
- मकर संक्रांति (Makar Sankranti) पर्व देता है पर्यावरण संरक्षण का संदेश – पॉलिथीन मुक्त गंगा का आह्वाण
वाराणसी: मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के पर्व पर धार्मिक नगरी काशी में लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान करने आते हैं। भीड़ की वजह से घाटों के अलावा गंगा में भी गंदगी काफी बढ़ जाती है। जिसके मद्देनजर namami gange नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला के नेतृत्व में सदस्यों ने 14 जनवरी शनिवार को दशाश्वमेध और राजेंद्र प्रसाद घाट पर उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच यह अपील किया कि गंगा में पॉलिथीन, धार्मिक तस्वीरें, कपड़े, माला फूल आदि न डालें।
मकर संक्रांति पर नदी को रखें स्वच्छ
लाउडस्पीकर से हजारों की संख्या में मकर संक्रांति पर उपस्थित श्रद्धालुओं को गंदगी और पॉलिथीन से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताया गया। संयोजक राजेश शुक्ला ने लोगों को सजग करते हुए बताया कि पॉलिथीन के इस्तेमाल को बंद करके ही हम गंगा व काशी को स्वच्छ बना सकते है।
पर्यावरण संरक्षण की सीख देता है मकर संक्रांति
मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण की सीख भी देता है। भारत में जीवन के समग्र ताने-बाने का केंद्र गंगा है। हमें गंगा का संरक्षण करना चाहिए। सभी को पॉलिथीन का प्रयोग न करने हेतु संकल्पित किया गया। इस दौरान महानगर संयोजक शिवदत्त द्विवेदी मौजूद रहे। उन्होंने बताया अक्सर श्रद्धालु स्नान करने आते तो है, साथी ही घर से माला फूल पॉलिथीन में भर कर लाते हैं। उसको गंगा में फेंक देते है। उनसे अपील है, वो ऐसा न करे। सभी मां गंगा को स्वच्छ रखने की अपनी जिम्मेदारी को समझे।



