चंडीगढ़: हरियाणा में पंचायत सरकार का कार्यकाल बहुत पहले खत्म हो चुका है बावजूद इसके पंचायत चुनाव को लेकर कोई राह निकलते नजर नहीं आ रहा था। कभी अदालत तो कभी कोरोना राह मे रोड़ा अटकाते नजर आ रहे थे लेकिन अब हरियाणा में पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। मतदाता पुनर्रीक्षण का काम तेजी से चल रहा है और ऐसी उम्मीद की जा रही है 22 जुलाई को मतदाता सूचियों के अंतिम प्रकाशन के बाद आपत्तियां का निपटारा होने के बाद चुनाव तिथियों की घोषणा कर दी जाएगी और पूरी प्रक्रिया सितंबर तक पूरी कर ली जाएगी यानी प्रदेश में तीसरी सरकार के गठन का काम सितंबर तक पूरा हो जाएगा।

क्या कहते हैं राज्य चुनाव आयुक्त
हरियाणा में पंचायत चुनाव के मद्देनजर राज्य चुनाव आयुक्त धनपत सिंह ने कहा है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव पहले ही लगभग 1.5 साल से कोरोना और अन्य कारणों की वजह से विलंबित हो चुका है। प्रदेश में मतदाता सूचियों के पुर्नरीक्षण के बाद जो सूची तैयार करने का काम 22 जुलाई तक पूरा हो जाएगा। हरियाणा विधानसभा का सत्र अगस्त में आहूत किया जाना है। उसके बाद ही पंचायत चुनाव करवाये जाएगे यानी सितंबर में पंचायत चुनाव करवाये जाएगे।
पंचायत चुनाव के संबंध में प्रक्रियाओं को लेकर चुनाव आयुक्त धनपत सिंह ने कहा कि पंचायत चुनाव दो चरणों में कराये जा सकते हैं। पहले दिन जिला परिषद और पंचायत समिति का चुनाव करवाएंगे। उसके बाद एक दिन छोड़कर सरपंच और पंच के चुनाव करवाये जाएगे। उन्होंने यह जानकारी भी दी कि राज्य सरकार द्वारा द्वितिय पंचायत संशोधन अधिनियम 2020 में लाया गया था। इस संशोधन के मुताबिक पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी की हिस्सेदारी दिए जाने का प्रावधान है। इस संशोधन के अनुसार 50 फीसदी सीटों पर महिलाएं और 50 फीसदी सीटों पर पुरुष चुनाव लड़ेंगे। साथ ही जिन जिला परिषदों और पंचायत समिति के वार्ड आॅड नंबर के होंगे उनपर महिलाएं चुनाव लड़ेंगी वहीं इवन नंबर वाले सीटों पर पुरुष चुनाव लड़ेगें। जो सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, उन पर भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
डीसी को पत्र लिखकर दिया निर्देश
राज्य में पंचायत चुनाव के मद्देनजर राज्य चुनाव आयोग द्वारा पहले ही सभी डीसी को पत्र लिखा जा चुका है। डीसी को लिखे पत्र में चुनाव आयुक्त द्वारा कहा गया है कि पंच का चुनाव मतपत्र से होगा, जबकि जिला परिषद सदस्यों, बीडीसी और सरपंच के चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे। इतना ही नहीं चुनाव आयुक्त धनपत सिंह ने सभी डीसी को पत्र लिखकर सरकारी मशीनरी को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि गांवों में एक हजार मतदाताओं पर एक मतदान केंद्र बनाना होगा। अपने-अपने जिले में सभी डीसी ड्यूटी के लिए जरूरी कर्मचारियों की संख्या का हिसाब लगा लें। मतदान और मतगणना का प्रशिक्षण कर्मचारियों को समय रहते दिया जाए। आरक्षित वार्ड की सूची सहायक निर्वाचन अधिकारियों को मुहैया कराएं ताकि नामांकन लेने में कोई चूक न हो। हर बूथ पर ईवीएम और चुनाव सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था करें।

पैतृक गांव से दूर लगाई जाए ड्यूटी
पंचायत चुनाव के मद्देनजर संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथ चिन्हित कर रोशनी व शौचालय इत्यादि की पर्याप्त व्यवस्था किये जाने और इनकी वीडियोग्राफी कराने की व्यवस्था करने का निर्देश भी चुनाव आयोग द्वारा दिया गया है। साथ ही पुलिस विभाग को उचित संख्या में कर्मी मुहैया कराने की मांग भेज दी जाए ताकि हिंसा, लूट या बूथ न कब्जाए जा सकें। प्रशिक्षण के लिए मास्टर ट्रेनर की व्यवस्था कर लें। चुनाव अधिकारियों, कर्मचारियों की ड्यूटी उनके पैतृक गांव में न लगाई जाए।
धनपत सिंह ने अपने पत्र के जरिए डीसी को यह भी आदेश दिए है कि वे सीएमओ को चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश प्रमाण – पत्र बनाने की सिफारिश की वास्तविकता से जांच करें। क्योंकि कई कर्मचारी फर्जी प्रमाण – पत्र बनवाकर ड्यूटी से बचने के लिए ऐसा करते है। ऐसे में कहा गया है कि जो स्टाफ ड्यूटी से बचने के लिए इस तरह की हरकत करेगा उसके खिलाफ हरियाणा पंचायती राज अधिनियम कड़ी कार्यवाही करेगा. इसके साथ ही चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी उनके पैतृक गांव में न लगाई जाए।
कुल मिलाकर यह लगता है कि अब प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सारी असमंजस और अड़चन दूर कर लिए गए हैं और जल्द ही प्रदेश में चुनी हुई पंचायत सरकार देखने को मिलेगी जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं की सुलभता बढ़ेगी और गांव का विकास हो सकेगा।