आलोक रंजन
लखनऊ: कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन में एक तरफ जहां मजदूर शहर छोड़ने को मजबूर हुए वहीं गांव गुलजार है। हालाकि कामकाज की रफ्तार वहां भी धीमी है। बावजूद इसके जब प्रधानमंत्री ने पंच प्रतिनिधियों से पंचायती राज दिवस पर बातचीत करते हुए यह पूछा कि अब तो केंद्र द्वारा भेजा गया एक रूपये में सौ पैसा डायरेक्ट गांव में पहुंच रहा है तो पंचायत प्रतिनिधियों ने हामी भरी और उनके नेतृत्व का गुणगान किया। कई लोगों को ऐसा लगा कि इस सवाल के जरिए प्रधान मंत्री पूर्व प्रधानमंत्री और भारत में पंचायती राज संस्थाओं के सही मायने में आर्किटेक्ट राजीव गांधी पर चुटकी ले रहे हैं। हालाकि इस बातचीत में प्रधान मंत्री ने गांवो के आत्मनिर्भरता की बात भी कही जो कि गांधी की सपना था। लेकिन गांव आत्मनिर्भर तब होगा जब लोगों को गांव में ही रोजगार मिले। रोजगार तो तब मिलेगा जब कोरोना काल में जो मजदूर शहर छोड़ कर गांव में लौट रहे हैं और जिनकी वजह से गांव गुलजार हो रहा है, उन्हें गांव में ही काम मिले। और यह तभी संभव है जब गांव में मनरेगा का काम चले और यह वही मनरेगा योजना है जो कि यूपीए के पहले कार्यकाल में शुरू की गई थी और जिसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में चुटकी लेते हुए आश्वस्त किया था कि हम यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार का सिंबल बन चुके मनरेगा को गाजे बाजे के साथ जारी रखना चाहते हैं।

कोरोना ने छिना रोजगार, मनरेगा में काम की उम्मीद
कोरोना के महामारी के दौरान जब गांव से शहर की ओर पलायन कर चुके ग्रामीण मजदूर एक बार फिर से गांव लौटने लगे हैं तो उत्तर प्रदेश के कई ग्राम पंचायतों ने इन मजदूरों को गांव में ही रोके रखने और उन्हें वहीं रोजगार देने के लिए विगत कइ्र माह से रूके हुए मनरेगा के कामकाज की गतिविधियों को तेज कर दिया है। एक तरफ ये पंचायते कोरोना संकट के दौरान क्वारंटाईन सेंटर चलाकर गांव को सुरक्षित करने की गतिविधियों में लगी हुई है वहीं दूसरी तरफ कोरोना संक्रमण को लेकर विगत काफी दिनों से ग्राम सभाओं में बंद पड़े विकास के कार्यों को अब धीरे-धीरे गति दी जा रही जिसे लेकर मजदूरों के चेहरे पर मुस्कान देखने को मिली है। ऐसी ही तस्वीरें कई पंचायतों से सामने आई हैं। चर्चा करते हैं प्रतापगढ़ के सदर विकास खंड के बहलोलपुर गांव पंचायत की। जहां पंचायत सेक्रेट्री सुनील प्रभाकर की अगुवाई में मनरेगा जॉब कार्ड धारकों को प्रधान शिव बहादुर यादव द्वारा निशुल्क मास्क वितरण कर सोशल डिस्टेंसिंग की जानकारी देते हुए मजदूरों को मनरेगा के कार्य में लगाया गया। इस क्रम में राकेश वर्मा के घर से आगे जाने वाले संपर्क मार्ग पर मिट्टी डलवा कर मनरेगा जॉब कार्ड धारकों के कार्य की शुरुआत कराई गई। मनरेगा के तहत चलाये जा रहे कामकाज के विषय में पंचायत सचिव सुनील प्रभाकर ने बताया कि मनरेगा जॉब कार्ड धारकों को काम पर लगाने के पीछे सरकार की यह मंशा है कि लॉक डाउन के दौरान किसी भी जॉब कार्ड धारक को किसी भी प्रकार से खाने—पीने की तकलीफ ना हो जिसकी वजह से उन्हें मनरेगा के कार्यों में लगाया गया है। इससे काम करने वाले मजदूरों के खाते में मजदूरी का आवागमन बना रहेगा जिससे उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा और उधर बंद पड़े विकास कार्यों को भी गति मिल सकेगी।

