रशेखर जी अक्सर बेहतरीन शायरी का भी प्रयोग करते थे..एक उदाहरण;
“मैदाने इंतेहा से घबरा के हट न जाना,
तकमील ज़िन्दगी है,चोटों पे चोट खाना.
अब अहले गुलिस्ताँ को शायद न हो शिकायत,
मैंने बना लिया है,काँटों में आशियाना.”
चन्द्रशेखर जी की पुण्य स्मृति को शत शत नमन.

वहीं उत्तर प्रदेश के राणा प्रताप सिंह लिखते हैं…
१७अप्रैल,२०२०–९३वी,जयंती
ये तस्वीरें २००२ की हमारे विद्यालय पर आदरणीय अध्यक्ष जी के एक कार्यक्रम की है। ऐसी अनेक स्मृतियां अध्यक्ष के साथ तस्वीर के रूप में और बगैर तस्वीर के रूप में मेरे हृदय में एकत्रित है।क्या कहूं कितना कहूं कुछ समझ नहीं आता बस इतना ही जान लीजिए कि #चंद्रशेखर_जी_अपने_आप_में_एक #राष्ट्र_थे। अपार श्रद्धा के साथ #आदरणीय_अध्यक्ष_जी_को #जयंती_पर_प्रणाम।

वहीं वरिष्ट ओम प्रकाश अश्क ने लिखा है कि आज अपने-अपने क्षेत्र के दो दिग्गजों को याद करने का दिन है। एक हैं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर और दूसरे हैं राजनीति के आग्रही, किंतु प्रथमतया शिक्षक स्व. विष्णुकांत शास्त्री। वे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल भी रहे। दुर्योगवश दोनों से मिलने के अलग-अलग अवसर उनके अवसान के कुछ ही महीने पहले मिले थे। दोनों को सादर नमन!

कर्ण प्रताप सिंह-कुन्नू…….
सम्पूर्ण देवमंडल (विश्व) जिन्हें युवा तुर्क के नाम से जानती है
नाम है चंद्रशेखर….
यूं ही नहीं कोई बन जाता चंद्रशेखर,
सदियां गुजर जाती हैं चंद्रशेखर बनने में …
विश्वपुरूष,युगपुरुष,राष्ट्रनायक,अपने फन के माहिर एवं कुशल राजनीतिज्ञ,बेबाक टिप्पणीकार,बागी बलिया की मर्यादा,जीवन प्रयंत युवा दिलों के कुशल बादशाह,महान समीक्षक,किसी शक्ति के सम्मुख न झुकने का हौसला रखने वाले,1977 के भारतीय राजनीति के बड़े हस्ताक्षर,जननायक की उपाधि से बिभुषित,सर्वश्रेष्ठ सांसद,भारत के प्रथम समाजवादी प्रधानमंत्री,भारत की आत्मा अर्थात किसान पुत्र आदरणीय,पूजनीय #श्री_चन्द्रशेखर_जी की स्मृति शेष क़ो सादर नमन एवं भावपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि।
आज से ठीक 18 साल पहले।
नेहरू इंटर कालेज,रतनपुरा में विद्यालय की स्वण जयंती के अवसर पर आदरणीय अध्यक्ष जी कुछ स्मृतियां।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में प्रोफेसर काशीनाथ सिंह लिखते हैं…
अपने पैतृक आवास नवापूरा बलिया में देश के प्रथम समाजवादी प्रधान मंत्री जन नायक चंद्र शेखर जी की ९३ वीं जयंती सादगी पूर्ण ढंग से दीप प्र्ज्व्वलित कर व पुष्प अर्पित कर मनाया I
युग पुरुष चंद्र शेखर को शत शत नमन I
उत्तर प्रदेश के ही राजेश्वर मिश्रा लिखते हैं..कि
छात्र-युवा – नवजवानों के रहनुमा और छात्र राजनीति के प्राथमिक शिक्षा से ही हमारे आदर्श प्रेरणा स्रोत , जननायक युवातुर्क पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय स्व श्री चंद्रशेखर जी के कल आयोजित जयंती कार्यक्रम लॉक डॉउन के कारण स्थगित हो गया है। चंद्रशेखर जी के अनुयायियों से आग्रह है कि कोरोना महामारी में घर पर ही जयंती मनाते हुए गरीबों की सेवा उपवास रखते हुए करें।यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
वहीं उत्तर प्रदेश के सौरभ यादव ​ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि

