Chandrashekhar

बाढ़ और अगलगी की विपदा को अब भी नहीं भूल पाते हरिवंश

पंचायत खबर टोलीआज प्रभात खबर के पूर्व संपादक हरिवंश दूसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गये.इस मौके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में उनका जीवन परिचय देते हुए दो प्रसंगों की चर्चा की; एक- जूते की, दूसरा उनके गांव की. दोनों बड़े रोचक व प्रेरक प्रसंग हैं. ये प्रसंग डॉ आर‌ के नीरद की …

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उतार-चढ़ाव के हिचकोलों भरी जिंदगी में चलते रहना ही नियति है…

प्रशांत बलिया चंद्रशेखर जी जैसे युगदृष्टा कभी दिवंगत नहीं होते, वे मृत्यु को भी प्राप्त नहीं होते। वे तो सदा वर्तमान रहते हैं, अपने आदर्शों के जरिये, अपने दूरदर्शी विचारों के जरिये अपने लाखों-करोडों समर्थकों के हृदय में सुनहरे भविष्य की आशा की एक धड़कन बन कर। आज चंद्रशेखर जी की पुण्यतिथि है। आज से …

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सोशल मीडिया पर नहीं रूक रहा अध्यक्ष जी को याद करने का सिलसिला

मंगरूआ नयी दिल्ली: देश में कोरोना महामारी के कारण आपात काल जैसी स्थिति है। लॉक डाउन के दौरान बाहर निकलना मना है। कोई सार्वजनिक सभा समारोह भी नहीं किया जा सकता। लेकिन इस बीच आपात काल के दौरान और उसके बाद के संसदीय राजनीति में, देश में जनमानस के नायक, लोकयात्री और युवा तुर्क के …

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कोरोना के कहर बीच…यूं सोशल मीडिया पर याद किये गये अध्यक्ष जी

मंगरूआ देश में कोरोना महामारी के कारण आपात काल जैसी स्थिती है। बाहर निकलना मना है। कोई सार्वजनिक सभा समारोह भी नहीं किया जा सकता। लेकिन इस बीच आपात काल के दौरान और उसके बाद के संसदीय राजनीति में, देश में जनमानस के नायक, लोकयात्री और युवा तुर्क के रूप में अपनी पहचान बना चुके …

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पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी का लोकमानस पूर्णतः भारतीय था

प्रोफेसर डॉ हरिकेश सिंह पूर्व कुलपति, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, बिहार भारतीय जीवन पद्धति पूर्णतः प्राकृतिक तथा ग्रामीण रहवास के दृष्टिकोण से विकेंद्रीकरण के सिद्धांत पर आधारित रही है। धीरे धीरे नगरीकरण के साथ ही साथ ग्रामीण जनमानस का विभिन्न परिस्थिथिजन्य कारणों से गांव से नगर की ओर आकर्षण बढ़ता गया और रहवास का भी केंद्रीकरण होता …

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गांव की आत्मा को बचाने की जरूरत

डाॅ हरिकेश सिंह यह प्रश्न मेरे मन में अक्सर आता है कि गांधीजी ने जिस ग्राम-स्वराज का सपना देखा था, वह कैसा था। यह जरुर है कि जिस संदर्भ में गांधी ने गांव को समझा और गांव की लोकतांत्रिक प​द्धति को ऐसा सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया कि कोई व्यक्ति केवल गांव के जीवन को …

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बहुत बदला गांव, पर कुछ अनमोल खो गया

  हरिवंश ग्राम्य जीवन को गांधी ने भी नजदीक से देखा था और उनका सही निष्कर्ष था कि इन गांवों को स्वायत्त बनाकर विकसित करना ही भारत के हक में होगा। शायद गांव की सांस्कृतिक धारावाहिकता या पुरातनता के कारण ही मुहम्मद इकबाल को लिखना पड़ा- यूनां, मिस्र, रोमा, सब मिट गए जहां से, बाकी …

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बचपन में समझते थे कि जगदीश बाबू जेपी के घर के हैं…

हरिवंश एक बार चंद्रशेखर जी से मैंने कहा कि आज जो भी राजनेता हैं वे सभी अपने संसदीय या विधानसभा क्षेत्र के विकास में डूबे हुए हैं. जयप्रकाश जी का यह गांव पीछे छूट गया था, आपने कुछ काम कराया. उनका जवाब था देखो, उत्तर प्रदेश से कितने प्रधानमंत्री और बड़े नेता हुए. हाल की …

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स्मृतियों में अटका मेरा गांव

हरिवंश जहां मैं पैदा हुआ, उस गांव का नाम सिताबदियारा है. थोड़ा समझना शुरू किया, तो पता चला कि गांव में कुल 27 टोले हैं. यह गांव दो नदियों ‘गंगा और घाघरा’ के बीच है. गांव के उत्तर घाघरा या सरयू, तो दक्षिण में गंगा. चौथी क्लास में पहुंचा तो पता चला कि यह गांव …

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