…पिछड़ा गांव कलाराबंक यूं बना स्मार्ट विलेज

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गांव से लौटकर संतोष कुमार सिंह

हमेशा जीतने के लिए लड़ते रहें, चाहे जीवन की कोई भी लड़ाई हो क्योंकि हार तभी होती है, जब आप उसे स्वीकार कर लेते हैं और व्यक्ति लड़ने की हिम्मत करता है और पूरे साहस के साथ चुनौतियों का सामना करता है तो पूरी कायनात आपके राह के कांटे चुन फूल बिछाने को तत्पर दिखाई देती है। साफ है अगर इंसान कुछ ठान लेता है तो उसे पूरा करने में जी.जान लगा देता है और अगर भावना सेवा की हो, तो फिर मुश्किलें अपने आप हल हो जाती हैं, प्रतिस्पर्धा और आधुनिकता के इस दौर में आज जहाँ हर इंसान सिर्फ अपने बारे में सोचता है, उस परिस्थिति में एक ऐसा व्यक्ति जिसने स्वयं अपना जीवन गरीबी और अभावों में गुज़ारा। उसने हजारों गरीब बच्चों की जिन्दगी रोशन कर दी। डॉ. अच्युत सामंत ने अपने जीवन का उत्थान तो किया ही साथ-साथ हज़ारों गरीब, अभावग्रस्त आदिवासी बच्चों के कल्याण का भी बीड़ा उठाया।

इतना ही नहीं मां नीलिमारानी की प्रेरणा से अपने गांव कलाराबंक में न सिर्फ बदलाव की कहानी लिखी बल्कि इस पिछड़े हुए गांव को स्मार्ट विलेज में तो तब्दील किया ही साथ पूरे मानपुर पंचायत के सभी 6 गांव में बदलाव की इबारत लिख दी और उसे आदर्श पंचायत बनाया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मां नीलिमारानी रानी सामंत की इच्छा थी कि बाहर तो बहुत कुछ हुआ लेकिन पैतृक गांव कलारबंक में गांव का विकास का सपना पूरा हो। तो आईये आपको गांव कलाराबंक के बदलाव के इस यात्रा पर लिए चलते हैं और टटोलते हैं कि यह सफर कहां से शुरू हुआ और किस मुकाम पर पहुंचा है।

बदलाव की प्रेरणा शक्ति हैं मां नीलिमारानी
गांव के बदलाव के इस कहानी के नायक हैं डॉ अच्युत सामंत और इस बदलाव की प्रेरणा शक्ति हैं मां नीलिमारानी सामंत। डॉ अच्युत सामंत का जन्म उड़ीसा के कटक जिले के कलारबंक गांव में हुआ। मां नीलिमारानी और पिता अनादि चरण सामंत के साथ उनका जीवन अत्यन्त गरीबी में बीता चार वर्ष की छोटी सी आयु में पिता का चल बसे तो जीवन और कठिनाइयों से घिर गया। एक तरफ पुत्र सफलता की सीढ़ी चढ़ रहा था तो दूसरी तरफ मां गांव छोड़ने को तैयार नहीं थी। बेटे की सफलता की खबर स्वभाविक रूप से मां तक पहुंचती रही होगी। ऐसे में जब बेटा मां से मिलता है तो मां ने पुत्र से गांव के बदलाव की इच्छा जाहिर की और कहा बाहर तो बहुत कुछ कुछ हुआ लेकिन पैतृक गांव कलारबंक में गांव का विकास का सपना पूरा हो। मां के इस इच्छा को पूरा करने के लिए पुत्र ने कोई कसर नहीं छोड़ी। परिणाम स्वरूप गांव को ‘मॉडल विलेज’ के रूप में विकसित करने का काम वर्ष 2000 में डॉ अच्युत सामंत की पहल पर शुरू किया गया और मात्र पांच से छह वर्षों में कलाराबैंक को शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता, संचार, पर्यावरण आदि के लिए कई आधुनिक सुविधाओं के विकास के साथ एक आदर्श गांव में बदल दिया और गांव के इतिहास में वो दिन भी आया जब ओडिशा के तत्कालीन राज्यपाल श्री रामेश्वर ठाकुर ने ‘कलाराबंक मॉडल गांव’ का उद्घाटन 5 जून, 2006 को किया था। इसके बाद गांव को एक स्मार्ट गांव के रूप में विकसित किया गया और पिछड़े गांव से स्मार्ट विलेज में बदलने का यह सफर नीलिमारानी मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट (एनएमसीटी) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसे इस उद्देश्य के लिए स्थापित किया गया था।