श्री चन्द्रशेखर ने अपने विचारों से कभी समझौता नहीं किया. यही उनकी ताकत है. विरोधी पार्टियों के साथ-साथ अपनी पार्टी की भी गलतियों को ज़ाहिर किया व उसकी समालोचना की.
जब संसद में श्री मुरली मनोहर जोशी ने हिंदुत्व पर बहस छेड़ी तो चन्द्रशेखर ने विनम्रतापूर्वक कहा कि मुझे गर्व है कि मैं हिन्दू हूँ. लेकिन मैं ऐसा हिंदुस्तान नहीं चाहता जिसमें अल्पसंख्यकों को मेहमान और बहुसंख्यकों को सर्वेसर्वा माना जाए. उन्होंने यह भी कहा कि किसी को भी यह अधिकार नहीं कि किसी की देशभक्ति पर शक करे!
सौरभ आगे लिखते हैं….
एक दिन संसद में चर्चा के दौरान अटल जी के सामने शरद और ‌रामबिलास दोनों उद्दंडता करने लगे। तब वरिष्ठ नेता और जनता पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर जी ने कहा – “शरद, राम बिलास तुम्हारे पिछले जन्म के कुछ पुण्य कर्म है जिसके कारन तुम्हे अटल जी को सुनने का मौका मिला है ,इन्हे ध्यान से सुनो । ये राजनीति के महाग्रंथ है ।”
तब शरद यादव ने अपनी दबंगई दिखाते हुए चंद्रशेखर जी को टोका और कहा “अध्यक्ष जी आप बीच में मत बोलिये ।”
बस फिर क्या था !
चंद्रशेखर जी ने भरी संसद में अपना जो रौद्र रूप दिखाया तो इन तथाकथित उस जमाने के इन युवा नेताओं की धूजणी छूटने लगी । चंद्रशेखर जी ने उस समय कड़कती आवाज में कहा था :
“मुझसे ऐसे भाषा में बात करते हो। संसद भवन के बाहर ऐसे भाषा बोलो शरद। मैं तुम दोनों को यकीन दिलाता हूँ , तुम्हारे आने वाली पीढ़ियों में भी कोई गुंडा पैदा नहीं हो पायेगा.” यह सुनते ही दोनों को सांप सूंघ गया और वे भयभीत नजर आने लगे । दोनो ने सदन से बाहर निकलते ही चंद्रशेखर जी से माफी भी मांगी
चंद्रशेखर दबंगों के भी दबंग थे । भाई

 

फेसबुक यूजर उत्तर प्रदेश के सुमित सिंह प्रीतू लिखते हैं…
युवा राजनीति के मार्ग दर्शक दिवंगत देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह जी की जयन्ती पर श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं एक प्रखर वक्ता, लोकप्रिय राजनेता, विद्वान लेखक और बेबाक समीक्षक युवा तुर्क के नाम से मशहूर रहेI किसान, मजदूरों एवं छात्रों की समस्या पर अग्रणी भूमिका निभाते रहे
है वहीं शुरमा इस जग में जो अपनी राह बनाता है,
कोई चलता पदचिन्हों पर,कोई पदचिन्ह बनाता है….!!
शत शत नमन