परदेश से गांव लौट रहे मजदूरों का सहारा बनेगा मनरेगा
प्रयागराज जनपद के सामाजिक कार्यकर्ता राजीव चंदेल ने अपने गांव में मनरेगा के तहत चलाये जा रहे कामकाज की जानकारी देते हुए कहते हैं कि मेजा विकास खंड के सुजनी गांव में तालाब खुदाई का काम शुरू किया गया है। हमारे गांव में आज मनरेगा के तहत नए तालाब खुदाई का कार्य प्रारंभ हो गया है।तय हुआ है कि लाकडाउन में लाक डाउन के सभी नियमों- कानूनों का कठोरता से पालन कराते हुए ज्यादा से ज्यादा मनरेगा जाब कार्ड धारकों को रोजगार दिया जायेगा। इस बाबत ग्राम पंचायत अधिकारी राजेश तिवारी जी से हमारी एक मीटिंग हुई। हमारी मांग पर उन्होंने 1000 मानव दिवस रोजगार देने के लिए सोमवार तक वर्क डिमांड भेजने का प्रारूप बना लिया है।आज महानगरों में फैक्ट्रियां बंद हैं, उद्योग बंद हैं, तमाम धंधे बंद हैं ,लेकिन मनरेगा ऐसी स्कीम है जिसके तहत गांव में ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया जा सकता है।उन्होंने बाकी पंचायत प्रतिनिधियों से भी कहा है कि वे अपने गांव में मनरेगा स्कीम के तहत श्रमिकों को रोजगार दिलाने की पहल करें।
हालाकि राजीव यह भी कहते हैं कि अभी बीते हुए कल ही राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस था। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को मनरेगा स्कीम बनाने के लिये सोनिया गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को धन्यवाद बोलना चाहिए था।
इस तरह से स्पष्ट है कि यदि गांव के लोगों को गांव में रोजगार दिया जाए और मनरेगा के जरिए कृषि कार्यों और स्थायी परिसंपत्तियों के सृजन की दिशा में गंभीरता से प्रयास हो तो गांव का विकास होने के साथ बहुत सारे लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी प्राप्त हो सकेगा।

करोड़ों के परफारमेंस ग्रांट से 73 पंचायतें होंगी मालामाल
उत्तर प्रदेश के पंचायतीराज विभाग द्वारा जारी एक आदेश के जरिए राज्य के पिछले तीन वर्षों से फंसी वित्तीय वर्ष 2016-17 की परफारमेंस ग्रांट का लगभग 700 करोड़ रुपया पात्रता की शर्तें पूरी कर चयनित की गईं 73 पंचायतों में बांटे जाने का निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 की इस परफार्मेंस ग्रांट के पक्षपात व कपटपूर्ण बंटवारे में तत्कालीन निदेशक अनिल दमेले समेत पंचायती राज निदेशालय के कई अधिकारी फंसे और उनके खिलाफ जांच के बाद एफआईआर भी दर्ज करवाई गई। इसके बाद प्रदेश की सभी पंचायतों से इस परफारमेंस ग्रांट की राशि वापस मंगा ली गई। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के बाद कमेटी ने नये सिरे से पंचायतों से आवेदन पत्र मांगे। तय मानकों के आधार पर इन आवेदन पत्रों पर विचार हुआ और इस साल बीती 12 मार्च को कमेटी ने 73 पात्र पंचायतों का चयन किया।
सबसे ज्यादा फायदा गोरखपुर की पंचायतों को
प्रमुख सचिव पंचायतीराज मनोज सिंह ने शुक्रवार को जारी इस शासनादेश में कहा है कि 14वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के तहत ग्राम पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2016-17 में निष्पादन अनुदान (परफार्मेंस ग्रांट) के लिए 69975.32 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृत करते हुए कुल 73 पंचायतों को इस राशि का आवंटन सशर्त किया गया है। इनमें सर्वाधिक 37 ग्राम पंचायतें गोरखपुर जिले की हैं। इसके बाद 14 पंचायतें महाराजगंज की हैं। ये पंचायते इस राशि का व्यय 14 वें वित्त आयोग के सिद्धांतों और इस बाबत जारी आदेश व दिए गये प्रावधानों के अनुसार ही कर सकेंगी। यह भी कहा है कि जिन मामलों में बजट मैनुअल और फाइनेंशियल हैण्डबुक के नियमों और अन्य स्थायी आदेशों के तहत राज्य व केन्द्र सरकार अथवा अन्य सक्षम अधिकारी की स्वीकृति प्राप्त की जानी आवश्यक हो, उन मामलों में व्यय करने से पहले स्वीकृति जरूर ले ली जाए।