नीलिमारानी मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिए गांव में काम
नीलिमारानी मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट और गांव में आये बदलाव के इस सफर में गांव ने वो सब कुछ हासिल किया है जो देश और दुनिया के किसी भी अन्य गांव के लिए प्रेरणा हो सकता है। कहते हैं कि भारत की आत्मा साढे सात लाख गांव में बसती है और इन्हीं गांवो में से एक है कलाराबंक जहां भारत माता नीलिमारानी सामंत ने अपने पुत्र से दूध के कर्ज का हिसाब मांगते हुए गांव के बदलाव को पूरा करने की इच्छा जाहिर की थी। गांव में अब तक जो बदला है उसकी चर्चा करना इस पड़ाव पर समीचिन होगा और चर्चा करनी होगी बदलाव के वाहक बने डॉ अच्युत सामंत की।
डॉ सामंत कहते हैं कि शिक्षा द्वारा ही गरीबी के अभिशाप से मुक्त हुआ जा सकता है। गाँव से लेकर राज्य की राजधानी तक का सफ़र शिक्षा के कारण ही सफलता से संभव हुआ है, विकास का इससे बेहतरीन मॉडल और कोई नहीं हो सकता कि आप एक अभावग्रस्त बच्चे को शिक्षा की ताकत दे दें, फिर वह अपनी मंजिल खुद तलाश लेगा। मां ने शिक्षा दी और बेटा गांव को उसी शिक्षा की बदौलत मंजिल तक पहुंचाने का सपना पूरा कर रहा है।


कलिंग इंग्लिश मीडियम हाई स्कूल
डॉ अच्युत सामंत इस बात को बखूबी समझते हैं कि शिक्षा ही वह जरिया है जिसके जरिए व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। यही कारण है कि उन्होंने विकास और जमीनी बदलाव के मंत्र के रूप में शिक्षा को हथियार बनाया है। चाहे बात कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की हो या फिर कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साईंस की स्थापना कर देश के प्रमुख आदिवासी राज्यों के लगभग 30,000 बच्चों के जीवन में रंग भरने का ये सारे काम शिक्षा के प्रति उनके आर्कषण का ही परिणाम है। और शिक्षा रूपी मंत्र को कलारबैंक में बदलाव की पटकथा लिखते हुए आसानी से महसूस किया जा सकता है डॉ सामंत की राय है कि एक व्यक्ति अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकता है यदि उसने उचित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त की हो। अच्युत सामंत की इस सोच के कारण, मानपुर पंचायत के गांव और अन्य गांवों के बच्चों को गुणवत्ता और मूल्य आधारित शिक्षा के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में शामिल करने में मदद करने के लिए कलाराबंक हाई स्कूल की स्थापना की गई। छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच अच्छे समन्वय और सहयोग के कारण यह स्कूल हर साल मैट्रिक बोर्ड परीक्षा में लगातार शत.प्रतिशत परिणाम दर्ज करता रहा है, जबकी राज्य का औसात लगभग 70ः फीसदी है। 1998 में स्थापित इस स्कूल में छात्रों की संख्या 600 है और कक्षा 6 से 10 तक पढ़ाने की सुविधा है। स्कूल के पिछले छात्र अच्छी तरह से स्थापित हैं और कई संयुक्त राज्य अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम कर रहे हैं।


कलिंग इंग्लिश मीडियम स्कूल
ठीक इसी तरह कलिंगा इंग्लिश मीडियम स्कूल की स्थापना भी गांव में की गई जिसका उद्देश्य कलाराबंक और मानपुर पंचायत के अन्य गांवों के कई लोगों की इच्छा के जवाब में अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में शिक्षित करने के लिए की गई है। इस स्कूल के लिए पहल अंतरज्यमी सामंत, जो कि नीलिमारानी मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट ;एनएमसीटीद्ध के अध्यक्ष थे उनके द्वारा की गई थी। स्कूल के छात्रों ने समय-समय पर विभिन्न जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं को जीतकर स्कूल और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और यहां उपलब्ध कराए गए अच्छे माहौल के कारण संभव हुआ है। 2007 में स्थापित स्कूल, सीबीएसई, नई दिल्ली से संबद्ध है और इसमें छात्र संख्या 1000 है।

