रोविंग एडिटर पंचायत खबर
पटना: कोई शक नहीं कि कोरोनावायरस ने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को तहस-नहस कर दिया है। देश की अर्थव्यवस्था हिचकोले खा रही है। बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का संकट के बादल मंडरा रहे हैं। स्कूल कॉलेज बंद पड़े हैं। ना जाने हमारे शिक्षण संस्थान कब खुल पाएंगे। खाद्यान्नों की सप्लाई चैन बुरी तरीके से प्रभावित हुई है। लेकिन इन तमाम चुनौतियों व कठिनाइयों के बीच निसंदेह कुछ अवसर भी उभर कर सामने आए हैं । कोरोना काल में सबसे बड़ा अवसर ऑनलाइन माध्यम बनकर उभरा है। अब यहां एक सवाल खड़ा किया जा सकता है कि किसान- खेत -गांव का ऑनलाइन से क्या जुड़ाव हो सकता है। मेरे मुताबिक जुड़ाव हो सकता है। इस महामारी के दौर में खेती किसानी को भी अब ऑनलाइन माध्यम चुनना पड़ेगा। वैसे, किसान महामारी से उपजे तंगहाली से निकलने की कोशिश में जुटे हुए। लेकिन सब कुछ अनिश्चितता से भरा पड़ा है।
आइए अब समझते हैं कि ऑनलाइन को खेती-किसानी से कैसे बेहतर से बेहतर ढंग से जोड़ा जा सकता है। जहां लगभग पूरा विश्व घरों में कैद है वहीं किसान खेत में काम करते देखे जा सकते हैं। प्रत्येक गांव के स्तर पर, ब्लॉक के स्तर पर, या जिला के स्तर पर किसानों का समूह बनाकर अपने उत्पादों की जानकारी कीमत के साथ ऑनलाइन कर सकते हैं। इसमें हर एक किसान की सहभागिता आवश्यक होगी। उपभोक्ताओं तक भी सीधी पहुंच बनाई जा सकती है। कंपनियों से भी सौदा किया जा सकता है। विदेशों तक निर्यात किया जा सकता है। इससे बिचौलियों का काम भी काफी हद तक खत्म हो जाएगा। लाभ में हिस्सेदारी का बटना भी काफी हद तक कम हो जाएगा। कई जिलों में उपभोक्ताओं और किसानों के बीच स्थानीय प्रशासन एक कडी बनकर उभरा है। खासकर महाराष्ट्र में ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने आएं। इन उदाहरणों को बड़ा आकार भी दिया जा सकता है। यह संभव है। इस करोना काल में सभी प्रभावित हुए हैं तो किसान भी इससे अछूते नहीं रहे। उनकी माली हालत प्रभावित हुई है। ऐसे में किसानों का समूह बनना वक्त की मांग है। कई फसल ऐसे हैं जिसके पैदावार में काफी खर्च होते हैं। वहीं कुछ ऐसे भी फसल है जिसके पैदावार में इसकी तुलना में कुछ कम खर्च होते हैं। वहीं कई ऐसे फसल है जिसे लंबी अवधि तक नहीं रखा जा सकता है। सडने गलने लग जाते हैं। वही सिर्फ अपने ही देश में नहीं बल्कि विश्व भर से यह प्रवृत्ति उभर कर सामने आई है कि लोग कम से कम खाद्य पदार्थों का भंडारण आवश्यकता से अधिक करने लगे हैं। यह प्रवृत्ति अगले एक-दो सालों तक अनवरत जारी रहेगी। इन तमाम चुनौतियों में किसानों को एकमुश्त फसल बिक्री की मानसिकता से भी बाहर आना होगा। उन्हें रोजाना, सप्ताहिक बिक्री का मन बनाना होगा और यह ऑनलाइन या ई-कॉमर्स के माध्यम से ही संभव हो सकता है। बूंद बूंद से ही घड़ा भरता है।
ई नाम पोर्टल भी बन रहा है सहयोगी
