यूपीएससी 2019 : सीवान की ऋचा रत्नम ने हिंदी माध्यम से पायी सफलता

सिविल सेवा 2019 का अंतिम परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया। प्रत्येक वर्ष की भांती इस वर्ष भी कुछ परिवारों में हर्ष तो कहीं विषाद, किसी को सफलता मिली तो किसी को तैयारी जारी रखने का हौसला। कहा भी गया कि सफलता और असफलता के बीच एक पतली सी लकीर होती है यानी कुछ लोग लकीर के इस पार आ गये हैं। ऐसे में पंचायत खबर गांव गंवई के प्रतिभाओं के लिए एक सीरीज प्रस्तुत कर रहा है जिसके जरिए हम लकीर के इस पार आ गये सफल लोगों की कहानियां कहेंगे जिससे ग्रामीण युवाओं को प्रेरणा मिल सके तो आईये इस कड़ी की शुरूआत करते हैं बिहार के सीवान की रहने वाली ऋचा रत्नम से जिन्हें 274 वां स्थान हासिल हुआ है।
संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली:संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी यानी वो मुकाम जहां पहुंचने की चा​हत बिहार उत्तर प्रदेश के ज्यादातर युवाओं को होती है। कुछ इसी तरह सपना संजोये बिहार के पैतृक गांव सीवान जिले के आंदर प्रखंड के खेड़ाय में स्थित अपने पैतृक गांव से ऋचा रत्नम ने दिल्ली वालों की शहर दिल्ली की ओर रूख किया था। सालो साल गुजरते प्रयास दर प्रयास के बावजूद कभी पीटी में सफलता मिलती तो कभी मेंस के द्वार पर आकर कदम ठिठक जाते। लेकिन बावजूद इसके ऋचा ने हौसला नहीं हारा। और उसी मजबूत ईरादे का परिणाम है आज जब यूपीएससी 2019 का फाईनल परीक्षा परिणाम आया तो गांव से महानगर की ओर बेहतर भविष्य का सपना संजोये सफर को निकली ऋचा 274वां स्थान हासिल हुआ है। बड़ी बात ये हैं कि ऋचा ने इंजीनियरिंग बैकग्रांउड के बावजूद हिंदी माध्यम से परीक्षा में सफलता पायी है। परीक्षा में उनका मुख्य विषय इतिहास था और ऋचा को यह सफलता पांचवें प्रयास में हासिल हुआ है।

 

जेपी विश्वविद्यालय में इतिहास के विभागाध्यक्ष रहे हैं पिता

ऋ़चा सीवान के जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा में इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष डाॅ शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव की बेटी हैं। डाॅ श्रीवास्तव राजेंद्र काॅलेज, छपरा में भी इतिहास विभाग के अध्यक्ष रहे हैं। ऋचा की माता शशिकला श्रीवास्तव गृहिणी हैं। इनका पैतृक गांव सीवान जिले के आंदर प्रखंड के खेड़ाय में है। उनका पूरा परिवार पढाई से जुड़ा रहा है।ऋचा रत्नम ने आरंभिक शिक्षा सीवान के महावीर सरस्वती विद्या मंदिर से प्राप्त किया था। वहीं से उन्होंने सीबीएसइ बोर्ड से दसवीं व बारहवीं की पढाई पूरी की और फिर जयपुर स्थित विवेकानंद इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाॅजी कंप्यूटर साइंस में बीटैक किया।
सेल्फ स्टडी से पाई सफलता
ऋचा 2014 से सिविल सर्विस की तैयार कर रही थीं। वे वर्तमान में अपने बड़े भाई कुणाल किशोर के साथ दिल्ली में रह कर तैयारी कर रही थीं। उन्होंने कभी भी फूल टाइम कोचिंग कहीं से नहीं की। हालांकि दिल्ली के फोरम आइएएस से गाइडेंस व टेक्स्ट स्टडी मैटेरियल लिया। वे कहती हैं कि सीसैट लागू होने से हिंदी माध्यम वालों के लिए परीक्षा थोड़ी टफ हुई है, लेकिन रणनीतिक ढंग से पढाई करने पर यह बहुत मुश्किल नहीं है। वे सिविल सर्विस की परीक्षा देने वालों को यह संदेश देती हैं कि वे सीसैट की भी तैयारी कर लें, उससे डरने की जरूरत नहीं है।

हिंदी माध्यम में है चुनौती

ऋचा रत्नम कहती हैं कि हिंदी में अच्छी अध्ययन सामग्री की कमी है. द हिंदू जैसा अखबार भी नहीं है। उन्होंने बताया कि वे अध्ययन सामग्री अंग्रेजी का ही पढती थीं। वीडियो फार्मेट में वे उन्हें सुनती व देखती थीं। वे इग्नू का लैक्चर आॅनलाइन सुनती थीं. उनका कहना है कि आठ से दस घंटे की नियमित पढाई यूपीएससी की परीक्षा के लिए पर्याप्त है। पढाई में नियमितता जरूरी है. जब आप तैयारी कर रहे हों तो पर्व-त्यौहार व सामाजिक आयोजन में आपको अपना समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं है।

आध्यात्म में है गहरी रूची
ऋचा रत्नम आध्यात्म से भी जुड़ी हैं. वे अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता व ईश्वर को देती हैं। ऋचा रत्नम यूपीएससी की तैयारी के दौरान मानसिक तनाव को कम करने के लिए एसएन गोयनका के बताए गए विपस्यना के तरीकों का भी आजमाती थीं। ऋचा रत्नम ने बताया कि यूपीएससी में चयनित होने के बाद प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी के रूप में समाज के निचले तबके लिए बेहतर काम करना चाहती हैं।

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