सार्वजनिक पुस्तकालय और वाचनालय
नीलिमारानी मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा कलाराबंक गांव में पुस्तकालय और वाचनालय की भी स्थापना की गई है। यह विद्वानों और गांव की आम जनता के लिए समान रूप से एक अनिवार्य शिक्षण संसाधन केंद्र है। पुस्तकालय में पाठ्य पुस्तकों, संदर्भ पुस्तकों, पत्रिकाओं और पत्रिकाओं आदि का प्रभावशाली संग्रह है।
सीसीटीवी
पूरे सीसीटीवी निगरानी प्रणाली के तहत पूरा गांव कवर किया गया है। कई सीसीटीवी कैमरे चौबीसों घंटे सभी गतिविधियों को स्कैन करके गांव में सुरक्षा वातावरण को बढ़ाते हैं। सीसीटीवी निगरानी प्रणाली केआईआईटी केंद्र से जुड़ी है।

सौर गांव
कलाराबंक को एक सौर गांव बनाने के प्रयास भी हुआ है गांव में स्थायी सौर ऊर्जा समाधान की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए गये हैं।। ट्रस्ट ;एनएमसीटी ट्रस्ट द्वारा स्थापित एक सौर ऊर्जा संयंत्र गांव के अधिकांश सार्वजनिक संस्थानों को बिजली की आपूर्ति करता है।
स्वयं सहायता समूह (एसएचजी)
गांव में एक महिला स्वयं सहायता समूह यानी एसएचजी भी शुरू किया है। इससे जुड़े सदस्य छोटे नियमित बचत योगदान करते हैं। एसएचजी ऐसे उद्यमों को स्थापित करने के इच्छुक सदस्यों को धन उधार देकर गांव और घरेलू उद्यम को बढ़ावा दे रहा है। एसएचजी की बैठक नियमित रूप से आयोजित की जाती है और सभी वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड सावधानीपूर्वक रखा जाता है।

नल पेयजल परियोजना
दूषित पानी कई बीमारियों का कारण है। इसलिए एनएमसीटी ने सरकार के समर्थन से नल पेयजल परियोजना शुरू की। अब कालाराबंक गांव के हर घर में नल से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जाती है। इस परियोजना ने जल जनित रोगों की घटनाओं को कम किया हैए जो पहले व्यापक थे।

