पंचायत चुनाव के लिए जिला प्रशासन को तैयार रहने का निर्देश

अमरनाथ झा

पटना: बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर राज्य चुनाव आयोग के एक निर्देश से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। चुनाव आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को पंचायत चुनाव कराने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। कहा है कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना कभी भी जारी हो सकती है। राज्य निर्वाचन आयोग ने विभिन्न पदों के लिए नामांकन के लिए शुल्क तय कर दिया है। लेकिन चुनाव केवल नामांकन शुल्क तय हो जाने से तो नहीं कराया जा सकता।


ईवीएम से कराया जाना है पंचायत चुनाव

कई दूसरी कठिनाईयां हैं जो जिला प्रशासन के हाथ में नहीं है। इसबार पंचायत चुनाव ईवीएम से कराने का फैसला पहले ही हो गया है। लेकिन जरूरी संख्या में ईवीएम मशीनें नहीं खरीदी जा सकी है। पंचायत चुनावों में उन्हीं ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता जिनका प्रयोग विधानसभा या लोकसभा चुनावों में किया गया था। पंचायत चुनावों के लिए मल्टी पोस्ट मशीनों की जरूरत होगी क्योंकि पंचायती राज संस्थानों के छह पदों के लिए एकसाथ मतदान होते हैं। इसके लिए विशेष प्रकार की मशीनों की जरूरत होगी।

ईवीएम की खरीदगी और संचालन का प्रशिक्षण

राज्य में करीब 8 हजार ग्राम पंचायत, ग्राम कचहरी, पंचायत समिति और जिला परिषदों के सदस्य समेत सब मिलाकर दो लाख 58 हजार पदों के लिए चुनाव होने हैं। इसके लिए लगभग 90 हजार ईवीएम मशीनें और 15 हजार कंट्रोल यूनिट की जरूरत होगी। खरीद की फाइल राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग के बीच झूल रही है। ईवीएम मशीनों की खरीद होने के बाद उनके संचालन के तौर तरीकों से चुनाव कर्मचारियों के प्रशिक्षण का काम शुरू होगा। इसलिए पंचायत चुनाव में अभी देर लगनी है।
कभी भी अधिसूचना जारी हो जाने के राज्य चुनाव आयो के निर्देश का केवल एक मतलब हो सकता है कि जिला प्रशासन विकास कार्य को निपटाने में तत्पर रहे, कहीं ऐसा न हो कि चुनावों की अधिसूचना जारी हो जाए और विभिन्न योजनाएं अधूरी पड़ी रह जाए।

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