
- यूनिसेफ,केंद्र व राज्य सरकारों के साथ तीसरी सरकार भी संपूर्ण टीकाकरण अभियान में जुटी
नयी दिल्ली: मिशन कोरोना अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है,हालांकि झारखंड के बोकारो जिले के बुड्डू पंचायत में टीकाकरण का दोनो डोज पूरा हो गया है और बूस्टर लगाने का काम चल रहा है लेकिन पंचायत के मुखिया अजय कुमार सिंह ये समझ रहे हैं बच्चों के टीकाकरण का काम कोरोना काल में धीमा पड़ गया था और उस काम में गति लाना जरूरी है। यही कारण है कि वे पिछले कई दिनों से मिशन इंद्रधनुष के तहत चलाए जाने वाले नियमित टीकाकरण की तैयारी में लगे हुए है।
केवल झारखंड के बुड्डू पंचायत के मुखिया अजय कुमार सिंह ही नहीं बिहार के दामोदर पुर बलछा पंचायत की मुखिया ललिता देवी भी पिछले कई दिनों से सभी वार्ड में घूमकर अपने वार्ड सदस्यों के साथ मिलकर टीकाकरण सप्ताह की तैयारी कर रही हैं। कहती हैं कि वैसे तो उन्हें मुखिया बने मात्र कुछ महीने ही हुए लेकिन इस दौरान उन्होंने कोरोना महामारी के टीकाकरण अभियान को न सिर्फ करीब से देखा है बल्कि उसे सफल बनाने में अपने हिस्से का योगदान दिया है। ललिता देवी कहती हैं कि उनके पंचायत में 15 वार्ड हैं और 15 आंगनवाड़ी है। इन सभी आंगनव़ाड़ी केंद्रो पर नियमित टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इतना ही नहीं चौरासी गांव में प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र भी है। साथ ही साथ पंचायत के खापुरा गांव में भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं इन सभी में टीकाकरण केंद्र बनाये जाएंगे। बच्चों का टीकाकरण होगा। इसके लिए एनएनएम,आशा और आंगनवाड़ी की बहनों ने माताओं को सूचित किया है और कल से पूरे सप्ताह अभियान के रूप में चलाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के चंदवारा पंचायत की पूर्व मुखिया प्रकाशिनी जायसवाल भले ही वर्तमान में पंचायत प्रधान न हों लेकिन गांव—पंचायत के प्रति अपनी जवाबदेही को बखूबी समझती हैं और साथ ही टीककरण विशेष रूप से नियमित टीकाकरण के महत्व को। पंचायत खबर से बातचीत में पूर्व प्रधान ने कहा कि कोरोना टीकाकरण अभियान ने लोगों को टीकाकरण के महत्व से अवगत कराने में जुटी हुई हैं। अपने संबंधों संपर्को का बखूबी इस्तेमाल कर रही हैं ताकी नियमित टीकाकरण अभियान सफल हो। इसी तरह छत्तीस गढ़ के ग्रीन ग्राम सपोस की सरपंपच बबीता बघेल ने भी कोरोना टीकाकरण अभियान की तरह ही नियमित टीकाकरण सप्ताह को सफलता मिले लोग बच्चों के टीकाकरण को लेकर जागरूक हों और अपने नवजातों को लेकर टीकाकरण बूथ पर आएं इसके लिए पंचायत के सभी प्रतिनिधियों के साथ प्रयास में लगी हुई हैं। कहती हैं, हमारे पंचायत में कोई भी कार्यक्रम हो चाहे बच्चों का हो या बालिकाओं का या फिर बुजुर्गों का सब मिलजुल कर बेहतर तरीके से चलाया जाता है। यह अभियान भी सफल होगा इसको लेकर कोई संशय नहीं है।
उल्लेखनीय है कि एक तरफ भारत में जहां कोरोना टीकाकरण अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है वहीं दूसरी तरफ नियमित टीकाकरण अभियान को कैसे गति मिले इस दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं। इसी के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के तत्वाधान में अप्रैल के अंतिम सप्ताह (24 से 30 अप्रैल) में विश्व टीकाकरण सप्ताह मनाने की तैयारी पूरे देश में चल रही है। इस दौरान दौरान लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए टीकों की भूमिका और महत्व के बारे में बताया जाएगा। साथ ही आम जन के मन में टीका को लेकर जो झिझक है, उसे दूर करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस साल विश्व टीकाकरण सप्ताह की थीम है लॉन्ग लाइफ फॉर ऑल। इस थीम का उद्देश्य लोगों को ये बताना है कि वैक्सीन के जरिये कैसे लोगों का जीवन लंबा हो सकता है और वह सेहत से भरपूर जीवन जी सकते हैं। वैसे भी कोरोना टीकाकरण अभियान के दौरान लोगों को टीकाकरण का महत्व अच्छी तरह समझ आ गया है कि जीवन है जरूरी तो टीकाकरण मजबूरी। इस अभियान का फायदा निश्चित रूप से टीकाकरण सप्ताह में मिलेगा।
