सिविल सेवा 2019 का अंतिम परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया। प्रत्येक वर्ष की भांती इस वर्ष भी कुछ परिवारों में हर्ष तो कहीं विषाद, किसी को सफलता मिली तो किसी को तैयारी जारी रखने का हौसला। कहा भी गया कि सफलता और असफलता के बीच एक पतली सी लकीर होती है यानी कुछ लोग लकीर के इस पार आ गये हैं। ऐसे में पंचायत खबर गांव गंवई के प्रतिभाओं के लिए एक सीरीज प्रस्तुत कर रहा है जिसके जरिए हम लकीर के इस पार आ गये सफल लोगों की कहानियां कहेंगे जिससे ग्रामीण युवाओं को प्रेरणा मिल सके तो आईये इस कड़ी में आज हम दो सफल छात्रों की चर्चा करेंगे जिनके नाम की वजह से लोगों के अंदर कंफ्यूजन है दोनों का नाम प्रदीप सिंह है।
संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: संघ लोग सेवा आयोग के परीक्षा परिणाम आने के बाद ग्रामीण पृष्टभूमि से इस मुकाम तक पहुंचे दो प्रतिभागियों जिनका नाम प्रदीप सिंह है एकबारगी युवाओं के बीच चर्चा और कंफूयजन का कारण बन गये। वजह थी इन दोनों को सफलता मिली थी और ये दोनों पहले भी सिविल सेवा के लिए चयनित हुए थे। दोनों के रैंकिंग में भले ही अंतर हो लेकिन दोनों ही ग्रामीण परिवेश से निकल कर इस मुकाम तक पहुंचे है। एक के पिता गांव के सरपंच और पेशे से किसान रहे हैं तो दूसरे के पिता पेट्रोल पंप नौकरी कर अपने पुत्र को इस मुकाम तक लाने में कामयाबी पाई है। एक अंतर यह है कि एक हरियाणा का रहना वाला है तो दूसरा बिहार का।

चर्चा करते हैं हरियाणा के प्रदीप सिंह की
हरियाणा के सोनीपत तेवड़ी गांव के किसान व पूर्व सरपंच सुखबीर सिंह मलिक के पृत्र प्रदीप सिंह ने यह कभी नहीं सोचा था कि वे सिविल सेवा परीक्षा 2019 में टॉप करेंगे जब यूपीएससी का परिणाम आया तो उस समय प्रदीप सिंह घर में आराम कर रहे थे और उस समय ही उनके पास दोस्त का फोन आया कि परिणाम आ गया है और वह टॉपर बन गए हैं। प्रदीप सिंह को विश्वास नहीं हुआ है और वह खुद अपना परीक्षा परिणाम देखने लगे। अपना परीक्षा परिणाम खुद देखने के बाद भी कुछ देर तक उनको लगा कि वह कोई सपना देख रहे हैं, लेकिन वह कोई सपना नहीं था, बल्कि सबकुछ सच था। पूरी तरह से आश्वस्त होने के बाद जब प्रदीप ने अपने पिता को फोन किया जब वो अपने गांव तेवड़ी गए हुए थे। पुत्र के परीक्षा परिणाम के विषय में फोन कर बताया कि वह पास हो गया है तो पिता ने सबसे पहला सवाल पूछा कि कितना रैंक आया है। जिसपर प्रदीप ने सीधा जवाब नहीं दिया और कहा कि आपको मुझसे क्या उम्मीद थी। जिसपर पिता ने कहा कि उनको लगता है कि वह आईएएस बन जाएगा और उसकी इतनी रैंक जरूर होगी। जब प्रदीप सिंह ने पिता को बताया कि उसकी नंबर वन रैंक है तो पिता सुखबीर सिंह को खुद भी विश्वास नहीं हुआ। प्रदीप के पिता सुखबीर सिंह ने बताया कि वह चाहते थे कि उनका बेटा अच्छी रैंक लेकर आए, जिससे उसको हरियाणा कैडर मिल जाए। लेकिन उसने काफी मेहनत करके उम्मीद से कुछ ज्यादा ही उनको दिया है।
यह सुनते ही प्रदीप की तरह पिता को भी विश्वास नहीं हुआ। उनका सपना पूरा हुआ क्योंकि प्रदीप की तरह वह भी सोचते थे कि यदि बेटा आईएएस बन जाए और होम कैडर मिल जाये यानी हरियाणा में काम करने का मौका मिले तो बहुत अच्छा रहेगा। प्रदीप कहते है कि मेरे पिताजी मेरे लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। एक बार जब मैं जॉब करता था तो मुझे लगा कि मैं जॉब करते हुए नहीं कर पाऊंगा। उन्होंने मुझे प्रेरित किया. उन्हीं की प्रेरणा से मैंने दोबारा तैयारी शुरू की। मेरी कामयाबी में सबसे बड़ा हाथ मेरे पिताजी का है।

