डबल इंजन न हो लेकिन डबल इच्छाशक्ति से प्रवासियों को वापस लाने में जुटे हेमंत सोरेन

मंगरूआ
रांची: लॉकडाउन में जब कुदरत को वापस अपनी खोयी ज़मीन वापस पाने का मौक़ा मिला। झारखण्ड से सुंदर धरती पर कुछ भी नहीं।
“गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त/ हमी अस्तो हमी अस्तो हमी अस्तो” (धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यही हैं)। और उस स्वर्ग में जब हेमंत सोरेन जैसा वादा निभाने वाला मुख्यमंत्री हो तो कोरोना काल में जनता की उम्मीद बढ़ जाती है। जी हां ये उपर लिखी गयी पंक्तियां भी हेमंत सोरेन की हैं और नीचे किये गये वादे भी और वादे को पूरा करने का जज्बा भी। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वादा किया था कि झारखंड के प्रवासियों को हर हाल में लाएंगे। जो आ रहे हैं, उन्हें गले लगाएंगे और स्वस्थ भी बनाएंगे। विभिन्न राज्यों में फंसे छात्रों और प्रवासी श्रमिकों को अब राज्य सरकार झारखंड वापस लाएगी। उन्होंने जानकारी दी थी कि प्रदेश के मजदूरों को हर हाल और लाया जाएगा साथ ही हर कीमत पर कोरोना को हराया जाएगा। हेमंत सोरेन ये वाद उस वक्त कर रहे थे जब पड़ोसी राज्य बिहार की सरकार के उपमुख्यमंत्री ने यह कह दिया था कि उनके बाद बाहर रह रहे प्रवासियों को राज्य में वापस लाने का संसाधन नहीं है।
लेकिन कहते हैं न कि साधन—संसाधन तो जुट जाते हैं बशर्ते हौसला बुलंद हो।

डबल इच्छाशक्ति से  जुटे हेमंत सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत बुलंद हौसले के साथ प्रवासियों को वापस लाने की दिशा में प्रयास करते दिखे बावजूद ​इसके कि चुनावी सफर में प्रदेश के निवर्तमान सरकार ने बार—बार ये कहा ​था कि प्रदेश में डबल इंजन की सरकार होगी तो प्रदेश का विकास होगा। लेकिन प्रदेश के लोगों ने सिंगल इंजन के सरकार पर भरोसा किया और हेमंत उस पर खड़े उतर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पूरे देश में क़रीब 10 लाख से अधिक झारखंडी विभिन्न शहरों, राज्यों में फंसे हुए हैं। प्रदेश की सरकार ना सिर्फ़ कोटा में फंसे हमारे बच्चों को लेकर चिंतित है बल्कि, साथ ही मैं देश के विभिन्न कोनों में इंजिनीयरिंग, मेडिकल एवं अन्य प्रोफ़ेशनल कोर्स की पढ़ाई करने गए छात्रों की भी उतनी ही चिंता है। साथ में हमारे मज़दूर भाइयों की सबसे ज़्यादा चिंता है जिनके बारे में आज कोई बात कर नहीं रहा।
इस राज्य का सेवक एवं बेटा होने के नाते मेरी चिंता तकलीफ़ में फंसे हर एक झारखंडी के लिए है। इसलिए इस समस्या के निदान हेतु ट्रेनों का संचालन ही सबसे उपयुक्त तरीक़ा है। ट्रेनों में सोशल डिस्टन्सिंग का पालन कर बड़े मात्रा एवं आरामदायक तरीक़े से हम अपने लोगों को वापस राज्य ला उनकी सेवा कर सकते हैं।
हेमंत सोरेन को संदेह था कि पता नहीं केंद्र की सरकार उनकी बात मानेगी कि नहीं। हेमंत सोरेन ने केंद्र से आग्रह किया था कि स्पेशल ट्रेन से झारखंड के प्रवासी मजदूरों को लाने की इजाजत दी जाये। रेल मंत्रालय ने उनकी बात मान ली है। नतीजा सामने है इस बीच झारखंड के लिए ट्रेन देकर केंद्र सरकार ने भी मजदूरों के वापसी का रास्ता बनाया है।
केंद्र से अनुमती मिलने के बाद जब तेलांगना से झारखंड के लिए मजदूर चल पड़े तो हेमंत सोरेन ने फेसबुक पोस्ट लिखा और कहा कि अंततः केंद्र सरकार ने श्रमिकों को भी वापस लाने की हमारी मांग मानी और हमने तुरंत झारखण्ड वासियों को सकुशल वापस लाने हेतु कार्य प्रारम्भ कर दिया।  जैसे अन्य राज्यों में पढ़ रहे छात्र हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं ठीक उसी तरह झारखंडी श्रमिक भी उतने ही अहम हैं। हर एक झारखंडी की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और इसको लेकर आपकी सरकार बेहद संजीदा है।
जैसे ही तलंगाना से मजदूर ट्रेन पर सवार होकर झारखंड की ओर चले हेमंत सोरेन ने लिखा,अपने द्वारा किए गए हर वादे को हम निभाएंगे। पूरे देश में झारखंडीयों से भरी पहली ट्रेन – तेलंगाना से रांची की ओर रवाना हो चुकी है। साथ ही आपको बताना चाहूंगा की अधिकारियों की एक टीम कोटा पहुँच चुकी है और जल्द ही वहाँ से सभी छात्रों को हम अपने घर ले आएँगे।