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विश्व टीकाकरण सप्ताह के आयोजन में विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ यूनिसेफ, गावी, वैक्सीन अलायंस , बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (Bill & Melinda Gates की भी भागीदारी होती है जो सरकार के साथ मिलकर इस अभियान को सफल बनाने का हरसंभव प्रयास करते हैं।
क्या कहते यूनिसेफ के आंकड़े
यूनिसेफ द्वारा जारी आंकड़ों पर गौर करें तो टीकाकरण के जरिये हर साल करोड़ों लोगों की जान बचती है। हालाकि इतने व्यापक अभियान के बावजूद दुनियाभर में करीब 20 मिलियन बच्चों को वैक्सीन नहीं लगते और इसके अभाव में उनकी जान चली जाती है। भारत के संबंध में जारी किए गये आंकड़ो और यूनिसेफ के योगदान पर गौर करें तो यूनिसेफ भारत सरकार के साथ हर स्तर पर रणनीतिक साझेदारी टीकाकरण अभियान को निरंतर चलाने में सहयोग करता रहा है। इसका उद्देश्य टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के लिए छूटे हुए बच्चों और समुदायों की पहचान करना और उनकी पहुंच सुनिश्चित करना है। साथ ही साथ समुदायों के बीच अपने बच्चों का टीकाकरण करने और नियमित टीकाकरण के लिए कोल्ड चेन को मजबूत करने के लिए जागरूकता और विश्वास पैदा करने में भी यूनिसेफ का योगदान अहम है।
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गौरतलब है कि हर गर्भवती महिला और बच्चे का टीकाकरण करने के उद्देश्य से, सरकार ने फरवरी 2022 में सघन मिशन इंद्रधनुष 4.0 शुरू किया, जो विश्व स्तर पर सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है। भारत हर साल सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के माध्यम से टीकाकरण के लिए 3 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं और 2.7 करोड़ बच्चों को लक्षित करता है।
नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 के आंकड़ों के अनुसार, 22/36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में एफआईसी राष्ट्रीय औसत 76.4% से अधिक है।डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ के टीकाकरण कवरेज के राष्ट्रीय अनुमान के अनुसार, भारत में 3.02 मिलियन से अधिक बच्चे नियमित टीकाकरण सेवाओं के माध्यम से बुनियादी टीकों से वंचित रह गए। इनमें से अधिकांश बच्चे हाशिए पर रह रहे समाज या दूर दराज के ईलाकों में रह रहे वो बच्चे हैं जहां उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य और प्रमुख सामाजिक सेवाओं तक सीमित पहुंच सहित कई अभावों का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही सूचनाओं का अभाव या टीकाकरण के दौरान माता पिता के घर पर उपस्थित न होने जैसे कारण भी रहे।
लेकिन उम्मीद की जा सकती है जिस तरह से जमीनी स्तर पर चुनी हुई सरकार के पंचायत प्रतिनिधी कोरोना के दौरान चलाए गये टीकाकरण अभियान में बढ़ चढ़कर भागीदारी करते दिखे और उसका नतीजा ये हुआ कि भारत जैसे देश में इतनी बड़ी आबादी को इतने कम समय में टीका लगाया जा सका। साफ है इस दौरान प्राप्त अनुभवों का लाभ निश्चित रूप से टीकाकरण अभियान में देखने को मिलेगा और हमारे नौनिहालों संपूर्ण टीकाकरण अभियान का लाभ मिल सकेगा।





