बदले हुए जायके के साथ सजी लंगर वाली थाली, न किसानों को रास आई.. न सरकार को..बना हुआ है गतिरोध

मंगरूआ

नयी दिल्ली: भोजन की बेला हो गई है। लंगर सज गया है। किसानों की थाली में लंगर वाला जायका परोसा जा रहा है लेकिन आज तस्वीर बदली—बदली सी है। किसानो ने साफ कह दिया है न तेरा खाउंगा,न अपना खाना खाने दूंगा। न तो मंत्री समूह को इसकी ईजाजत होगी और अंबानी,अडानी को तो बिल्कुल ही नहीं। इस बीच अंबानी के तरफ से भी खबर आई है कि जैसे सरकार अन्नदाता का कल्याण चाहती है,देश का कॉरपोरेट कोई अलग थोड़े न है। वो भी चाहते हैं कि किसानों का कल्याण हो और उनकी नजर किसानों की भूमी पर है।


आज आठवें दौर की बैठक की शुरूआत लगभग ढ़ाई बजे शहीद हुए किसानों के लिए दो मिनट के मौन से हुई। उसके बाद जब सरकार की तरफ कृषि कानून के फायदे बताए जाने लगे तो किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि फायदा नहीं चाहिए बस ये बताओ कि कैसे और कब कृषि कानून वापस लोगे। सरकार भी कहां मानने वाली थी। साफ कह दिया कि देखिए, ये कृषि कानून बहुत विचार विमर्श के बाद,लंबे समय के इंतजार के बाद कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने और समय सम्मत निर्णय लिया जा सके इसके लिए पास किया गया है। आंदोलन को देखते हुए हम संशोधन को तैयार है लेकिन कानून वापसी का सवाल नहीं।
यदि पूरे घटनाक्रम को विस्तार से देखें तो सुबह से ही किसान प्रतिनिधिमंडल कड़ाके की सर्दी और आफत बरसाती बारिश की आशंका के बीच विज्ञान भवन में आज सरकार के साथ होने वाली 8 वें दौर की वार्ता को लेकर उत्साहित था। नियत समय से पहले ही दिल्ली के अलग-अलग बोर्डरों से विज्ञान भवन की ओर निकला।

सिंघु बोर्डर से बस खुली लगभग 12.30 बजे बस खुली तो अन्य बोर्डरों से अलग इंतजाम के साथ किसान वार्ता के लिए आमंत्रित सभी किसान प्रतिनिधी विज्ञान भवन की ओर रवाना हुए। एक बजे के बाद किसान नेताओं का विज्ञान भवन पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। विज्ञान भवन जाने से पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत गाजियाबाद स्थित श्री अर्धनारीशवर शंकर भगवान के प्राचीन मंदिर में दर्शन के लिए गए। इसके बाद राकेश टिकैत ने कहा, आज सोमवार है और आज एक महत्वपूर्ण दिन है जिसके लिए मैंने मंदिर में दर्शन किए हैं। मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है। किसानों की जीत होगी। लेकिन हमेशा की तरह ही वामपंथी नेता हन्नान मोल्लाह का रूख कड़ा ही था। अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा, ‘मुख्य एजेंडा है कि तीन कानूनों को वापस लेना और MSP को कानूनी दर्जा देना है। इसमें कोई कानूनी समस्या नहीं है. यह राजनीतिक इच्छा का सवाल है। अगर सरकार कॉर्पोरेट के साथ है तो वापस नहीं लेगी और अगर किसान के साथ है तो जरूर वापस लेगी।’ स्वाभाविक है निशाना अंबानी-अडाणी जैसे कॉरपोरेट की तरफ था और सरकार से बातचीत के लिए तो पहंचे थे लेकिन समाधान की उम्मीद कदापी नहीं थी। हालाकि नियत समय पर पूरे लाव लश्कर के साथ मंत्री समूह भी पहुंचा। पहले की तरह ही कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर,रेल मंत्री पियूष गोयल और वाणिज्य मंत्री सोमप्रकाश साथ थे। विज्ञान भवन पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज सरकार को किसानों से सकारात्मक बातचीत की उम्मीद है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि किसान सरकार की बातों पर गौर करेंगे और अपना आंदोलन खत्म करेंगे।


