अमरनाथ झा
पटना: बिहार में पंचायत चुनाव कब होगा इसको लेकर भले ही कोई औपचारिक तिथि की घोषणा न की गई हो, लेकिन आगामी पंचायती चुनाव में उम्मीदवारी की आस लगाए मुखिया जी को इन दिनों तरह—तरह के विभागीय फरमान मिल रहे हैं। उनकी सांस अटकी हुई है कि पता नहीं कौन सा विभागीय फरमान आ जाए और उनकी उम्मीदवारी पर अमावस का ग्रहण लग जाए। इसी क्रम में एक बार फिर से फरमान आया है। फरमान जारी हुआ है पंचायती राज विभाग के अपर सचिव अमृत लाल मीणा की तरफ से जिसमें कहा गया है कि खर्च का अंकेक्षण नहीं कराने वाले मुखिया जी को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
पंचायती राज विभाग के अपर सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा है कि पंचायत चुनाव के लिए मुखिया जी को समय पर अंकेक्षण कराना अनिवार्य है। अगर कोई मुखिया जी इस कार्य को नहीं कराता है तो माना जाएगा कि उसने अपने संवैधानिक दायित्व को पूरा नहीं किया है। ऐसा नहीं करने वाले मुखिया जी अयोग्य घोषित होंगे। साफ है विभागीय अधिकारी मीणा के फरमान के मायने हैं कि यदि मुखिया जी चुनाव लड़ना चाहते हैं तो इसके लिए उन्हें उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा कराना भी अनिवार्य है।
नल-जल योजना में गड़बड़ी को लेकर भी आया था आदेश
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले पंचायती राज विभाग ने यह आदेश दिया था कि नल-जल योजना को पूरा नहीं करने वाले मुखिया जी व अन्य पंचायत प्रतिनिधि चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दिए जाएगे। यह आदेश हालांकि विवादास्पद है क्योंकि नल-जल योजना एक सरकारी योजना है, ग्राम सभाओं ने इसकी मांग नहीं की है। परन्तु सरकारी योजना पूरा करने का दायित्व लेकर उसे पूरा नहीं करना या घपलेबाजी करना दायित्वहिनता जरूर है और उसे लेकर प्रथमिकी दर्ज की जा सकती है।
पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होते नई योजनाओं पर लगेगी रोग
उल्लेखनीय है कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही नई योजनाओं की स्वीकृति और कार्यान्वयन पर रोक लग जाएगी। सिर्फ उन्हीं योजनाओं का कार्यान्वयन किया जा सकेगा जिनपर कार्य शुरू किया जा चुका है। यह निर्देश केन्द्र और राज्य दोनों की योजनाओं पर लागू होगा। पंचायती राज संस्थानों द्वारा लागू की जा रही योजनाओं में अभी ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना, मुख्यमंत्री गली-नाली पक्कीकरण योजना, 15 वें वित्त आयोग से प्राप्त कोष से संचालित योजनाएं, सोलर लाइट योजना आदि हैं। इन योजनाओं के चयन और कार्यान्वयन में पंचायती राज प्रतिनिधियों की अहम भूमिका है।
पंचायत चुनाव की तिथी का है इंतजार
बिहार में पंचायत चुनाव कब होंगे, इसे लेकर अनिश्चितता अभी दूर नहीं हुई है, मुखिया जी व अन्य उम्मीदवार इंतजार में हैं, लेकिन प्रशासन पंचायत चुनावों को लेकर चाक-चौबंद व्यवस्था करने में लगा हुआ है। राज्य चुनाव अयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव कार्य में तैनाती हो जाने के बाद अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपनी तैनाती वाले स्थान पर नहीं जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। इतना ही नहीं आयोग ने यह भी कहा है कि मतदान दल के सदस्य बिना पूर्व अनुमति के अनुपस्थित रहते हैं तो उन्हें निलंबित किया जाएगा और पंचायती राज अधिनियम 2006 की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी और इसकी सूचना राज्य निर्वाचन आयोग को दी जाएगी।
पुख्ता प्रशिक्षण दिये जाने के आदेश
आयोग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों के कहा है कि वे अपने स्तर से पंचायत चुनाव के मद्देनजर मतदान दलों के गठन, मतदान व मतगणना कर्मियों के प्रशिक्षण की समीक्षा करेंगे और संबंधित जिला के साथ समन्वय बिठाकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। मतदान समाप्त होने के बाद पीठासीन अधिकारी, गश्ती सह ईवीएम संग्रहण दंडाधिकारी के साथ वज्रगृह तक आएगे। मतदान दल के बाकी सदस्य मतदान केन्द्र से ही जिला निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा की गई व्यवस्था के अनुसार वापस लौट जाएगे। जहां मतदान दल के सदस्य अनुपस्थित रहेंगे, वहां सुरक्षित मतदान दल के सदस्यों को भेजा जाएगा।
ऐसे में साफ है पंचायती राज विभाग के फरमानों के मद्देनजर मुखिया जी भी अन्य उम्मीदवारों के साथ अपने कागज पत्तर दुरूस्त करने में लगे हुए हैं ताकी कहीं आखिरी वक्त में उनके उम्मीदवारी के दावे पर विभागीय फरमानों की नजर न लग जाये।


