गांव को कोरोना संक्रमण से बचाव की जवाबदेही निभाने को तैयार पंचायतें…बचेगा गांव तो ​देश को मिलेगी महामारी से निजात

संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: कहीं कोरोना महामारी चढ़ाव पर है तो कहीं उतार पर। गांव को कोरोना संक्रमण से बचाव की चुनौतियां मुंह बाये खड़ी हैं। सरकारी टीका करण अभियान जगह-जगह चलाये जा रहे हैं। शुरूआती उहापोह के बाद लोग खुद बखुद बढ़ चढ़कर पल्स पोलियो और अन्य टीकाकरण अभियान की तरह ही इस अभियान को भी सफल बनाने में लगे हुए हैं। जान है तो जहान है, दो गज दूरी,सोशल डिस्टेंस है जरूरी के मूल मंत्र के साथ टीकाकरण अभियान को सफल बनाते हुए इस महामारी के दौरान एक दूसरे का हाथ बंटाने में लगे हुए हैं। लेकिन इस दौरान गांव को कोरोना संक्रमण से बचाव की चुनौतियों पर चर्चा मुनासिब होगा।
पहला, कोरोना महामारी के प्रथम चरण में भले ही शहर से गांवो में पलायन बड़े पैमाने पर हुआ था यानी शहर में काम करने वाले ग्रामीण अपने-अपने गांव लौटे थे। बावजूद इसके हमारे गांव कमोबेश कोरोना संक्रमण के खतरे से बचे ही रहे। सरकारी प्रयासों से मास्क,साबुन और क्वारेंटाईन सेंटर जैसे जरूरी इंतजामातों के जरिए गांव कोरोना के प्रकोप से दूर ही रहा।

लेकिन कोरोना महामारी के दूसरी लहर में हमारे गांव भी कोरोना के चपेट में आ रहे हैं। जैसा कि ज्ञात है कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जो पहले से कहीं अधिक तेज एवं मारक है। ग्रामीण ईलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव, आक्सी मशीन, आॅक्सीजन कॉन्सनट्रेटर, कोरोना जांच आदी सुविधाओं के अभाव में महामारी का फैलाव गांव तक होने का न सिर्फ खतरा बना हुआ है, बल्कि कई गांव कोरोना के चपेट में आये हैं।
लेकिन बड़ी बात ये है सरकारी प्रयासों के साथ ही, सामाजिक संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं,बाहर रह रहे ग्रामीणों के गांव प्रति उत्तर दायित्व के भाव से सेवा सहयोग की परंपरा और तेजी से ग्रामीण ईलाकों में टीकाकरण के विस्तार से तमाम चुनौतियों के बावजूद उम्मीद की किरण बंधी हुई है कि हम अपने से बचाने में कामयाब होंगे। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रामीणों को ग्रामीण क्षेत्रों को पहले की तरह ही कोरोना संक्रमण से बचाने का आह्वान किया। कोरोना से बचाने का आह्वाण किया है।

ऐसे में जब प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि हमें  गांव को कोरोना संक्रमण से बचाना है तो हमारी चुनौती और जवाबदेही और बढ़ जाती है। क्योंकि दूसरी लहर में ग्रामीण क्षेत्रों को संक्रमण से बचाना पहले की अपेक्षा अधिक चुनौतीपूर्ण है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में कोरोना ( सीरो-प्रसार सर्वे—अगस्त-सितंबर 2020) में ग्रामीण क्षेत्रों में दूसरे सर्वे में कोरोना संक्रमण 5.2 प्रतिशत था, जो तीसरे सर्वे (दिसंबर-जनवरी 2021) में बढ़कर 21.4 प्रतिशत हो गया। सिर्फ तीन महीनों में कोरोना संक्रमितों की संख्या में 16 प्रतिशत की वृद्धि का मुख्य कारण शहरों में रह रहे संक्रमित प्रवासी श्रमिकों का गांवों में वापस लौटना था। इस बार कोरोना वायरस में हुए परिवर्तनों के कारण संक्रमण दर पहले से बहुत अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों की देश की जनसंख्या में हिस्सेदारी 65 प्रतिशत है, जबकि देश की चिकित्सा सुविधाओं में इसकी हिस्सेदारी केवल 35 प्रतिशत ही है। ऐसे में यदि गांवों में कोरोना संक्रमण बेलगाम होता है तो निश्चित रूप से इसका असर होगा।


कैसे बचायें गांव को

प्रधानमंत्री ने गांव को कोरोना संक्रमण से बचाने​ के लिए मंत्र दिया है मेरा गांव, सबसे सुरक्षित यानी मेरा गांव कोरोना फ्री अभियान चलाने का आह्वाण किया है। ये तभी संभव है जब हमें संक्रमण के स्केल की सही जानकारी होगी। टेस्टिंग, ट्रेकिंग, ट्रीटमेंट और कोविड  बिहेवियर पर ध्यान देने की जरूरत है। पीएम ने कहा कि कोरोना की इस दूसरी वेव में अभी ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में हमें बहुत ध्यान देना है। गांव में जागरुकता बढ़ानी है और उन्हें इलाज से जोड़ना है।

