नदी संरक्षण

गांधी के चंपारण सत्याग्रह का साक्षी रहा पूर्वी चंपारण के ऐतिहासिक तेतरिया गांव का जल आॅडिट

शैल मुजफ्फरपुर से 45 किलोमीटर दूर पूर्वी चंपारण जिले यानी मोतिहारी में स्थित ऐतिहासिक तेतरिया गांव। बिहार के अन्य गांवो की तरह ही इस गांव में अलग-अलग जाती-वर्ण के लोग रहते हैं। 22 टोला का गांव तेतरिया,अलग-अलग टोलों की अलग-अलग आबादी। कुल मिलाकर तेतरिया पंचायत की आबादी 21,000 हजार है और लगभग 8000 मतदाता हैं। …

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बारह वर्ण, 22 टोले में बसा है मुजफ्फरपुर जिले का जारंग पश्चिमी पंचायत.. हरेक जाती के टोले में अलग-अलग कुआं

अमरजीत पासवान गायघाट: मुजफ्फरपुर जिले का असिया गांव। यह गांव गायघाट प्रखंड के जारंग पश्चिम पंचायत में है। यदि पूरे पंचायत को केंद्र में रखकर परंपरागत जल स्रोतों मसलन, कुएं,तालाब, पोखर, मन यानी न​दी जैसे साधनों का जल आडिट आपके सामने रखूं तो सबसे पहले जारंग पश्चिमी पंचायत के से जुड़े गांवों की चर्चा समीचिन …

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सरकार ने जल संसाधन के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच सहयोग को मंजूरी दी

जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग तथा जापान के भूमि, आधारभूत संरचना, परिवहन और पर्यटन मंत्रालय के जल और आपदा प्रबंधन ब्यूरो के बीच सहयोग को लेकर एक करार किया गया। इसके तहत दोनों देशों के बीच सूचना, ज्ञान, प्रौद्योगिकी और विज्ञान आधारित अनुभव के आदान-प्रदान को बढ़ाने के …

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देश का पहला गाँव, जिसके हर घर में सोलर इंडक्शन पर पकता है खाना

मंगरूआ मध्यप्रदेश के बैतूल जिले का एक छोटा-सा अनुसूचित जनजाति (शेड्यूल ट्राइब) बाहुल्य गाँव है- बाचा। आजकल यह छोटा-सा गाँव अपने बड़े नवाचारों के कारण चर्चा में बना हुआ है। वर्ष 2016-17 से बाचा ने बदलाव की करवट लेनी शुरू की। आज बाचा न केवल मध्यप्रदेश बल्कि भारत के सभी गाँवों के लिए प्रेरणा स्रोत …

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लॉक डाउन में गंगा हुई निर्मल, कृष्ण लीला का ग्वाह बनी यमुना भी हुई साफ

आलोक रंजन,युवा पत्रकार बनारस: सुन्दर सुभूमि भैया भारत के देशवा से, मोरे प्रान बसे गंगा धार रे बटोहिया. गंगा रे जमुनवा के झगमग पनिया से, सरजू झमकि लहरावे रे बटोहिया. ब्रह्मपुत्र पंचनद घहरत निशिदिन, सोनभद्र मीठे स्वर गावे रे बटोहिया. अपर अनेक नदी उमडि घुमडि नाचे, जुगन के जदुआ चलावे रे बटोहिया। इस कोरोना महामारी …

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पानी से आर्सेनिक हटाने में मददगार हो सकते हैं कृषि अपशिष्ट

शुभ्रता मिश्रा भारतीय वैज्ञानिकों ने कृषि अपशिष्टों के उपयोग से ऐसे जैव अवशोषक बनाए हैं, जो प्रदूषित जल से आर्सेनिक को सोखकर अलग कर सकते हैं। वाराणसी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) और लखनऊ स्थित अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा एक ताजा अध्ययन के दौरान विकसित इन अवशोषकों को तैयार करने में अमरूद …

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