गोविंद नारायण सिंह
बरेली: पेड़ पौधे हमारे जीवन का बिल्कुल वैसा ही आधार है जैसे भोजन और जल । हालांकि भोजन और जल भी अप्रत्यक्ष रूप से बहुत हद तक पौधों पर निर्भर है । आदिकाल से ही मानव पेड़ पौधों की अहमियत समझता था ,प्रकृति की अहमियत जानता था इसीलिए दुनिया में विकसित हर सभ्यता चाहें सिंधु सभ्यता हो या इनका मां मेसोपोटामिया या मिस्र ,सभी में प्रकृति की उपासना महत्वपूर्ण थी। विगत तीस चालीस सालों में बढ़ते शहरीकरण और जरूरतों के कारण पेड़ों का कटान हुआ साथ ही साथ नई पीढ़ी का लगाव भी पेड़ पौधों से लगाव कम हुआ।

आज पहली बात तो शहरों में अस्सी प्रतिशत लोगों के पास पेड़ पौधों के लिए जगह नहीं और ऊपर से भागमभाग जीवन में पौधों के नजदीक जाने का समय नहीं । इसके बाद भी मैंने पाया है कि लोग शौकिया अपनी बालकनी ,लान ,छत यहां तक कि दीवारों पर भी हैंगिंग गार्डन , वर्टिकल या मल्टीलेयर्ड प्लांटेशन के रूप में पौधे लगा रहे हैं । सीमेंट और मिट्टी के गमलों का चलन था ,छत पर इन गमलों को रखने से इन गमलों का स्वयं का वजन भी बहुत हो जाता था , इसके विकल्प के रूप में आज बढ़िया रंग बिरंगे विभिन्न आकारों के फाइबर के गमले बाजार में उपलब्ध है ,साथ ही HDPE grow bags भी जोकि लगभग भारहीन और मजबूत होते हैं ,यह गिरने से टूटते भी नहीं और पांच सात साल तक चलते हैं।
अगर हमारे पास छत है तो इन ग्रो बैग्स में हम घर की जरूरत भर की सब्जियां उगा सकते हैं जो ताजी और हानिकारक रसायनों से मुक्त होती है। घर में हम पुदीना , धनिया ,पालक , मेथी , सोया आदि लगभग आठ इंच गहराई के बैग्स में तथा हरी मिर्च , शिमला मिर्च ,बैंगन , टमाटर , भिंडी , मटर , गोभी तथा तरोई लौकी खीरा ककड़ी सीताफल और तरबूज खरबूज आदि एक फिट चौड़े या गोलाई के तथा डेढ़ फिट गहराई वाले गमलों में उगाए जा सकते हैं । इससे भी बड़े ग्रो बैग्स में आम लीची आदि तक उगाई जा सकती है । उपरोक्त के अलावा पीवीसी के आठ इंच व्यास वाले पाइप को तीन तीन या चार चार फिट के टुकड़ों में काटकर दोनों खुले सिरों पर कैप लगाकर पाइप में लंबाई में चार इंची पट्टी काटकर उसमें मिट्टी भरकर धनिया पुदीना पालक मेथी सोया लेटुस आदि के साथ साथ लहसुन और प्याज भी लगाया जा सकता है । लकड़ी के दो सपोर्ट पर तीन चार पांच लेयर्स में इन पाइप को रखा जा सकता है । पौधे बच्चों की तरह पालने होते हैं लेकिन यह बच्चों जैसा ही सुख देते हैं , पौधे स्ट्रेस रिलीवर का काम करते हैं ।इस भागमभाग जीवन में अगर हम आधा घंटा भी पौधों के साथ रहें तो तनाव दूर हो जाता है।