आयुष चर्तुवेदी ने लिखा है…

आज जेल जाना किसी भी नेता को बहुत ही शर्मनाक बात लगती होगी. शायद इसलिए क्योंकि सामाजिक लड़ाइयों की ख़ातिर जेल जाना आज कम सा हो गया है. ऐसे में चन्द्रशेखर को याद करना ज़रूरी हो जाता है जो कहते थे-“जेल ही मेरा घर है!”
साहित्यिक कारीगरी व क्रांतिकारी-प्रगतिशील विचारों के साबुन से नहलाकर लिखा गया ललित गद्य भी खारिज़ कर दिया जाएगा यदि लेखक के व्यवहारों में वह गुण न हों!
चन्द्रशेखर में यह गुण थे, वह वैचारिक राजनीति करते थे, इसीलिए वह ‘फायरब्रांड’ थे!
जब इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई तो चन्द्रशेखर ने भी अन्य समाजवादी नेताओं की तरह इसका विरोध किया.
चूंकि चन्द्रशेखर अपनी दबंगई व तर्कशील भाषणों के लिए जाने जाते थे, सो कोई गड़बड़ न हो इसलिए एक सरकारी आदमी ने आकर चन्द्रशेखर को हिदायत दी कि यदि वह किसी भी राजनीतिक गतिविधि में भाग न लें तो जेल जाने से बच सकते हैं. इस बात पर चन्द्रशेखर ने कहा कि मैं सदैव अन्याय की मुख़ालिफ़त करूँगा और यदि इसके लिए जेल जाना पड़े तो जेल ही मेरा घर है, यह प्रस्ताव जाकर किसी और को दीजिए!
इस तरह की निर्भीकता का वर्तमान राजनीति में लोप दिखता है. राजनीतिक गतिविधियों में जेल जाने वाले किसी भी नेता को खुले तौर पर राष्ट्रद्रोही, देशद्रोही, अर्बन नक्सल वग़ैरह कहकर प्रचारित किया जाता है.
इसमें कोई दो राय नहीं है कि यदि चन्द्रशेखर होते तो उन्हें भी यह तमगे मिलते लेकिन चन्द्रशेखर इतनी आसानी से हार थोड़े न मान जाते.
आसानी से हार न मानना ही तो उनकी ख़ासियत थी. वह निरा फक्कड़ और देसी आदमी एक “देहाती नक्सल” कहलाता आज! और गर्व के साथ उस तमगे को साथ लेकर चलता.
गांधी, नेहरू, सरदार पटेल, लोहिया, जयप्रकाश भी तो जेल गए. शायद ही कोई ऐसा बड़ा नेता हो जो जेल न गया हो.
हमें समझना पड़ेगा कि “गाली को गहना” बनाने का माद्दा इन्हीं गांधीवादी और समाजवादी लोगों में था, और किसी में नहीं.
डींगें हाँकना आसान होता है. डींगों से कान पकते हैं, पेट नहीं भरता!
जयंती पर पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर को नमन।
उत्तर प्रदेश से अंकुर सिंह लिखते हैं…

