जीवन में अपनायें योग, काया रहेगा निरोग

ठाकुर उमेशानंद योगी 

 योग है जीवन की धारा ,

जिसने जाना, उसने माना

 सब का जीवन  इसने तारा ,

रोगों से हों मुक्त मानव जीवन

हमारा योग एक ऐसी पद्धति या चिकित्सा पद्धति है जो व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा को एकीकृत करता है। मन को शांत करता है। व्यक्ति को शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से प्रबुद्ध करता है, तनाव दूर करता है और श्वसन के सही तरीके सिखाता है। शारीरिक मुद्रा में सुधार करता है, हर परिस्थिति से मुकाबला करने का कौशल प्रदान करता है, तथा दृढ़ संकल्प एवं एकाग्रता के लिए व्यक्ति को प्रोत्साहित करता है। यह एक ऐसी पद्धति है जिसके जरिए युवा विभिन्न प्रकार के शारीरिक श्रम की थकान के बावजूद मानसिक चेतना को जाग्रत करते हुए जीवन में निरंतरता को बनाए रखने व भावना पर नियंत्रण रखते हुए सफलता के पथ पर बढ़ने को प्रेरित करता है। यदि आज भागम भाग वाली जिंदगी में देखें तो योग का महत्व दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है।

भौतिक युग के चकाचौंध में मनुष्य अपने प्राकृतिक स्वभाव को निरंतर भूलाता जा रहा है। खासतौर पर युवा वर्ग भटकाव की समस्या से ग्रसित हो अपने लक्ष्य से अक्सर विमुख होता दिखता है। आज का युवा समस्याओं के निदान के बजाय समस्याओं में ही दिन प्रतिदिन उलझता चला जा रहा है। वैसे में योग के अलावा कोई सटीक और सार्थक उपाय नहीं दिख रहा जो इन शक्ति को उनके अंदर छिपी हुई शक्ति का अहसास कराये। 

 

यदि बिंदूवार देखें तो युवाओं व आम जन की स्वास्थ्य समस्यायें निम्नलिखित हैंः-

ऽ अधिक वजन और मोटापा

ऽ तनाव

ऽ चिंता और अवसाद

ऽ युवाओं में हिंसा की प्रवृति

ऽ आत्महत्या की प्रवृत्तियां

ऽ तंबाकू व विभिन्न प्रकार के नशे का सेवन

ऽ गैर संचारी रोग
योग में आसन और प्राणायाम विशेष रूप से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को दुरूस्त करते हैं। इनसे शरीर की ताकत बढ़ती है और शरीर से विषाक्त पदार्थों का खात्मा होता है। देह और मन को आराम मिलता है, तनाव दूर होता है। 

इस प्रकार आसन और प्रणायाम निम्नलिलिखित सहायता प्रदान करते हैं:-

ऽ तनाव और चिंता से राहत

ऽ सकारात्मक उर्जा और मनोदशा को बढ़ावा देना

ऽ रक्तचाप को सामान्य करने सहायता

ऽ मांसपेशियों को चुस्त करते हुए पाचन को दुरूस्त करना

ऽ शांति और सुख की भावना उत्पन्न करना

ऽ तनाव को दूर करना जिससे उसके गंभीर होने का खतरा कम होता है

ऽ हृदय को गति और श्वास को मंद करना और रक्तचाप सामान्य करना

ऽ आॅक्सीजन का अधिक कुशलता से प्रयोग

ऽ प्रतिरोधक क्षमता से मुक्ति

 

ऽ गैर संचारी रोगों से मुक्ति- वैसे आजकल की जीवन शैली गैर संचारी रोगों का मुख्य कारण है। जिसमें तंबाकू का सेवन, गतिहीन जीवन शैली, नियमित व्यायाम की कमी, अस्वास्थ्यकर आहार और गंभीर मनोवैज्ञानिक तनाव शामिल है। कई गैर संचारी रोगों में पेट में जबरदस्त जलन और तनाव देखा गया है और ऐसी स्थिति में योग बहुत फायदेमंद है। स्वाभाविक है योग आज के समय में बेहतर जीवन शैली की अनिवार्य कड़ी बन  चुकी है। अगर समय रहते हम योग को नहीं अपनाते तो मानव कई प्रकार के रोगों से ग्रसित होकर काल कवलित हो जाएगा। बाकी के कई प्रकार के आसन, प्राणायामों को करने की विधि एवं हर आसन एवं प्राणायाम के जरिए रोग का उपचार, परहेज ये सभी अगली कड़ी में विस्तार से जिज्ञासुओं को बताया जाएगा।  

असतो मा सद्गमय 

तमसो मा ज्योतिर्गमय 

मृत्यो मा अमृत गम्य।। 

लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु। ओम शान्ति, शान्ति, शान्ति भवेतु।…

(बाकी अगली कड़ी में। )

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