Panchayat Report Card

बिहार में जन वितरण प्रणाली-चुनौतियाँ और सुधार की ज़रूरतें

 अनिन्दो बनर्जी और प्रतिमा कुमारी पासवान पटना: कोविड-19 महामारी के नियंत्रण के लिए देशभर में लागू किये गये लॉकडाउन तथा अन्य पाबंदियों की स्थिति में जन वितरण प्रणाली एक अद्वितीय जीवनरक्षक व्यवस्था के रूप में सामने आई है। दूसरे विश्वयुद्ध के समय से भुखमरी की रोकथाम के लिए चलाई जा रही यह व्यवस्था वर्ष 2013 …

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सात दिन के अंदर बनाना होगा राशन कार्ड,लाखों परिवारों को मिलेगा लाभ

अमरनाथ झा पटना:गरीबों को सस्ते दर पर अनाज देने की सरकारी योजनाओं की ढ़ोल चाहे जितनी पीटी जाए, लेकिन अक्सर भूख से मरने की खबरें भी आती रहती हैं। इसका कारण है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सत्ते दर पर अनाज पाने के लिए जिस राशन कार्ड की जरूरत होती है, वह गांवों के …

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तेलिहार पंचायत के लोगों से प्रधानमंत्री का संवाद, जिन्होंने शहर संवारा वही संवारेंगे गांव

मंगरूआ नयी दिल्ली: कारोना महामारी देश के विकसित राज्यों से लाखों की संख्या में बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओड़ीसा और पश्चिम बंगाल तमाम परेशानियों के साथ बाल—बच्चों सहित गांव लौटने का दृश्य किसे नहीं भावुक कर गया होगा लेकिन आज मौका था इन गरीबों के जख्मों पर मरहम लगाने का। कुछ इसी तरह के भाव …

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प्रति पंचायत 41 लाख रूपये के बजटीय आवंटन से सवरेंगी बिहार की ग्राम पंचायतें

कमलेश कुमार सिंह पटना: कोरोना महामारी के दौरान पंचायतों की महत्ती भूमिका से शायद ही किसी को इंकार होगा। प्र​वासियों के क्वारंटाईन से लेकर अनाज वितरण तक और अब मनरेगा व हर घर नल के जल योजना के अंतर्गत बाहर से गांव लौटे ग्रामीणों के जीविका के साधनों की व्यवस्था करने में पंचायतें अहम भूमिका …

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मनरेगा को दुरुस्त किया मोदी सरकार ने

नरेंद्र सिंह तोमर यह किसी से छिपा नहीं कि सोनिया गांधी की संप्रग सरकार का जहां भी हाथ पड़ा, वह चौपट ही हो गया। जिस किसी भी चीज को उसने छुआ, उसमें या तो भ्रष्टाचार व्याप्त हो गया या वह पूरी तरह बेअसर होकर रह गई या फिर उसमें दोनों ही दोष आ गए। मनरेगा …

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यह वक्त कांग्रेस बनाम बीजेपी का नहीं बल्कि लोगों के जीवन को बचाने का है

सोनिया गांधी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून, 2005 (मनरेगा) एक क्रांतिकारी और तर्कसंगत परिवर्तन का जीता जागता उदाहरण है। यह क्रांतिकारी बदलाव का सूचक इसलिए है क्योंकि इस कानून ने गरीब से गरीब व्यक्ति के हाथों को काम व आर्थिक ताकत दे भूख व गरीबी पर प्रहार किया। यह तर्कसंगत है क्योंकि यह …

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कोरोनाकालीन संकट के बीच रामभरोसे चल रहा है जीवन, सबसे ज्यादा प्रभावित हैं बच्चे

संतोष कुमार सिंह राइट टू एजुकेशन (आरटीई) फोरम द्वारा 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के अधिकारों की अनदेखी एवं मौजूदा दौर की चुनौतियों पर आयोजित वेबिनार में वक्ताओं की राय नयी दिल्ली: कोविड—19 महामारी के दौरान सरकार ने लॉक डाउन की घोषणा की। स्वाभाविक रूप से सरकार ने जब ऐसा किया होगा तो …

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मनरेगा को पुनर्जीवित किए जाने के साथ ही व्यापक सुधार की है दरकार

प्रो डॉ अश्विनी कुमार ‘कांग्रेस सरकार की विफलता का तथाकथित जीवित स्मारक’ बताया जाने वाला प्रतीक कोरोना संक्रमण के दौरान हुए राष्ट्रीय लॉक डाउन से प्रभावित लाखों प्रवासियों की दुर्दशा को कम करने और इससे प्रभावित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आयाम देने के लिहाज से एक बार फिर अपने उदात्त स्वरूप में बिना किसी भेदभाव …

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बदला-बदला सा दिखता है मेरा गांव

आशुतोष कुमार सिंह मां के बाद अगर कोई सबसे सुन्दर शब्द है तो वह है गांव। गांव की चर्चा होते ही रोम-रोम पुलकित हो उठता है। आम, महुआ, जामुन, कटहल, बेर, पीपल एवं नीम के पेड़ों के संग की दोस्ती याद आने लगती है। आंगन में गौरइयों की चहकती आवाज हो अथवा फूदक-फूदक कर चलने …

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बदलकर भी नहीं बदला मेरा गाँव

डाॅ पवन कुमार सिंह दुहाई कोशिका महरानी, बाल बच्चा के जान बकस दे मइया, बाढ़ में दूध चढ़ैबो अरु दुहाई हे कोशिका महरानी, बाल बुतरू के जान बकस दे माय, भादो में दूध चढ़ैबो आरु माघी पूर्णिमा में पाठी देबौ गे माय। बाबा कहा करते थे कि कोसी को पक्का घर नहीं सुहाता। इसके दोनों …

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