आज युवा तुर्क जननायक पूर्व प्रधानमंत्री चन्दशेखर जी (जीवन के कम उम्र में मुझे चन्दशेखर जी के गोद में बैठने का मौका मिला था आज इनके अनुवाईयो से इनके विचार मिलते हैं सौभाग्यशाली मानता हू मैं खुद को) के 93वीं जन्म के अवसर पर उन्हें अपने आवास पर पुष्प अर्पित किया।
हां वही चंदशेखर जी जो बेबाक टिप्पणी के वजह से युवा तुर्क कहलाये , वही चन्दशेखर जो भरी सभा में इंदिरा गाँधी को बोल दिए की इस ओल्ड ऐज कांग्रेस को समाजवादी बना दूंगा, नहीं बना पाया तो तोड़ दूंगा कांग्रेस को मैं, हां जी वही चंद्रशेखर जी जो जिनका एक प्रसंग ये भी है एक कार्यक्रम में लोहिया जी के बार-२ पूछने पर की जीप कहां हैं, बेबाक जवाब देते हुए बोलै डॉक्टर साहब वो रही आपकी जीप हमें आपके कार्यक्रम की जरुरत नहीं आप जा सकते हो। हां जी मैं उन्ही चंदशेखर जी के बारे में बता रहा हुईं जो संबंधो को ध्यान रखते हुए बोले क्या हुआ भले वो अपराधी है लेकिन मेरे पड़ोसी / गृह जनपद का है , हां वही चन्दशेखर जी जो पार्टी के ५५ सांसद और बाहरी समर्थन से प्रधानमंत्री बने और उन पर हरियाणा पुलिस से जासूसी का आरोप लगाया कांग्रेस ने और चंदशेखर जी ने संसद के पटल पर इस्तीफा रख दिया, राजीव गाँधी ने सदेश भिजवाया की चन्दशेखर जी चाहे तो इस्तीफा वापस ले सकते है। अध्यक्ष जी (लोग इस नाम से भी बुलाते है चन्दशेखर जी को) बोले जा के राजीव गाँधी जी से बोल दीजिये चंद्रशेखर दिन में बार- बार अपने बयान नहीं बदलता , चंद्रशेखर विचारो की राजनीति करता है न की सत्ता की।
खैर अध्यक्ष जी के प्रसंग तो बहुत हैं जितना लिखूं कम ही होगा, जो भी आया पास सबकी मदद किये चाहे लालू को पहली बार, रघुवीर प्रसाद को चुनाव लड़ा मुख्यमंत्री बनाये चाहे शरद पवार को नेता शरद पवार और मुलायम सिंह को नेता मुलायम सिंह बनाये, किस्से तो बहुत हैंं अध्यक्ष जी से कभी पूर्व मंत्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव बाबा सुनाये हो,या कभी पूर्व मंत्री ओमप्रकश सिंह (गाज़ीपुर) या कभी किशोर पाटनवार चाचा के विचारों से या कभी सूर्या कुमार चाचा से सुनी हो मैंने, या बात बात पर पापा का मुझे कहना की छोड़ो, उसने साथ नहीं दिया तो क्या हुआ मेरे नेता चंद्रशेखर जी (पापा कई बार मिले चाहे चन्द्रशेखर जी के घर वैवाहिक कार्यक्रम हो चाहे आचार्य नरेंद्र देव के नाम पर सारनाथ सम्मलेन उन्हें तो कई मौके मिले) कहते थे धोखा देना अपराध है खाना नहीं (जब ताऊ देवीलाल ने प्रधानमत्री पद वी पी सिंह को सौप दिया), इसलिए तुम किसी को धोखा मत देना। भले वो क्या करता है तुम्हारे साथ न्याय भगवान करेगा ……..चन्दशेखर जी के किस्से ऐसे बहुत है चाहे एमएलसी यशवंत सिंह या राज्य सभा के उप सभापति हरिवंश जी ने बोली हो ….. नाम और भी है जिनका सानिध्य मिला मुझे खैर जितना भी लिखूं कम है चंद्रशेखर जी के बारे में वो तो असहाय लोगो के सहाय थे उन्होंने सबका दर्द समझा था 4260 किलोमीटर की पदयात्रा में देश के इस कोने से उस कोने तक ।
खैर साल 2007 से चन्द्रशेखर जी का स्वास्थय गिरता जा रहा था कैंसर से वजह से और जुलाई का वो 8वीं तारीख की सुबह (मैं कक्षा ११वी में था) जब देश ने बेबाक नेता खो दिया। हां, वही बेबाकी जब बंद कमरे की बाते सावर्जनिक कर देते थे और बोलते थे की नेता से जुडी कोई चीज़ निजी नहीं होती उसे जनता में सावर्जनिक कर देना चाहिए।
कहने लिखने को बहुत कुछ है लिखूं तो चन्दशेखर जी के जेल में लिखी डायरी (जो बाद में “मेरी जेल यात्रा नाम से प्रकाशित हुयी”) की तरह किताब बन जायेगा मेरा ये लेख।
अंत में यही चन्दशेखर जी को शत शत नमन अध्यक्ष जी के विचार हमेंशा हम में रहेंगे, चन्दशेखर जी अमर रहे उनकी विचार धारा को इस अंकुर का सलाम, और मुझे इस जीवन का आभार जो आपके गोद में रहने का मौका मिला मुझे।
और अंत में एक विनती सबसे इस महामारी बीमारी से बचने के लिए घर में रहे, सुरक्षित रहे सरकारी आदेशों का पालन करे।