मैं पहले भी कह चुका हूँ और फिर दोहराता हूँ की – हमारी जवाबदेही हर एक झारखंडी के प्रति है और आपकी सरकार उसे ज़रूर निभाएगी।
उल्लेखनीय है तेलंगाना से झारखंड के लिए चली 24 कोच वाली स्पेशल ट्रेन में 1200 लोग सवार हैं। इसे पूरी तरह सैनिटाइज कर लाक डाउन के तहत सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए रवाना किया गया है। आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार ने बताया, ’24 बोगियों वाली यह ट्रेन शुक्रवार सुबह 4 बजकर 50 मिनट पर रवाना हुई।’ उन्होंने बताया कि यह प्रवासियों के लिए अब तक चलने वाली पहली ट्रेन है। संयोग से शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस भी है। इस ट्रेन के जरिए लिंगमपेल्ली में फंसे झारखंड के मजदूरों को लेकर अभी एक स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था की गई है। बताया जा रहा है कि यह ट्रेन सुबह तक झारखंड के हटिया स्टेशन पहुंचेगी। इसके साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे लाखों मजदूरों को घर लाने का काम शुरू हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की इजाजत मिलने के बाद अलग-अलग राज्यों की सरकारें बसों से अपने राज्य के मजदूरों को वापस लाने में जुटी हैं।
कई राज्य कर रहे हैं स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग
यही वजह है कि पंजाब, बिहार जैसे कई राज्यों ने केंद्र से प्रवासियों को लाने-ले जाने के लिए स्पेशल ट्रेनों को चलाने की मांग की है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर कहा है कि फंसे हुए मजदूर इतनी बड़ी संख्या में हैं कि उन्हें बसों के जरिए नहीं ले जाया जा सकता। उन्होंने इसके लिए ट्रेनों को चलाने की मांग की है।
उधर बिहार समेत दूसरे राज्यों ने भी केंद्र सरकार से अपील की है कि मजदूरों को वापस लाने के लिए स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था की जाये। हालाकि बस से बिहार लाये जाने के सवाल पर जिस तरह से सुशील मोदी ने असमर्थता जाहिर की उसके बाद उनके इस बयान से बिहार में घमासान मचा हुआ है। हाला​कि कई राजनीतिक दल राज्य सरकार को सहयोग देने की बात कह रहे हैं। जनाधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव ने 30 लाख रुपये खर्च कर कोटा में फंसे बच्चों को लाने के लिए 50 बसें भेजी हैं। आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव ने भी बाहर से प्रवासियों को लाने 2000 बसें भेजने का एलान किया। हालांकि उनकी बसें कब जाएंगी, इस पर अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ है। भाजपा-जदयू ने उनके एलान पर यह कह कर टिप्पणी की कि वे पहले बसों के नंबर तो बतायें।

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