आलेख

दुनिया देखा… पर हर पल सीने में धड़कता रहा है गांव सरोत्तर…

राकेश पांडे, सीएमडी ब्रावो फार्मा व ब्रावो फाउंडेशन नैनों में था रास्ता… हृदय में बसा है गांव साकार होगा जरूर गांव सरोत्तर के तरक्की का सपना..भले छलनी हो जाए पांव!  तो आईए आपको अपने गांव सरोत्तर की ओर लिए चलता हूं।  मोतिहारी का सरोत्तर गांव। आप कह सकते हैं कि हमारा गांव सरोत्तर बाबू साहब …

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गांव सिरिसिया…आर्थिक संपन्नता से पैदा हुए अभिमान ने गंवई स्वाभिमान को ढ़क दिया

भानु प्रताप सिंह मेरा गांव सिरिसिया बिहार राज्य के आरा जिला में बबुरा के नजदीक गंगा किनारे का गांव है। ग्रामीण जीवन का आधार सरकार मुक्त जीवन जीने की कला पूर्वजों द्वारा संस्कारित था। हर अपने से छोटों को आचार,विचार, व्यवहार निस्वार्थ भाव से न्योछावर कर देता था, जिससे गांव के युवक युवतियां समाज के …

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विस्थापन का दर्द दिल में लिए…गांव से जुड़ा ही रहा मेरा रिश्ता

अंजनी कुमार फिल्म /टी.वी निर्देशक मेरा जन्म मुंगेर जिले के सहूर गांव में हुआ। ये गांव पंडित कार्यानद शर्मा के गांव के रूप में जाना जाता है। यहीं उनका जन्म हुआ था। मेरी मां श्रीमती ज्योतसना शर्मा और पिता श्री धनंजय सिंह दोनो ही शिक्षक थे। बचपना के बाद मां के तबादले के हिसाब से …

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गांव का नाम, बफापुर बांथू… जिला…लोकतंत्र की जननी वैशाली

मेरा गांव कब आबाद हुआ ये तो ठीक-ठीक कहीं दर्ज नहीं है। लेकिन मेरे गांव का नाम बहुत दिलचस्प है: बफापुर बांथू। बफापुर को लेकर गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस गांव से जो लगान वसूलते थे वो मुस्लिम थे। बहुत पहले की बात है। अगला शब्द है, बांथू। इसके लिए वो कहते हैं …

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मेरा गांव सजांव… पुरखों ने एक संसार रचा था, हम पूरी शिद्दत से उसे उजाड़ रहे हैं

शिवानंद द्विवेदी मेरा गांव सजांव बिहार सीमा से सटे पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में पड़ता है। मुझे गांव में रहने का ऐसा अवसर शायद बीस साल बाद मिला है। आजकल ‘आपदा में अवसर’ चलन में है। कोरोना नामक इस अदृश्य परिजिवी ने हमें आपदा के अंतहीन लगने वाले दौर में बांध दिया है। …

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विश्व साइकिल दिवस….साइकिल के सहारे कोरोना को मात

अमरनाथ झा आज विश्व साइकिल दिवस है। कहते हैं कि हर आपदा अपने साथ अवसर लाती है।  हर बुराई के साथ कुछ अच्छाई भी आती है। कोरोना-काल में साइकिल का प्रचलन में आना ऐसी ही अच्छाई है। आपदा के दौरान भी एक अवसर छुपा हुआ है। कोरोना जनित लॉक डाउन के खुलने के बाद साइकिल …

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सोहवलिया-मेरा गांव मेरा देश

विद्युत प्रकाश मौर्य सोहवलिया मतलब मेरा गांव मेरा देश। बिहार के रोहतास जिले के करगहर प्रखंड का एक गांव। वह गांव जिसमें मेरे बचपन के शुरुआती छह साल गुजरे। गांव से दूर हो गया हूं। दिल के एक कोने में हमेशा गांव की स्मृतियां जवां रहती हैं।                  …

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सरिसब-पाही गांव का मूल खाका नहीं बदला

डाॅ प्रवीण झा सरिसब-पाही  गांव की कहानी लिखना कठिन है क्योंकि उसका नायक तो ग्राम ही है जिसका हजारों वर्षों का इतिहास है, उस काल-खंड के एक बिंदु पर हम खड़े हैं तो महज अपनी कहानी ही लिखी जा सकती है। लेकिन गांव की एक खासियत होती है कि वह अपनी कहानी पीढ़ी-दर-पीढ़ी कहता रहता …

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पर्यावरण प्रेरक सुन्दरलाल बहुगुणा का निधन इस देश की बड़ी हानि है

जलपुरुष राजेन्द्र सिंह भारत में पर्यावरण चेतना अभियान के जनक सुन्दरलाल बहुगुणा जी का 21 मई 2021 को, 12 बजकर 30 मिनट पर उनका शरीर आत्मा से अलग हुआ। इन्होंने हिमालय की बहिनों की पर्यावरण चेतना को चिपको आंदोलन के रूप में दुनिया को बताया। पहाड़ की बहिनें अपने मायके के जंगल को बचाने हेतु …

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कर्णांवती नदी के कछार पर बसा ऐतिहासिक गांव बैसपुर

डॉ सरिता प्रयागराज: देश के प्रमुख धार्मिक केंद्र विन्ध्याचल क्षेत्र में गहरवार राजपूतों की स्टेट विजयपुर के निकट कर्णांवती नदी बहती है। कर्णांवती नदी विन्ध्याचल से थोड़ा पहले 96 हजार एकड़ में फैले गंगा के विशाल कछार से होकर गंगा में ही समाहित हो जाती है। कर्णांवती केवल नदी ही नहीं,बल्कि यहां के 19 गांवों …

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