चंद्रशेखर के भारत यात्रा और भारत यात्रा केंद्र से जुड़े हुए सूर्या कुमार लिखते हैं…
###हे राज नीति के धवल पुरूष ,तुझको सौ बार नमन मेरा ###
देव ग्राम ( पयाग पुर) बहराइच उत्तर प्रदेश में जन नायक चन्द्र शेखर स्मृति प्रतीक पर तन्हाई बिता रहे जन नायक के समर्थक17 साथियों द्वारा सामाजिक दूरी बना कर दीप प्रज्ज्वलन करके श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। साथ ही मौन रह कर वैश्विक आपदा के शिकार अकाल मौत के आगोस में समाये विश्व भर के नागरिको की आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना भी की गयी। सर्व धर्म प्रार्थना के साथ कार्क्रम समापन्न हुआ।
इस अवसर मै स्वयम् सूर्य कुमार सर्व श्री रमेश प्रताप सिहं,कुमार उदयन्,नन्द किशोर सिहं,अंकित ,इन्द्र जीत सिहं ,सर्व श्री मती कुसुम सिहं, काजल ,स्वाति कुमारी रूचि,कुमारी यशोलेखा कुमार,कुमार सत्यम्,शिवम् ,शशांक ,शिखर,प्रज्जवल,राम दयाल आदि उपस्थित रहे।
राजनीति की प्रखर चेतना के थे कुशल चितेरा,भारत का गौरव बन कर तुमने ज्योति बिखेरा।
उत्तर प्रदेश के बलिया में जन्में बनकर ध्रुव तारा,
धन्य हुई वह गोद मिला जिसमें जीवन सुख सारा।
भारतीयता के प्रतीक तुम जन गण मन के नायक,
संविधान के पालक थे तुम अमर कीर्ति के वाहक,
शोषित और दलित के दिल में तेरा रहा बसेरा।
युवा तुर्क बन राजनीति में खींची ऐसी रेखा,
शीर्ष पुरूष के रूप में तुझको अपने देश ने देखा,
युग प्रशस्थ हो साथ रहे नित पथ निर्देशन तेरा।। सुभाष
बिहार से धनंजय सिंह ने पोस्ट किया है..
“का हो लालू ,काहे अनाप शनाप बोल तार”।भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पटना हवाई अड्डा प ई बात चंद्रशेखर जी ओह घरी के बिहार के मुख्यमंत्री लालू जी के कहले रहन।चंद्रशेखर जी के हीरक जयंती समारोह में नरेंद्र सिंह जब कहलन की हमनी के सब पार्टी के नेता एहिजीग बइठल बानी जा,हमनी के ई कार्यक्रम में तय कर देवे के बा कि चन्द्रशेखर जी बिहार के कौनो लोकसभा से चुनाव लड़स आउर हमनी के आपन पाटी से प्रत्याशी नइखे देवे के।साथ मे एहु आह्वान कइलन की चन्द्रशेखर जी रउआ जे पी बनी।एकरा बाद त लालू जी लेले सुशील मोदी ,समता पाटी के दिग्विजय सिंह सब लोग आपन भाषण में कहलन की चन्द्रशेखर जी तय करी की रउआ बिहार में कहां से चुनाव लड़म, हमनी के आपन पाटी से उम्मीदवार ना देम जा।जब चन्द्रशेखर जी के बोले के बारी आइल त उहाँ के कहनी की नरेंद्र जी हम तोहार बाबूजी जोरे राजनीति कइले बानी।हम बुढाईल जरूर बानी ,लेकिन तू सब लोग आपन टिकस अपने पास राख लोगिन।जहाँ तक से जे पी बने के बात बा त बिहार के तू सब लोग के हम जानिला की कुर्सी खातिर एने से ओने करे में देर ना करे ला जा।ओहि कार्यक्रम में उ कहले रहन की आज के लालू के त दूर से भी हम ना चिनहीँना।77 के लोकसभा के चुनाव में जब हम छपरा चुनाव प्रचार में गइनि त पता चलल की प्रत्याशी के बोखार लागल बा।सभा के बाद हम प्रत्याशी से हम मिले गइनी..एक गुमशाइनन कमरा में,फाटल रजाई में उ दुबला पतला लालू के हम आजो चिन्हिना।सुशील मोदी के त एरियल साबुन से फिंच देले चन्द्रशेखर जी।उ कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता भारत के उपराष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत रहन।हम जब 5 बरिस के रहीं त आपना बाबूजी के कंधा प बैठ के ओह सस्ती में 10 रोपया चंद्रशेखर जी के देले रहीं त चन्द्रशेखर जी खुश होके हमरा के गोदी में ले लेले रहन आउर ओहि दिन से हमहु नेता हो गइल रहीं।चंद्रशेखर जी आपन सब मीटिंग के बाद गमछा लेके फिल्डवा के चारु ओरा घूम जात रहन ,ढेर पैसो मिल जात रहे।आज के नेता जी लोग त खाली बोआरी धरे के फेरा में रहता।आजकल फेसबुक प गमछा चैलेंज चलल बा।ई सब फलतुआ फेर में नइखे रहे के।गमछा माथा आउर नाक दुनो पे बांध के कोरोना के साथ साथ आपन समाज में जेतना कोरोना अइसन बेमारी बा ओकरा से लड़े के काम बा।चन्द्रशेखर जी एक हाली कहले रहन की “we are not leaders,dealers in party”फालतू के डीलरई छोड़ के लीडरै चालू करे के काम बा।आज उनकर जयंती प ओह महान आत्मा के नमन बा।
बिहार से ही अभय प्रताप सिंह लिखते हैं..
चंद्रशेखर जी के अवतरन दिवस पर चंद्रशेखर जी के चरणों में नमन।। चंद्रशेखर मतलब आत्मबल, चंद्रशेखर मतलब स्वाभिमान। चंद्रशेखर मतलब त्याग, तपस्या, मानवता, समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए बिना जाति और धर्म के भेदभाव किये उनके प्रति करुणा, दया, प्रेम और स्नेह।।। चंद्रशेखर समाजवाद के आधार स्तंभ थे, परम आदरणीय पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर वंशवाद, परिवारवाद, जातिवाद, पूंजीवाद को लोकतंत्र के लिए कैंसर से ज्यादा खतरनाक मानते थे और यही कारण रहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी ने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी अपने पुत्रों को जीते जी नहीं बनाया।।। चंद्रशेखर जी जब तक जीवित रहे राजनीतिक में सक्रिय रहे पूंजीवादी व्यवस्था के समर्थक सांप्रदायिक ताकते सदन में उनके सामने सर उठाने की हिम्मत नहीं कर पाते थे।। चंद्रशेखर जी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने कहा लोकतंत्र में सरकार से सहमति और असहमति रखना लोगों का मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकार है।। सहमति और असहमति लोकतंत्र का आधारशिला है, अगर कोई सरकार के नीतियों से असंतुष्ट हैं तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक तरीके से सरकार का विरोध लोकतंत्र को मजबूत करता है।। चंद्रशेखर जी कहा करते थे की अगर कोई हमारे विचारों से, नीतियों से असहमति रखता है तो यह हमारे सरकार के लिये कहीं से न्याय संगत नहीं है कि सता का दुरुपयोग कर प्रशासन की सहायता से राजनीतिक विरोध के स्वर को कुचल दिया जाय।।।।। चंद्रशेखर होना कोई आसान काम नहीं है।।। वर्तमान पूंजीवादी केंद्र सरकार ने चंद्रशेखर जी के नरेन्द्र निकेतन पर बुलडोजर चढा कर समाजवाद के आत्मा को रौंद कर चंद्रशेखर के यादो को मिटाने का कार्य किया लेकिन पूंजीवादी व्यवस्था के रावणी अहंकार में मग्न केन्द्र सरकार मे हुक्मरानों को शायद यह पता नहीं है की तुम किसी के शरीर को मार सकते हो, कुचल सकते हो उसके विचारों को नहीं।।। चंद्रशेखर समाजवाद की विचारधारा है जिसे मिटाने वाले खुद मिट्टी में मिल जायेगा।।।।। पूंजीवादी व्यवस्था के तलवे चाटने वाले जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाले, आर्थिक आधार पर मजदूरों, और गरीबों तथा किसानों से नफरत करने वाले भी आज चंद्रशेखर जयंती की बधाई देने का ढोंग किया है।।। चंद्रशेखर के विचारधारा के विपरीत विचारधारा गरीबों मजदूरों से नफरत करने वाले पूंजीवादी व्यवस्था को समर्थन करने चंद्रशेखर के समर्थक कैसे हो सकते हैं।।।। चंद्रशेखर अमर रहे नमन।।।।।
सिवान के युवा नेता और राजनीति कार्यकर्ता कुमार गौरव बंटी लिखते हैं कि