सरकार द्वारा 14 अप्रैल 2016 प्रारंभ किये गए ई-नाम पोर्टल को लगातार विकसित करने में लगी है | इस पोर्टल को इस प्रकार बनाया गया है कि किसान को मण्डी आये बिना ही उनके उत्पाद को बाजार तक पहुंचाया जा सकता है | अब इसमें सरकार द्वारा कुछ नई सुविधाएँ जोड़ी गई गई हैं | इससे किसानों को अपनी उपज को बेचने के लिए खुद थोक मंडियों में आने की जरूरत कम हो जाएगी। वे उपज वेयरहाउस में रखकर वहीं से बेच सकेंगे। यह भी पढ़ें ग्वार किसानों की गिरती आय को लेकर मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र ई-नाम पर जोड़े गए नये फीचर्स ई – नाम में गोदाम से व्यापार की सुविधा के लिए वेयरहाउस आधारित ट्रेडिंग माड्यूल एफपीओ का ट्रेडिंग माड्यूल जहां एफपीओ अपने संग्रह से उत्पाद को लाए बिना व्यापार कर सकते हैं | इस जंक्शन पर अंतर-मंडी तथा अंतरराज्यीय व्यापार की सुविधा के साथ लॉजिस्टिक मॉड्यूल का नया संस्करण, जिससे पौने चार लाख ट्रक जुड़े रहेंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा की यह कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए कामकाज करने में भी यह मददगार है | उन्होंने कहा कि ये नई सुविधाएं कोविड–19 के खिलाफ हमारी लड़ाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, ताकि इस समय किसानों को अपने खेतों के पास ही बेहतर कीमतों पर अपनों उपज बेचने में मदद की जा सके |
क्या है ई–नाम पोर्टल की अभी ताजा स्थिति
ई – नाम पोर्टल को 14 अप्रैल 2016 को शुरू किया गया था जिसे अपडेट कर काफी सुविधाजनक बनाया गया है | पहले से ही 16 राज्यों और 2 केन्द्रशासित प्रदेशों में 585 मंडियों को ई – नाम पोर्टल पर एकीकृत किया गया है | इसके अतिरिक्त 415 मंडियों को भी ई–नाम से जल्द ही जोड़ा जाएगा | जिससे इस पोर्टल पर मंडियों की कुल संख्या एक हजार हो जाएगी | ई–नाम पर इन सुविधा के कारण किसानों, व्यापारियों व अन्य को मण्डियों का चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी | यह भी पढ़ें मुंजा घास एक ऐसी खरपतवार है जिसकी खेती कर आप लाखों रुपयें कमा सकते हैं ई-नाम पोर्टल से किसानों को होने वाले लाभ मूल्य स्थिरीकरण समय और स्थान उपयोगिता के आधार पर किसान आपूर्ति और मांग की तुलना करते हुए फायदे में रहेंगे | एफपीओ को बोली के लिए अपने आधार/संग्रह केन्द्रों से अपनी उपज अपलोड करने में सक्षम बनाया जा सकेगा | वे बोली लगाने से पहले उपज की कल्पना करने में मदद के लिए आधार केन्द्रों से उपज और गुणवत्ता मापदंडों की तस्वीर अपलोड कर सकते हैं | एफपीओ के पास सफल बोली लगाने के बाद मण्डी के आधार पर या अपने स्तर से उपज वितरण का विकल्प रहेगा | इन सबसे मंडियों में आवागमन कम होने से सभी को सुविधा होगी | परिवहन की लागत कम होगी तथा ऑनलाइन भुगतान की सुविधा मिलेगी |
सिंजेंटा ने शुरू की किसान हेल्प लाइन
प्रतिष्ठित कीटनाशक कम्पनी सिंजेंटा इण्डिया ने कोरोना के कारण जारी देशव्यापी लॉकडाउन में देशभर के किसानों की मदद के लिए सिंजेंटा किसान हेल्प लाइन नामक राष्ट्रव्यापी टेली सलाह सेवा शुरू की है। सूत्रों की मानें तो देश के सभी किसान सिंजेंटा किसान हेल्प लाइन नंबर 1800 -1-215 -315 पर लैंड लाइन या मोबाईल से कॉल कर मुफ्त में फसल संबंधी सलाह अथवा खेतीबाड़ी से जुडी कोई भी सूचना पा सकते हैं। किसानों के सवालों अथवा समस्या का जवाब सिंजेंटा के विशेषज्ञों की टीम देगी। ख़ास बात यह है कि नौ अलग -अलग भाषाओँ में कुल 16 चैनल तैयार किए गए हैं। उत्तर भारतीय राज्यों के लिए हिंदी चैनल भी उपलब्ध रहेगा।
उम्मीद की जा सकती है आगे आने वाले दिनों में इस दिशा में और भी पहल शुरू की जायेगी और किसान अपने—अपने स्तर भी छोटा—छोटा समूह बनाकर बड़े व्यापार का रास्ता बनायेंगे ताकि उनकी जिंदगी खुशहाल हो।



