कोरोना के साथ बाढ़ की आशंका में दिन रात गुजार रहे हैं बलिया वासी

आलोक रंजन
बलिया: कोरोनाकाल में पहले से ही रोजी रोटी के लाले पड़े हुए हैं। संक्रमण का खतरा और आंकड़े निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। इस बीच बलिया वालों के लिए एक नई आफत सामने आ गयी है। आप यह भी कह सकते हैं कि कोरोना नया है, मानसून में वर्षा और नदियों के पानी के स्तर में बढ़ोतरी में नया क्या है? खैर बागी बलिया के लोगों को कोरोना और बाढ़ की आशंका इन दोनों के बीच ही दिन कट रहा है। दरअसल घाघरा नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है और जलस्तर में वृद्धि हो रही है। ऐसे में नदी से सटे तमाम गावों में बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है। लोगों की परेशानी भी बढती जा रही है. वहीँ गुरुवार को दो बजे तक जलस्तर 63.810 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार हर एक घंटे में नदी का जलस्तर एक सेंटीमीटर बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को जलस्तर 63.810 मीटर था जोकि खतरे के निशान से महज़ 20 सेंटीमीटर कम है। आपको बता दें कि लाल निशान यहाँ 64.010 है।

ऐसे में आयोग का अनुमान है कि आने वाले 24 घंटे में जलस्तर में काफी बढ़ोतरी की आशंका है। लगातार हो रहे जलस्तर में इजाफे की वजह से नदी का पानी तुर्तीपार के दलित और मल्लाह बस्ती में बढ़ता जा रहा है। गुलौरा गांव में भी पानी बढ़ता जा रहा हैं। वहीं इसके साथ साथ तुर्तीपार से लेकर चैनपुर, हल्दीरामपुर और मुजौना जैसे तमाम इलाके में कृषि योग्य भूमि नदी के पानी की धारा से कटती हुई बहती जा रही है। कटान काफी तेज़ी से हो रहा था लेकिन प्रशासन द्वारा उठाये गए कदम से कटान में कमी ज़रूर आई है।
टीएस बंधे तक अब पानी पहुँच चुका है। नदी के बढ़ते स्तर और कटान की वजह से सबसे ज्यादा नुक्सान सुल्तानपुर, गोड़वली, रिगवन और इसके आसपास के इलाकों में हुआ है और यहाँ की कृषि योग्य ज़मीन कटकर पानी के साथ बह चुकी है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि बाढ़ की आशंका को देखते हुए सारे महकमे अलर्ट पर हैं। बचाव और राहत कार्य के लिए तैयारी कर ली गयी है। प्रशासन का कहना है कि भले ही जल स्तर में बढ़ोतरी हुई है लेकिन अभी फिलहाल बाढ़ आने की आशंका बेहद कम है। बावजूद इसके एसडीएम अशोक चौधरी का कहना है कि प्रशासन की तरफ से लगातार निगरानी रखी जा रही है और राहत कार्यों पर पूरी नजर है।

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