#स्वांग_नही_त्याग
बात मार्च 1990 की है राजीव गांधी ने एक बेहद ओछे आरोप लगा चंद्रशेखर सरकार गिराने की बन्दरघुड़की दी। चंद्रशेखर जिन्होंने उनकी अगियाबैताल माँ स्वर्गीय इंदिरा गांधी के ताव कभी नही सहे, वाजपेयी जी या देवगौड़ा जी की तरह मनुहार के बजाय अविलंब प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। हक्के-बक्के राजीव की हेकड़ी गुम थी बदहवाशी में उन्होंने बालियां के बाबुसाहेब को मनाने हेतु देवीलाल को भेजा….जिन्हें युवा तुर्क का जबाब था, “देवीलाल तुम खुद प्रधानमंत्री बनने के लिए बात कर लेना मेरी नही….”
संदेश सुन भावशून्य राजीव ने शरद पवार को ये जम्मेदारी सौंपी।
पवार अपनी आत्मकथा, ऑन_माई_टर्म्स में लिखते हैं, राजीव गाँधी ने मुझे दिल्ली बुला कर कहा कि क्या मैं चंद्रशेखर को इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए मना सकता हूँ? मैं चंद्रशेखर के पास गया। उन्होंने मेरे आने की वजह पूछी। मैंने कहा, ‘मैं आपसे बात करना चाहता हूँ।’ उन्होंने कुछ रुखे अंदाज़ में पूछा,’क्या तुम्हें राजीव ने भेजा है?’
मैंने कहा, ‘कुछ ग़लतफ़हमियाँ हुई हैं। कांग्रेस नहीं चाहती है कि आपकी सरकार गिरे। आप अपना इस्तीफ़ा वापस ले लीजिए। हम चाहते हैं कि आप अपने पद पर बने रहें।’ चंद्रशेखर ग़ुस्से से कांपते हुए बोले, ‘आप प्रधानमंत्री के पद का कैसे इस तरह उपहास कर सकते हैं?
आपकी पार्टी के अध्यक्ष भी इस पद पर रह चुके हैं. क्या कांग्रेस वाकई ये मानती है कि मैं राजीव की जासूसी के लिए पुलिस के सिपाही भेजूंगा?’ फिर उन्होंने आख़िरी वाक्य कहा, “जाओ और उनसे कह दो, चंद्रशेखर एक दिन में तीन बार अपने विचार नहीं बदलता।”

