आलेख

ग्राम आर्थिक दृष्टि से समृद्ध हुए… लेकिन टूटी है सामाजिक एकजुटता

प्यारे मोहन त्रिपाठीमेरा गांव उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मनियाहू तहसील में हरद्वारी है। ये तीन तरफ से नदियों से घिरा हुआ है। मेरी उम्र अभी लगभग 84 साल है लेकिन गांव में सड़क नहीं है। जब पीछे मुड़ कर देखता हूं तो गांव खेती किसानी दृष्टि से खुशहाल था। खेती-बाड़ी ही मुख्य पेशा …

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ददिहाल के गांव बड़ौत से ज्यादा…ननिहाल के गांव पुरकाजी से रहा है नाता

निशि सिंह हम सभी की जड़ें गांव से जुड़ी हैं। व्यक्ति उम्र के किसी भी पड़ाव पर पहुंच जाये, सफलता की कितनी भी सीढ़ियां चढ़ लें लेकिन जब यादों का पिटारा खोलता है,  तमाम खिड़की, दरवाजों,झिर्रियों के पार बचपन के वो अनमोल क्षण कुछ चुहल,कुछ बदमाशियां, कुछ सखी-कुछ सहेलियां सामने आ खड़े होते हैं। स्वाभाविक …

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बदल गया है सामुदायिक जीवन

डॉ अनामिका मेरा जन्म चीन से युद्ध के समय हुआ था। उस समय की घटनाएं याद नहीं हैं। एक-दो दृश्य याद हैं। भैया हमको कहते थे कि चाइनीज है। मेरी नाक चपटी थी, इसलिए चिढ़ाते थे। हमको याद है कि नेपाल के बॉर्डर से आती थी एक बूढ़ी औरत, स्मगलिंग की साड़ियां लेकर। कुछ दूसरे …

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गांवो के आत्मनिर्भरता की बात निकली है तो उत्तराखंड में दूर तलक जाएगी

मंगरूआ उत्तराखंड राज्य के ग्रामीण क्षेत्र में “कोरोना संकट : बचाव एवं राहत तथा आत्मनिर्भर गांव” बिषय पर आयोजित तीसरी सरकार अभियान के वेबीनार में वक्ताओं ने रखी राय हरिद्वार: कोरोना महामारी के दौरान प्रवासियों के गांव लौटने का सिलसिला चला। स्वाभाविक था देश के अन्य राज्यों की तरह ही प्रवासी राज्य उत्पारखंड से भी …

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गांधी वास्तविकता में कम, कल्पना में ज्यादा जीते थे

डाॅ मैनेजर पांडेय मेरा गांव लोहटी गोपालगंज जिले के कटिया थाने में हैं। वैसे तो गांव साल में एक-दो बार ही जाना होता है लेकिन गांव से जुड़ाव है। हमारा गांव भी देश के दूसरे गांव की तरह बहुत बदल गया है। विशेष रूप से मानवीय संबंध के मामले में ईष्र्या, द्वेष के कारण लड़ाई, …

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उतार-चढ़ाव के हिचकोलों भरी जिंदगी में चलते रहना ही नियति है…

प्रशांत बलिया चंद्रशेखर जी जैसे युगदृष्टा कभी दिवंगत नहीं होते, वे मृत्यु को भी प्राप्त नहीं होते। वे तो सदा वर्तमान रहते हैं, अपने आदर्शों के जरिये, अपने दूरदर्शी विचारों के जरिये अपने लाखों-करोडों समर्थकों के हृदय में सुनहरे भविष्य की आशा की एक धड़कन बन कर। आज चंद्रशेखर जी की पुण्यतिथि है। आज से …

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गांव हो गए सरकारी!

कमलेश कुमार सिंह हाजीपुर: हाल ही में गांव जाना हुआ। पिताजी भी साथ थे। बटाइदार से गेंहू लाना था। बटाइदार पारस राय पिताजी को गेंहू का हिसाब किताब बता रहा था। इसी बीच एक बुजुर्ग वहां से गुजरते हुए अचानक रुक गये। उन्होंने मुझे टोकते हुए पूछा कहां से आये हो, किसके लड़के हो। तभी …

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जरूरी है अंदर के गांव को बचा कर रखना

डॉ प्रदीप कांत चौधरी बचपन गांव में नहीं बीता। गांव कभी कभार जाता था, पर उसकी कोई ऐसी याद नहीं है, कोई नोस्टाल्जिया नहीं है। हालांकि गांव से इतना दूर भी नहीं था, कस्बानुमा शहर लहेरियासराय-दरभंगा जहां मेरा बचपन बीता उसमें शहर की कोई ऐसी चमक नहीं थी कि गांव जाने पर कोई खास अंतर …

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वज्रपात से बचाव का मंत्र है ताड़ के ऊंचे पेड़

अमरनाथ पटना:आपदा-ग्रस्त राज्य बिहार में वज्रपात की घटनाएं और उससे मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसका दीर्घकालिक इंतजाम के बारे में सोचने के बजाए सरकार फौरी इंतजाम करने और मुआवजा बांटकर वाहवाही बटोरने में लगी है। मंगलवार को वज्रपात अर्थात ठनका से विभिन्न जिलों में 11 लोगों की मौत हो गई। पिछले …

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बिहार में जन वितरण प्रणाली-चुनौतियाँ और सुधार की ज़रूरतें

 अनिन्दो बनर्जी और प्रतिमा कुमारी पासवान पटना: कोविड-19 महामारी के नियंत्रण के लिए देशभर में लागू किये गये लॉकडाउन तथा अन्य पाबंदियों की स्थिति में जन वितरण प्रणाली एक अद्वितीय जीवनरक्षक व्यवस्था के रूप में सामने आई है। दूसरे विश्वयुद्ध के समय से भुखमरी की रोकथाम के लिए चलाई जा रही यह व्यवस्था वर्ष 2013 …

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