
बक्सर: बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर घमासान शुरू हो गया है। बक्सर के पंचायत भदवर के मुखिया पद को लेकर भी सियासी शोर सुनने को मिल रहा है। परंपरागत प्रत्याशियों से अलग-अलग नये-नये युवा भी ग्राम पंचायत के चुनाव में रूची लेने लगे हैं। सबकी अपनी-अपनी दावेदारी है। हर किसी के पास गांव के विकास को लेकर अपना रोडमैप है। नये प्रत्याशी वर्तमान मुखिया द्वारा किये गये काम या उनके काम में भ्रष्टाचार का सवाल उठाकर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। तो कोई वर्तमान मुखिया द्वारा काम न कराये जाने को लेकर अपनी दावेदारी कर रहा है और मतदाताओं को ये भरोसा दिलाने का प्रयास कर रहा है यदि उसे जीताया जायेगा तो वो जरूर उनके साथ खड़ा होगा। किसी के पास पारिवारिक विरासत है, तो किसी के पास शिक्षित होने का दावा तो किसी के पास गांव के सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर भागीदारी करने का प्रमाण। हालांकि इन सभी दावेदारियों का एक मात्र मकसद है कि उन्हें जमीनी लोकतंत्र यानी पंचायत चुनाव में जीत मिले और वे ग्राम समाज की नुमाईंदगी कर सकें।
आईये आपकी मुलाकात एक ऐसे ही युवा से करवाते हैं जो सिर्फ चुनावी मौसम में नहीं दिखते बल्कि गांव समाज के सामाजिक,सांस्कृतिक,राजनीतिक कार्यक्रमों में न सिर्फ योगदान देते हैं बल्कि गांव के हर उस कार्य में तत्परता से अपने हिस्से की जवाबदेही निभाते हैं जो एक जनप्रतिनिधी की जवाबदेही बनती है। ये युवा है बिहार के बक्सर जिले के भदवर पंचायत अमरेंद्र कुमार सिंह उर्फ माझील सिंह। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से स्नातक तक शिक्षा हासिल कर चुके अमरेंद्र वैसे तो छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं लेकिन स्नातक करने के बाद जब गांव आये तो गांव के ही हो कर रह गये।
स्वभाव से मिलनसार अमरेंद्र उर्फ माझील की दिनचर्या की शुरूआत ही समाज से जुड़ कर होती है। घर के लोगों ने भी समझ लिया है कि यह समाज के लिए है और समाज के काम में ही जुटा रहेगा। यही कारण है कि घरेलू काम में उलझाने की बजाय उन्हें ग्राम समाज के कार्यों में डंटे-जुटे रहने की प्रेरणा दी जाती है न की बाधा पैदा किया जाता है। 5 बजे सुबह उठना और गांव और आसपास के गांव के लोगों से भेट मुलाकात करना। उनकी समस्या सुनना-समझना और उसके निवारण के लिए प्रयास करना ही उनकी आदत बन गई है। यह भी कह सकते हैं कि दिन का पहला पहर भले ही गांव और पंचायत में बीते लेकिन दूसरा पहर प्रखंड कार्यालय में ही बीतता है, क्योंकि समस्या है तो समाधान तो चाहिए ही और समाधान चाहिए तो प्रयास तो करना ही होगा।
भदवर पंचायत में अमरेंद्र और उनके युवा साथियों के सहयोग और पूरे गांव की प्रेरणा से 2007 से लगातार चैत नवमी देवी जागरण का आयोजन होता रहा है। न सिर्फ गांव और पंचायत के लोग बल्कि आसपास के गांव के लोग इस सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम का आनंद उठाते हैं। भोजपुरी भाषा से जुड़े तमाम नामचीन कलाकार, और प्रबुद्ध लोग इसमें शिरकत करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपने गांव-पंचायत सहित आसपास के गांव में पहचाने जाने वाले अमरेंद्र व उनके साथियों के प्रयास से गांव में कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम व खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही अन्य गांवो में भी अमरेंद्र और उनके युवा साथियों की प्रेरणा से ग्रामीण युवा खेल गतिविधियों में शिरकत करते हैं और गांव का नाम रोशन करते हैं।
परिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो पूर्व सैनिक व सैन्य पुरस्कार से सम्मानित दिलीप कुमार सिह के तीन पुत्रों में से मंझले जिसे भोजपुरी समाज में माझील कहते हैं किसान परिवार से हैं। अमरेंद्र पिछले बार भी मुखिया का चुनाव लड़े थे। भले ही उन्हें सफलता न मिली हो लेकिन उस समय से लगातार वो गांव समाज के काम में, वहां की समस्याओं को समाधान तक पहुंचाने के लिए भरसक प्रयत्न करते रहे हैं।
आम ग्रामीणों से बात करने पर भी हर उम्र के लोग, हर वर्ग के लोग अमरेंद्र कुमार सिंह की सराहना करते हुए कहते हैं इस लड़के ने हर वक्त समाज का साथ दिया है। आप कभी भी फोन करें तुरंत उस फोन का जवाब दिया जाता है। आपकी बात सुनी जाती है। सदेह उपस्थित होकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई जाती है। ग्रामीण बुजुर्ग कहते हैं कि कोई जीते,कोई हारे मुखिया तो माझील सिंह ही हैं।
भले ही वो पिछले चुनाव में हार गये हो लेकिन इस चुनाव में उनके जीतने की संभावना प्रबल है क्योंकि वे विगत 5 वर्षों में जनता से जुड़ी हर योजना को गांव तक पहुंचाने, उसके कार्यान्यवन में अपनी भूमिका निभाते रहे है। चाहे बजुर्ग पेंशन के लिए प्रमाण पत्र बनाना हो,प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधी के प्रति लोगों को सजग करना हो या कोरोना काल में राशन से जुड़ी समस्या हो वे सदैव तत्पर रहे हैं। इतना ही नहीं गांव से जुड़े सभी सामाजिक मुद्दे को सोशल मीडिया माध्यमों मसलन फेसबुक,ट्वीटर व स्थानीय मीडिया का उपयोग कर शाषण-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करते रहे हैं। बातचीत में अमरेंद्र कहते हैं कि चुनाव तो जनता को जितवाना है और उनके मत से ही तय होना है लेकिन गांव के प्रति काम करना एक ग्रामीण के नाते हमारा दायित्व है। वो काम वे हमेंशा करते रहेंगे।