स्वाभाविक तौर पर प्रधानमंत्री के इस आह्वाण का असर गांवो पर होगा लेकिन इसके साथ ही साथ शहरों से गांवों में कोरोना के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए कुछ तात्कालिक उपाय करने की आवश्यकता है। ये उपाय हैं गांवों में संक्रमितों की निगरानी के लिए जनभागीदारी से सूचना तंत्र स्थापित किया जाए, कोरोना टेस्टिंग के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के लिए समर्पित तंत्र स्थापित किया जाए, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कोरोना हेल्प सेंटर की स्थापना कर वहां सामान्य दवाइयों की किट उपलब्ध कराई जाए, एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) तथा अन्य ग्रामीण प्रशासन में लगे सरकारी कर्मचारियों को पीपीई किट उपलब्ध कराकर उन्हेंं घर में आइसोलेशन सुविधा विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जाए। इसके अलावा गांवों में चिकित्सा सुविधाओं की स्थापना की जाए तथा जितना तेजी से संभव हो उतनी तेजी से नि:शुल्क टीकाकरण।
बड़ी बात यह है कि तमाम चुनौतियों के बाद गांव में ये सारे उपाय किए जा रहे हैं। इन सभी पर काम हो रहा है। चाहे गांवों के कोरोना मरीजों को वहीं पर आइसोलेट करने और साथ ही वहीं उनका उपचार करने की व्यवस्था हो या फिर मिल जुल कर एक दूसरे का सहयोग कर खान पान की व्यवस्था इन सबमें पंचायती राज संस्थाएं और अन्य सामाजिक संस्थाएं बढ़ चढ़कर योगदान दे रही हैं।

यहां तक उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने खुद ही गांव को कोरोना संक्रमण से मुक्त रखने की कमान संभाल ली है और गांव की यात्रा कर रहे हैं। ग्रामीणों से संवाद कर रहे हैं और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे रहे हैं।

वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गांव को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ऐलान किया है कि राज्य सरकार के ‘कोरोना मुक्त पिंड अभियान’ के अंतर्गत उन सभी गांवों को 10 लाख रुपए का विशेष विकास अनुदान दिया जाएगा जिन गांवों में 100 प्रतिशत टीकाकरण कार्य संपन्न किया जाएगा।

इसी तरह हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी हरियाणा के गांव को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण ईलाकों में संक्रमण से बचाव के लिए पंचायतों को आबादी के हिसाब से फंड जारी किया है इसके लिए पंचायतों को आबादी के मुताबिक 50 हजार रूपए की राशि दी जाएगी। इस ​राशि को चौपाल, सरकारी स्कूल आंगनवाड़ी केंद्रों में आईसोलेशन सेंटर बनाने पर खर्च किया जाना है। एक तरफ गांव—गांव में टीकाकरण अभियान चल रहा है वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों को संक्रमण से बचाने के लिए हर तरह की सावधानियां बरती जा रही है। प्रदेश के गांवों में 1000 से ज्यादा आईसोलेशन सेंटर बनाए गये हैं। 3011 गांवों के 22 लाख से ज्यादा ग्रामीणों के स्क्रीनिंग का काम पूरा हो गया है। इस दौरान जांच टीमों ने 5 लाख से ज्यादा घर कवर किये हैं।
इसी तरह अन्य प्रदेशों में भी गांव को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए पंचायती राज संस्थाएं राज्य सरकार और सामाजिक संगठनों से कदम ताल मिलाकर काम कर रही हैं।
लेकिन गांव को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए दिए गये अपने मंत्र में इस बात की ओर भी आगाह किया है कि आपदा में अवसर खोजने वाले मुनाफाखारों से हर कीमत पर निपटना होगा। उन्होंने ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। स्वाभाविक है चुनौती बड़ी है,संसाधन कम है लेकिन इस बड़ी लड़ाई को बड़े जज्बे के साथ एहतियात बरतते हुए जीता जा सकता है और इस कार्य में पंचायती राज संस्थाएं महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। यदि कोरोना संक्रमण का प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों में होता है तो स्थिति विस्फोटक हो जाएगी। दूसरी लहर थमने के बाद तीसरी लहर से भी गांवों को बचाने की चुनौती है और उस दिशा में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं।

पंचायत खबर पर कोरोना से जुड़ी दूसरी न्यूज रिपोर्ट की अगली कड़ी में चर्चा होगी कोरोना संक्रमितों में पाये जाने वाले ब्लैक फंगस बीमारी के संक्रमण,उनसे बचाव के उपायों पर…

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