युवा शिक्षाविद् और राजनीतिक कार्यकर्ता अमरेंद्र राजेश ने लिखा है..
वही चन्द्रशेखर जिन्होंने अपने जीवनकाल में अपने पुत्रों को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी नही बनाया।वही चन्द्रशेखर जिन्होंने अपने नाम से अपना सरनेम “सिंह” हटाकर प्राचीन क्षत्रिय परम्परा को स्थापित किया कि जन्म से कोई सिंह नही होता बल्कि कर्म से होता है।भारतीयता का प्रतीक धोती कुर्ता पहना और यह साबित किया कि केसरिया साफ़ा क्षत्रियता का प्रतीक नही है।कभी भी लिखित भाषण को नही पढ़ा।कभी भी जय राजपुताना नही बोला क्योंकि ऐसा बोलने से उस क्षात्र धर्म को ठेस पहुचता जिसमे अपने बारे में जय कहना मना है।मात्र चार महीने की अल्पमत की सरकार में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद को सुलझाने के लिए राम मंदिर बनाने गम्भीर प्रयास किया जिसको सफल नही होने देने के लिए उनकी सरकार से समर्थन वापस लिया गया। पहले राजीव गांधी ने चन्द्रशेखर सरकार से समर्थन वापसी के लिए धमकी दी,पर चन्द्रशेखर कहा धमकी से डरने वाले थे! फिर उनसे प्रधानमंत्री बने रहने के लिए उनसे विनती की गई परन्तु चन्द्रशेखर न कहने पर कहा मानने वाले थे।सांसद,मंत्री और प्रधानमंत्री बनने के लिए किसी के दर पर दस्तक नही दिया।। वैसे थे चन्द्रशेखर जिन्हें भारतीय राजनीति में उनके वसूलों से कोई उन्हें डिगा नही सका!उन्हें कोई झुका नही सका! नेहरू,इंदिरा,राजीव,अटल,मोदी को संगठन ने बड़ा बनाया परंतु चन्द्रशेखर के पास कोई संगठन नही रहा,जब रहा तो उन्होंने उससे कुछ पाया नही।जब 1977 में अटल आडवाणी मंत्री बने तब चन्द्रशेखर उस जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे जो सत्ता में थी परन्तु चन्द्रशेखर ने मंत्री बनने से इंकार कर दिया था।ऐसे थे चन्द्रशेखर! कल 17 अप्रैल को उनकी 93 वी जयंती के पूर्व आज उनके चरणों में भावभीनी श्रद्धांजलि।कोटि कोटि नमन!