दोनों पक्षों में बातचीत शुरू हुई। किसान कृषि कानून की वापसी चाहते थे,सरकार कृषि कानून के फायदे बताते हुए साफ कह रही थी संशोधन को तैयार पर कानून वापसी नहीं। दोनों पक्ष अपने-अपने रूख पर अड़े हुए थे। तब तक लंगर वाली थाली सज चुकी थी। लेकिन बातचीत के बीच ही किसान संगठनों के निशाने पर रहे अंबानी की तरफ से सफाई आती है। रिलाईंस इंडिया अपनी सफाई में कहता है की 130 करोड़ भारतीयों का पेट भरने वाले किसान अन्नदाता हैं और हम उनका सम्मान करते हैं। रिलायंस और उसके सहयोगी किसान को समृद्ध और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसानों के सेवाओं के ग्राहक होने के नाते हम एक नए भारत में साझा समृद्धि, बराबर की भागीदारी, समावेशी विकास के आधार पर किसानों के साथ एक मजबूत और समान साझेदारी में विश्वास करते हैं।


इसलिए रिलायंस और उसके सहयोगी कड़ी मेहनत, कल्पनाशीलता और समर्पण के साथ पैदा की गई उनकी उपज का किसानों को उचित और लाभदायक मुल्य मिले इसका पूरा समर्तन करते हैं। रिलायंस स्थायी आधार पर किसानों की आय में वृद्धि चाहता है, और इस लक्ष्य के लिए काम करने को प्रतिबद्ध है। हम अपने आपूर्तिकर्ताओं को सख्ती से कहेंगे की वे सरकतार द्वारा या किसी अन्य तंत्र द्वारा लागू या प्रस्तावित किसी भी न्यनतम समर्थन मूल्य या कृषि उपज के लिए तयशुदा आकर्षक मूल्य के आधार पर ही खरीद करें। भारतीय किसानों के हितों को चोट पंहुचाना तो दूर की बात है, रिलायंस के व्यवसायों ने तो वास्तव में किसानों और भारतीय जनता को बड़े पैमाने पर लाभान्वित किया है। उन्होंने साफ किया की भारत में संगठित खुदरा व्यापार ने रिलायंस रिटेल एक अग्रणी कंपनी है. ये देश की दूसरी कंपनियों निर्माताओं और आपूर्ति कर्ताओं के विभिन्न ब्रांड के खाड्य, अनाज, फल, सब्जियां और दैनिक उपयोग की वस्तुएं, परिधान, दवाएं, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद सहित सभी श्रेणियों के उत्पादों को बेचती है या किसानों से सीधी खरीद नहीं करती। किसानों से अनुचित लाभ लेने के लिए कंपनी ने कभी भी दीर्घकालिक खरीद अनुबंध नहीं किए हैं और न ही ऐसा चाहा कि इसके आपूर्तिकर्ता किसानों से उनके परिक्षमिक मूल्य से कम पर माल खरीदें और न ही ऐसा कभी होगा।


रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने आज पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपनी सब्सिडी जियो इंफोकॉम के जरिए एक याचिका पेश करते हुए उपद्रवियों द्वारा तोड़फोड़ की गैरकानूनी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। क्योंकि कंपनी का कहना है कि इसकी वजह से उनके व्यवसाय पर असर पड़ रहा है। तीन कृषि कानूनों पर बहस चल रही है, उनसे रिलायंस का कोई लेना-देना नहीं है। और न ही किसी भी तरह से उसे इसका कोई फायदा मिल रहा है। कृषि कानून से रिलायंस का नाम जोड़ने का एक मात्र उद्देश्य हमारे बिजनेस को नुकसान पहुंचाना और हमारी साख को नुकसान पहुंचाना है।
साफ है रिलाईंस की सफाई ने न तो किसान संगठन को फर्क करना है और न ही सरकार के रूख को देखते हुए आंदोलन के समाप्त होने की घो​षणा के आसार दिखाई देते हैं। लंच की थाली सजी जरूर है लेकिन जायका खराब हो गया है। हालांकि पिछली बार जो बातचीत हुई थी और उसके बाद जब नेता और किसान प्रतिनिधी लंगर वाली थाल पर साथ पहुंचे थे तो ये उम्मीद बंधी थी कि अब रास्ता निकल जायेगा। जब बैठक के बाद सामने आये तो कहा गया कि आधी दूरी तय कर ली है बस आधी अगल बैठक में तय कर ली जायेगी।

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