प्रदीप के लिए यह एक सपने के साकार होने जैसा है। यह सुखद आश्चर्य है। मैं हमेशा आईएएस अधिकारी बनना चाहता था । मैं समाज के कमजोर वर्गों के लिये काम करना चाहूंगा।” भारतीय राजस्व सेवा के 2019 बैच के अधिकारी 29 वर्षीय सिंह अभी फरीदाबाद में राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर एवं नार्कोटिक्स अकादमी में पर्यवेक्षण पर हैं। उन्होंने कहा कि उनका जोर शिक्षा और कृषि क्षेत्र को बेहतर बनाने पर होगा क्योंकि वे भारतीय प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनेंगे। सिंह ने कहा, मैंने आईएएस के लिए प्रदेश कैडर के रूप में अपने गृह राज्य हरियाणा को चुना है। मुझे खुशी है कि मुझे अपने राज्य के लिये काम करने का अवसर मिलेगा। ” उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए छुट्टी ली थी।

उल्लेखनीय है कि सोनीपत के शंभूदयाल स्कूल से 10वीं व 12वीं करने वाले प्रदीप सिंह ने मुरथल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। 2015 में कोर्स पूरा होते ही इनकम टैक्स विभाग में इंस्पेक्टर बन गए। इंस्पेक्टर बनने के बाद भी प्रदीप को पिता सुखबीर ने आईएएस बनने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रदीप के लिए नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी करना किसी चुनौती से कम नहीं था।
इसके बावजूद प्रदीप ने नौकरी करते हुए समय निकालकर यूपीएससी की तैयारी की और पहले दो प्रयासों में प्री भी पास नहीं करने के बावजूद वह लगे रहे। प्रदीप ने पिछले साल यूपीएससी में 260वीं रैंक हासिल की, लेकिन आईएएस बनने के लिए दोबारा से तैयारी करके परीक्षा दी। जिसका नतीजा रहा कि अब प्रदीप पूरे देश में यूपीएससी टॉपर बन गए।
अब बात बिहार के प्रदीप की
हरियाणा के प्रदीप सिंह की तरह बिहार के प्रदीप सिंह भी बहुत ही सामान्य परिवार से आते हैं। जब यूपीएससी 2019 का परीक्षा परिणाम आया और मीडिया में यह बात आई कि प्रदीप सिंह टॉपर हैं तो कई लोगों को लगा 2018 के परीक्षा परिणाम आने के बाद एक अंक से आईएएस बनने से चूक गये प्रदीप सिंह ने सिविल सेवा परीक्षा 2019 में टॉप किया है। लेकिन कहानी कुछ दूसरी थी।