उत्तर प्रदेश से सुमित सिंह प्रीतू लिखते हैं..
युवा राजनीति के मार्ग दर्शक दिवंगत देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह जी की जयन्ती पर श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं एक प्रखर वक्ता, लोकप्रिय राजनेता, विद्वान लेखक और बेबाक समीक्षक युवा तुर्क के नाम से मशहूर रहेI किसान, मजदूरों एवं छात्रों की समस्या पर अग्रणी भूमिका निभाते रहे
है वहीं शुरमा इस जग में जो अपनी राह बनाता है,
कोई चलता पदचिन्हों पर,कोई पदचिन्ह बनाता है….!!
शत शत नमन

नेकराम पांडेय ने लिखा है..
समाजवादी विचारधारा से प्रेरित युवा तुर्क के नाम प्रसिद्ध लेखक, विचारक, प्रखर वक्ता, स्पष्टवादी, सांसद से सीधे प्रधानमंत्री बने बलिया के लाल माननीय चन्द्रशेखर जी की जयन्ती पर कोटि कोटि नमन!

 

बलिया के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त लिखते हैं…
प्रखर वक्ता, लेखक, उत्कृष्ट सांसद और लोकतांत्रिक मूल्यों व सामाजिक परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्ध राजनेता व पूर्व प्रधानमंत्री स्व चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।
वरिष्ट पत्रकार और बलिया के रहनिहार उमेश चर्तुवेदी ने लिखा है
राष्ट्रीय स्तर पर #चन्द्रशेखर की ख्याति बेबाक नेता की रही। लेकिन उन्हें #बलियावासी होने के नाते बलिया के सांसद के तौर पर जब भी देखता हूँ, निराशा होती है। बलिया को भयानक पिछड़ेपन से मुक्ति के लिए उनका विशेष योगदान नज़र नहीं आता।
जयंती पर नमन

 बलिया के निवासी और दिल्ली में रहकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले  पंचदेव शुक्ल ने लिखा है..
भारत की राजनीति में तथाकथित युवा तुर्क (इस शब्द का अनुवाद आप हिंदी में कर सकते हैं) के नाम से विख्यात पूर्व प्रधानमंत्री और बलिया पर सांसद के रूप में 47 साल राज करने वाले स्वर्गीय चंद्रशेखर जी की जयंती पर उनको किस तरह याद किया जाय यह विचार का विषय है। उन नेताओं के लिए सिख भी है कि आप जनता को गुमराह करके सत्ता पर काबिज हो सकते हैं एक वर्ग विशेष्,रिश्तेदार, संबंधी को खुश रख सकते हैं पर समाज सेवा और बदलाव के नाम पर स्वयं भू की राजनीति करने का चेहरा आज नही तो कल पहचाना ही जायेगा।
आज लाक डाउन व करोना महामारी के समय बलिया में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जर्जर हालत पर चर्चा कर आपको याद किया जाना चाहिए, राष्ट्रीय स्तर पर जिनकी खरी बोली के चर्चे होते थे आज उन्ही के चेले चपाटे दूसरों की ख़री बात सुनने को राजी नही होते और अपने नेता को जातिवादी और अतिवादी चश्मे से देखने से बाज भी नही आते। 47 साल सांसद रहने के वावजूद अपनी मिट्टी और अपने लोकसभा क्षेत्र बलिया को स्वास्थ्य के क्षेत्र में पीछे धकेल दिया आपने, एक समाज सेवा के लिए ट्रस्ट भी बनाया तो उस पर परिवार रिश्तेदार के लोगों का कब्जा है। बलिया में बनी देवस्थली मे कोई गरीब पढ़ नही सकता, आखिर जनता के लिए आपने क्या छोड़ा?, गरीब को आपसे क्या मिला?, बिद्यार्थी आपसे क्या सीखे?, अहंकार!, घमंड!, स्वार्थ!, घृणानिति! या कुछ और!! आखिर बलिया का निवासी होने के नाते मैं केवल आपके बैचारिक महानता के खिस्से क्यो गाउँ क्यों न आपके द्वारा धरातल पर किये गए कार्यों का विश्लेषण करूं जिससे आगे कोई बलिया का नेता आपकी तरह राष्ट्रीय नेता बनने के चक्कर मे बलिया का नाश न कर दे!!
आपको शत शत नमन
युवा पत्रकार व करण छपरा के निवासी आलोक रंजन ने लिखा है..
शत शत नमन बलिया के बाबू साहब को, जो किसी से डरा नही करते थे जिससे प्रधानमंत्री तक डरा करते थे,जिसने कभी लाल बत्ती नही ली सिर्फ सांसद रहे और बने तो सीधे देश के प्रधानमंत्री बने। इन्हें युवा तुर्क भी बोल जाता है। शत शत नमन है देश के ऐसे नेता को…

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