पर्यटन के क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं की भूमिका काफी अहम साबित हो सकती है

नई दिल्ली: पर्यटन मंत्रालय ने देखो अपना देश अभियान के तहत “सेवा एवं एयरबीएनबी भारत, ग्रामीण भारत की आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देना” विषय पर 6 मार्च, 2021 को 79वां वेबिनार आयोजित किया। 8 मार्च अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जा रहा है और महिलाओं की पर्यटन के क्षेत्र में जबर्दस्‍त भूमिका और संभावित अवसरों का लाभ उठाने के लिहाज से इस विषय का जिक्र इस दिन करना काफी उपयुक्‍त है।

वर्तमान में भारत में सभी रोजगारों में प्रत्‍यक्ष एवं अप्रत्‍यक्ष रूप से पर्यटन क्षेत्र का योगदान 12.95 प्रतिशत है और इसमें स्‍थानीय समुदायों खासकर महिला उद्यमियों के लिए आर्थिक विकास के अनेक अवसर हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से स्‍वावलंबी बनाने के लिए सशक्‍तीकरण करने से न केवल उनकी आय सृजन में मदद मिलती है, बल्कि वे सामाजिक बदलाव के अहम कारक भी बनती हैं। इस वेबिनार में स्‍व-रोजगार में लगी महिलाओं की आजीविका में तकनीकी, तकनीकी प्रशिक्षण एवं सूक्ष्‍म वित्‍त के जरिये उनके सशक्‍तीकरण को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया।

स्‍वयं सहायता महिला संघ (सेवा) की स्‍थापना 1972 में कपड़ा क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के सशक्‍तीकरण के लिए की गई थी। सेवा भारत में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिला श्रमिकों की एकमात्र राष्‍ट्रीय यूनियन है, जिसमें 18 राज्‍यों से 15 लाख से अधिक महिला सदस्‍य हैं। इस समय युवा पीढ़ी का सेवा में 35 प्रतिशत सदस्‍यता योगदान है और कुछ वर्ष पहले ही यह संगठन पर्यटन के क्षेत्र में आया था और गुजरात में अपनी सफलता की कहानी बया कर रहा है। एयरबीएनबी ने सेवा के साथ साझेदारी की है। अभी तक 15 से अधिक देशों से 4500 के ज्‍यादा पर्यटकों ने 40 सेवा होमस्‍टे की सेवाओं का आनंद लिया। यह साझेदारी पर्यटकों को संस्‍कृति तथा विरासत का एक विशिष्‍ट तथा प्रामाणिक अनुभव प्रदान करती है। इसके साथ ही हाशिए पर रह रहे वर्गों से आने वाली महिला उद्यमियों को भी आय सृजन के अवसर प्रदान करती है।

इस वेबिनार में सुश्री विनीता दीक्षित, प्रमुख जन नीति भारत और श्री तेजस भाई रावल, तकनीकी प्रमुख सेवा, ने दोनों संगठनों के बीच साझेदारी, उनकी प्रगति की विकास यात्रा तथा अन्‍य पहलुओं पर प्रकाश डाला। सेवा की सबसे अधिक उम्रदराज सदस्‍य दो महिलाएं गौरीबेन और मीताबेन हैं, जो सफल उद्यमी भी साबित हुई हैं। इन्‍होंने इस दौरान बताया कि वे अपने होमस्‍टे में पर्यटकों को ठहराकर न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं, बल्कि तकनीकी और ज्ञान के स्‍तर में भी उन्‍हें लाभ हुआ है। यह वाकई गर्व का क्षण था, जब गौरीबेन में बताया कि होमस्‍टे के माध्‍यम से किस प्रकार न केवल उन्‍होंने अपनी आमदनी बढ़ाई, बल्कि उनके पति और घर के अन्‍य सदस्‍य भी इसमें शामिल हुए और उन्‍होंने अन्‍य लोगों को भी रोजगार दिया। जब उन्‍होंने सभी लोगों को अपने होमस्‍टे में आने का निमंत्रण दिया तो वह पल दिल को छू लेने वाला था।

पर्यटन मंत्रालय की अपर महानिदेशक रूपिन्‍दर बरार ने भारत सरकार की पहल वोकल फॉर लोकल पर जोर दिया और सेवा की दोनों सदस्‍यों गौरीबेन और मीताबेन की सफलता की कहानियों को सुनने के बाद कहा कि यह बात पूरी तरह सच है कि जहां चाह, वहां राह होती ही है और रास्‍ते में चाहे कितनी भी बाधाएं आए अगर कोई व्‍यक्ति ठान ले, तो वह अपना रास्‍ता बना ही लेता है। उन्‍होंने धोर्डो के निवासियों के उन अनुभवों को भी साझा किया, जब 2001 में गुजरात के भुज में भूकंप से बुरी तरह प्रभावित लोगों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी (तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री) ने एक टैंट सिटी की स्‍थापना की थी। केवडिया में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आस-पास के गांव की महिलाओं ने स्‍वयं सहायता समूहों की स्‍थापना की है और राज्‍य सरकार की मदद से वे कैफेटेरिया चला रही हैं और वहां आने वाले पर्यटकों की गाइड बनने के अलावा पर्यटन क्षेत्र में अन्‍य भूमिकाएं भी निभा रही हैं। श्रीमती बरार ने पर्यटन के क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ाने के भारत सरकार के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में महिलाओं की भूमिका इस क्षेत्र में बहुत अहम हो सकती है।

देखो अपना देश वेबिनार सीरिज को इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राष्‍ट्रीय ई-गवर्नेंस विभाग के तकनीकी सहयोग से प्रस्‍तुत किया गया। इस वेबिनार के सत्र https://www.youtube.com/channel/UCbzIbBmMvtvH7d6Zo_ZEHDA/featured पर उपलब्‍ध हैं और इन्‍हें पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के सभी सोशल मीडिया हैंडल्‍स पर भी देखा जा सकता है। अगले वेबिनार का आयोजन 13 मार्च, 2021 को सुबह 11 बजे किया जाएगा और इसमें पूर्वोत्‍तर भारत के व्‍यंजनों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

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