गोपालगंज के मूल निवासी हैं प्रदीप
बिहार के गोपालगंज जिले के मूल निवासी प्रदीप सिंह ने 26 वां स्थान प्राप्त कर सफलता पाई है। वो फिलहाल इंदौर में रह रहे हैं। पिछली बार की सिविल सेवा परीक्षा में प्रदीप ने 93वां रैंक हासिल किया था। उनका आईएएस सिर्फ एक नंबर से छूट गया और उन्हें IRS के लिए चुना गया। प्रदीप कहते हैं कि उन्हें 70 से ऊपर के रैंक और आईएएस बनने की चाहत थी और इसीलिए उन्होंने 2019 में फिर से परीक्षा दी। इस बार उनकी मेहनत ऐसी रंग लाई कि उन्होंने 26वां स्थान हासिल कर लिया। प्रदीप सिंह 1991 से ही पिता के साथ इंदौर में रह रहे हैं। बेटे के इस सफलता से प्रदीप की मां बहुत खुश हैं और उन्होंने कहा कि बेटे की इस कामयाबी ने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है और वो अपने पुत्र की सफलता से बेहद खुश हैं।

गुदड़ी के लाल ने मेहनत से पूरा किया सपना
प्रदीप की कहानी उस प्रतिभाशाली छात्र की कहानी है जो हर तरह की परेशानी झेल विपरीत परिस्थिती होने के बावजूद भी सफल होने की जिद करता है और पिता के सहयोग से उस मुकाम को प्रापत करने में सफलता पाता है। देशभर में 26वां स्थान हासिल करने वाले इंदौर के प्रदीप सिंह के पिता मनोज सिंह सालभर पहले तक यहां एक पेट्रोल पम्प पर नौकरी करते हुए वाहनों में पेट्रोल-डीजल भरते थे, लेकिन परिवार के संघर्ष के गवाह रहे उनके बेटे ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बनने का सपना बचपन से ही संजो रखा था। गुदड़ी के इस लाल ने अपने दूसरे प्रयास में केवल 23 साल की उम्र में इस सपने को सच कर दिखाया।

प्रदीप अपने संघर्ष को याद करते हुए कहते हैं कि कॉलेज की पढ़ाई तक उनके परिवार का जीवन संघर्षों से भरा था। उनके पिता मनोज सिंह शहर के एक पेट्रोल पंप पर काम करते थे और उनकी तनख्वाह परिवार के खर्चों के मुकाबले कम पड़ती थी। बावजूद इसके मैंने “कक्षा सात से ही ठान लिया था कि मुझे एक दिन आईएएस अफसर बनना है। स्नातक की पढ़ाई तक मेरा यह संकल्प और मजबूत हो गया। मैंने स्कूल से लेकर कॉलेज तक इसी लक्ष्य के मुताबिक तैयारी की है। “
महाकाल के आर्शीवाद से मिली सफलता
मात्र 23 साल की उम्र में इस मुकाम तक पहुंचने वाले प्रदीप सिंह के पिता मनोज सिंह ने बताया कि उन्होंने 28 वर्ष तक शहर के देवास नाका क्षेत्र में पेट्रोल पम्प में नौकरी के बाद सालभर पहले ही खुद का छोटा-सा ट्रांसपोर्ट कारोबार शुरू किया है। सिविल सेवा परीक्षा में बेटे की कामयाबी से प्रसन्न पिता ने कहा, “बाबा महाकाल (नजदीकी उज्जैन शहर स्थित भगवान शिव का महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग) की कृपा से मेरा बेटा आईएएस अफसर बन गया है।” उल्लेखनीय है कि प्रदीप सिंह के पिता मनोज सिंह ने बेटे को पढ़ाने के लिए अपने गांव की जमीन के साथ मकान भी बेच दिया ताकी उनकी पढ़ाई पूरी हो सके। वे बताते हैं कि उनके दो बेटे हैं बड़े बेटे संदीप ने एमबीए किया है जबकी प्रदीप आईएएस बन गया।
वहीं प्रदीप अपने पिछले प्रयास के विषय में बताते हैं कि मैंने सिविल सेवा परीक्षा 2018 में अपने पहले प्रयास में देशभर में 93वां स्थान हासिल किया था। हालांकि, मैं आईएएस अफसर बनने से केवल एक स्थान से चूक गया था। और मुझे भारतीय राजस्व सेवा मिला। इस बार और मेहनत की और वे अपना सपना पूरा करने में कामयाब हुए।