पक्की सड़क
शिक्षा और स्वास्थ्य के बाद संचार को उच्च प्राथमिकता मिलती है। संचार लिंक खराब होने पर सभी सुविधाएं व्यर्थ हैं। इसके लिए कलाराबैंक को पक्की आल वेदर रोड द्वारा मुख्य सड़क से जोड़ा गया है। मुख्य सड़क का निर्माण सरकार के सहयोग से किया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ;पीएमजीएसवाई, के तहत व इसके अलावा नीलिमारानी मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट (एनएमसीटी) द्वारा गांव के अंदर सभी गलियों और उप.गलियों को पक्का कर दिया गया है। इस सड़क से लोग आसानी से स्कूल व स्वास्थ्य केंद्र तक आ सकते हैं।
केनरा बैंक, लॉकर और एटीएम
सार्वजनिक जीवन में बैंकों की भूमिका अनिवार्य है। उनके वित्तीय समावेशन और उन्हें कृषि ऋण और गृह ऋण जैसे विभिन्न अग्रिमों का विस्तार करने के लिए कलाराबंक गांव में केनरा बैंक की एक शाखा खोली गई है। परिणामस्वरूप लोग अपने अधिशेष धन को बचाने के साथ.साथ विभिन्न ऋणों का लाभ उठाने में सक्षम होते हैं।
पिनकोड के साथ डाकघर
संचार बनाए रखने के लिए डाकघर गांवों में एक उच्च महत्व रखता है क्योंकि लोगों के पास इंटरनेट जैसे आधुनिक साधनों तक पहुंच नहीं है। इसे देखते हुए ग्राम कलाराबैंक में एक डाकघर कार्य कर रहा है। गांव में डाकघर सरकार द्वारा नीलिमारानी सामंत के पिता स्वर्गीय पूर्णानंद सामंत की पहल के बाद गांव में स्थापित किया गया था। इस डाकघर के माध्यम से गांव के लोग दूर.दराज के शहरों में काम करने वाले अपने परिवार के सदस्यों के साथ संपर्क बनाए रखने में सक्षम हैं। इसके अलावा, गांव के युवाओं को यहां उच्च शिक्षा और रोजगार से संबंधित विभिन्न सेवाएं मिलती हैं।
पुलिस चौकी
कानून और व्यवस्था सरकार द्वारा स्थापित एक पुलिस चौकी द्वारा बनाए रखा जाता है। अच्युत सामंत द्वारा लगातार प्रयास किये जाने के बाद वर्ष 2008 में गांव में सरकार ने पुलिस चौकी को मंजूरी दी।
टेलीमेडिसिन सुविधा के साथ किम्स ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र
गांव और आसपास के गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए कलाराबंक में टेलीमेडिसिन सुविधा के साथ किम्स ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की गई है। केंद्र की स्थापना भुवनेश्वर के कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज द्वारा की गई है जो अच्युत सामंत द्वारा स्थापित एक इकाई है। इस केंद्र का नामाकरण अच्युत सामंत के दिवंगत पिता के नाम पर अनादि सामंत मेमोरियल अस्पताल के नाम पर गया है। केआईएमएस के साथ टेलीमेडिसिन लिंक हैं, जो क्षेत्र के लोगों को सुपर.स्पेशियलिटी अस्पताल के प्रख्यात डॉक्टरों से उनके दरवाजे पर विशेषज्ञ परामर्श प्राप्त करने की अनुमति देता है। यह नियमित रूप से गांव में स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित करता है। 100 बिस्तरों वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा स्वास्थ्य सुविधा और जागरूकता से स्थानीय लोगों को अत्यधिक लाभ हुआ है। कालाराबैंक ओडिशा का पहला और देश का दूसरा गांव है जहां पूरी आबादी स्वास्थ्य बीमा कवरेज के दायरे में शामिल है।
कलाराबंक… वाई.फाई गांव
वाई.फाई हॉटस्पॉट ग्रामीणों को उनकी नित की जरूरतों को पूरा करने, बिलों का भुगतान करने और शिकायत दर्ज करने के लिए एक भाषा.-स्वतंत्र मोबाइल ऐप के माध्यम से स्थानीय इंट्रानेट तक पहुंचने देता है। डिजिटल एपीपी के माध्यम से सभी नागरिक सेवाएं वाई.फाई सुविधा के माध्यम से जुड़े स्मार्ट फोन के माध्यम से सुलभ हैं। लैपटॉप, टैब और अन्य उपकरणों के माध्यम से इंटरनेट का उपयोग किया जा सकता है। समाचार- मौसम संबंधी रिपोर्ट और आपदा संबंधी जानकारी भी ग्रामीणों को सुलभता से और तुरंत उपलब्ध है।
ग्रामीण नागरिक सेवा केंद्र
यह केंद्र कलाराबंक और उसके आसपास के गांवों के समूह के डिजिटल और वित्तीय रूप से समावेशी विकास के लिए योगदान देने वाले इस गांव को इलेक्ट्रॉनिक रूप से विभिन्न नागरिक केंद्रित सेवाओं के वितरण को सक्षम बनाने के लिहाज से काफी उपयोगी है। इस पहल के तहत निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान की गई है।

  • मुट्ठी में दुनिया: गांव का कोई भी ग्रामीण नागरिक दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाले अपने प्रियजनों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बातचीत कर सकता है।
  • ऽ सभी सरकारी सूचना प्रणाली तक पहुंच जिसमें राजस्व, कानूनी, स्वास्थ्य, पंचायती राज और अन्य संबंधित सरकार शामिल हैं। इस राज्य और देश के आम नागरिकों के लिए उपलब्ध सेवाएं।
  • ऽ सभी प्रकार की सरकार के साथ भागीदारी। राज्य और देश की ई.गवर्नेंस पहल के माध्यम से योजनाओं पर नजर
    ऽ डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बैंकिंग और अन्य वित्तीय योजनाओं तक पहुंच

श्री रघुनाथ यहूदी और संकटमोचन हनुमान मंदिर
अध्यात्म जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है। गांव की परंपरा, रीति.रिवाज ही ग्राम जीवन को संपूर्ण बनाते हैं। श्री श्री रघुनाथ यहूदी और संकटमोचन हनुमान मंदिरों को विभिन्न त्योहारों और समारोहों के सुचारू रूप से पालन के लिए दूरदर्शी अच्युत सामंत द्वारा संरक्षित किया गया है।
नीलिमारानी मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट ने कलाराबंक गांव के राज देवता बाटा टोला के मंदिर का जीर्णोद्धार किया। मां काली, मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और भगवान कार्तिकेश्वर के मंदिरों का भी अभिषेक किया गया है। ये वे देवता हैं जिनकी गाँव के लोग गाँव की स्थापना के बाद से पूजा करते आ रहे हैं। वर्ष के अलग-अलग समय के दौरान विभिन्न त्योहारों की शुरुआत गणेश पूजा से होती है और दुर्गा पूजा, रावण पोडी, काली पूजा और अन्य लोगों को आध्यात्मिकता के मार्ग पर रखने के लिए पवित्रता के साथ मनाया जाता है। गांव के सभी मंदिरों का प्रबंधन और रखरखाव आईआईटी मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जिसने पुजारी और सेवक नियुक्त किए हैं।

