Agriculture

…क्योंकि गांव ‘गढखेडा‘ तो दिल में है

गांव शब्द जब भी जेहन में आता है तो एक अजीब-सी रूमानियत दिल-दिमाग पर छा जाती है। इसलिए वर्षों पहले गांव ‘गढखेडा‘ छोड़ने के बाद आज भी रिश्ता बना हुआ है। यानी आज भी दिल में गांव बसता है। उसके प्रति लगाव, श्रद्वा बरकरार है।  गांव का नाम ‘गढखेडा‘ है, लेकिन बोलने की सुविधा के …

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पहाड़ के आंगन में जिंदगी का लोकेशन…. गांव उमसोफाई में अनीश रंजन के प्रयोग

एक बार तो मुझे लगा कि अनीश भाई (फिल्म निर्माता अनीश रंजन) पगला गए हैं। मुंबई की चकाचौंध भरी जिंदगी से दूर मेघालय के एक वीरान पहाड़ पर नया प्रयोग करने पहुंच गए। वह भी पहाड़ पर खेती करना। जिस पहाड़ तक पहुंचना मुश्किल है, वहां पर आधुनिक तरीके से बिना खाद और दवा के …

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सरकारी हस्तक्षेप के आगे दम तोड़ता गांधी का गांव को आत्मनिर्भर बनाने का सपना

गांव को लेकर महात्मा गांधी की कल्पना के मूल में था कि गांव को आत्मनिर्भर बनाना हैं, एक स्वायत्त इकाईं के रूप में विकसित करना है। मैं 2010 में जब मेघालय के उमसोफाई गांव में गया तो मेरे मन में यही बात थी। आदिवासी समाज में एक हद तक आत्मनिर्भरता है। बांस है उससे घर …

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ब्रांड और विज्ञापन के पीछे सरपट भागता गांव

मुन्नू से उसकी सखी केश्वरी का हाल पूछा। उसने बताया कई सालों से उसकी भेंट नहीं हुई है। मैंने उसके घर चलने को कहा। वह उदास हो गयी। अब मियांटोली में लोगों का आना जाना कम हो गया है। जबसे नयी सरकार आयी है सबके अंदर हिंदू मुस्लिम की भावना घर कर गयी है। अब …

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छप …छप . .. छप …..चूं चर मर ..क्यों विलुप्त हो रहे हैं गांव के परंपरागत कुएं

गांव के परंपरागत कुएं पर ढेंकुल चलाने का दृश्य आंखों के सामने आज भी चमक उठता है। बल के एक झटके  से युवक  बरहा  को खींचकर कूंड़ को कुंवे के जल में डुबोते थे। फिर एक झटके के साथ उसे ऊपर लाते थे और कुएं की जगत पर रखे पुआल के लादी पर कूंड़ को …

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गांव के सामाजिक ताने-बाने में रसूख का संकेत भी देते थे परंपरागत कुंवे

यदि गांव अपना एक विश्व है जिसमें सदियों की सभ्यता और सांस्कृतिक विकास का समुच्चय संचित हुआ दिखता है तो परंपरागत कुंवे के आसपास का सामाजिक आर्थिक ताना-बाना लघु विश्व। इस लघु विश्व में  हर व्यक्ति का अपना अलग अनुभव संचित है। प्रस्तुत है मेरे गांव के कुंओं की कहानी और उससे जुड़ा सामाजिक, वैयक्तिक …

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मधुमक्खी पालन से होगी लाखों की कमाई, 16 सितंबर से शुरू होगा विशेष प्रशिक्षण

पंकज साहू प्रयागराज: कृषि और किसान इस देश की आत्मा हैं। हों भी क्यों न देश की ​अधिकांश आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है और ऐसे में जब किसी चीज पर निर्भरता होती है तो दबाव भी होता है। हमारे अन्नदाता दबाव में न आयें इसलिए जरूरी है कृषि के साथ कृषि से जुड़े …

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सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन के विकास के लिए अभियान शुरू किया

देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में विविध पर्यटक आकर्षण मौजूद हैं और क्षेत्र का हर राज्य की अपने आपमें एक अलग पहचान है। पर्यटन मंत्रालय पूर्वोत्तर राज्यों में पर्यटन के विकास और उसे बढ़ावा देने पर विशेष बल दे रहा है। क्षेत्र में किसी विशिष्ट पर्यटक स्थल या गंतव्य के समुचित विकास के लिए पर्यटन मंत्रालय …

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कृषि शिल्पियों से समृद्ध खेती

देश के निर्माण में शिल्पकार की बहुआयामी भूमिका होती है। इसलिए यदि कृषि और कृ​षकों को बचाना है तो कृषि यंत्र निर्माण करने वाले ग्रामीण कारीगरों को भी सशक्त करना होगा।चाहे कोई भी व्यक्ति हो या परिवार या देश, उसकी प्रगति का मौलिक तत्व उसके नैसर्गिक स्वभाव और प्रकृति में निहित होता है। भारत की …

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कृष्यै त्वा क्षेमाय त्वा रम्यै त्वा पोषाय त्वा

कमलेश कुमार सिंह पटना: मौजूदा दौर में गांव और किसानों के हालात। इसके लिए दो बातें। पहली बात आदी काल की। उसके बाद, बात वर्तमान परिदृश्य की। पहले बात, पुरानी। आदी काल में भारत में यह मान्यता रही है कि गांव एक स्वावलंबी और आत्मनिर्भर इकाई के रूप में विकसित हों। प्रारंभ से ही भारतीय …

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