सार्वजनिक पार्क और बच्चों का पार्क
नीलिमारानी मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा गांव में विकसित एक सार्वजनिक पार्क क्षेत्र के लोगों को मनोरंजन के अवसर प्रदान करता है। इतना ही नहीं एक चिल्ड्रन पार्क भी विकसित किया गया है।
कम्युनिटी हॉल (ग्राम्य समिति)
गांव के सभी परिवार ग्राम्य समिति के सदस्य हैंए जिसका गठन एनएमसीटी की पहल पर किया गया है। ग्राम स्तर के विकास संबंधी मामलों पर निर्णय लेने के लिए ग्राम्य समिति की नियमित बैठक होती है। यह व्यक्तियों और परिवारों के बीच विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समिति निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करती है और गांव में एकता में योगदान करती है। ग्राम्य समिति इस उद्देश्य के लिए एनएमसीटी द्वारा निर्मित सामुदायिक हॉल के बाहर कार्य करती है।

युवा क्लब (जुबक संघ)
कलाराबैंक यूथ क्लब एक ऐसा मंच है जहां कलाराबंक गांव के युवा मिलते हैं और सामाजिक रूप से रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेते हैं। नीलिमारानी मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट ने ग्राम विकास कार्यों में युवा ऊर्जा को चैनलाइज करने के लिए क्लब की शुरुआत की। यूथ क्लब, जो अपने स्वयं के क्लब भवन से कार्य करता है, विभिन्न खेल आयोजनों और धार्मिक गतिविधियों का भी आयोजन करता है।

कलाराबंक में महिला समिति
गांव के विकास में महिलाओं के दृष्टिकोण को समान महत्व देने के लिए नीलिमारानी मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा एक महिला समिति का गठन किया गया है। सभी घरों की महिला प्रतिनिधि इसकी सदस्य हैं। कलाराबंक महिला समिति नियमित रूप से बैठक करती है और महिलाओं से संबंधित मामलों और ग्राम विकास के सामान्य मामलों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लेती है।
कारोना से अनाथ हुए बच्चों के लिए आश्रय स्थल
कोरोना की महामारी ने बहुत परिवारों के बच्चों को अनाथ कर दिया। लेकिन इन बच्चों का जीवन पटरी पर लौटे और उन्हें सारी सुख-सुविधाये हांसिल हो।

मानपुर मॉडल पंचायत
कलाराबैंक को स्मार्ट गांव बनाने के बाद ओडिशा के कटक जिले में मानपुर की पूरी ग्राम पंचायत, जिसमें 6 गांव शामिल हैं, ये गांव हैं . कलाराबंक, बोदर, ऐनीपुर, सिउली? सारापुर और मानपुर . को आम सुविधाओं और सुविधाओं का विस्तार करके एक आदर्श पंचायत बनाया गया है। जैसे स्वास्थ्य, स्वच्छता, सड़क, स्ट्रीट लाइट, शिक्षा संचार आदि की पर्याप्त सुविधा मुहैया कराई गई। इन सुविधाओं की बदौलत यह देश की पहली पंचायत है जिसे आदर्श पंचायत के रूप में विकसित किया गया है।

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इतना ही नहीं न सिर्फ कलाराबंक गांव में बल्कि परे मानपुर पंचायत में बेरोजगारी दर शून्य हैं। इन गांवो के युवाओं और विभिन्न परिवारों से अलग-अलग सदस्यों को बढ़ी संख्या में कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साईंस में नौकरी प्रदान की गई है। कहानी के इस पड़ाव पर यह बताना भी समीचिन होगा कि मां नीलिमारानी ट्रस्ट के कामों डॉ अच्युत सामंत की बहन डॉ इति सामंत की गहरी रूची है या यूं भी कह सकते हैं कि इस गांव के बदलाव को जमीन पर रहकर साकार करने में उनका अहम योगदान रहा है।

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