आलेख

प्रवासियों का गांव इसरायण कलां

इक्कीसवीं सदी का इसरायण कलां गूगल के पास हमारे गांव इसरायण कलां से जुड़ी कुछ और जानकारियां मिलती हैं । वह इस गांव के कुछ व्यक्तियों के बारे में जानकारी देता है । कुछ जानकारियां मैं आपसे साझा करना चाहता हूं मसलन ,इस गांव के श्री अरविन्द कुमार 2019 में भारत सरकार के आइबी प्रमुख …

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उन्नीसवीं और बीसवीं सदी में मेरा गांव ‘इसरायण कलां’

गूगल पर मेरे गांव ‘इसरायण कलां’ को सर्च करेंगे तो वह बतायेगा कि यह बिहार के मधेपुरा जिला मुख्यालय से पैंतीस किलोमीटर दूर है और प्रखंड मुख्यालय कुमारखंड से सात किलोमीटर । इस गांव का भौगोलिक विस्तार 1279 हेक्टेयर में है । मुरलीगंज इसका निकटतम रेलवे स्टेशन है जो गांव से पन्द्रह किलोमीटर दूर है …

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गांव उखई से जुड़ी यादें मंजिल पर पहुंचने में सदैव रही हैं मददगार

मेरे गांव का नाम उखई पश्चिम पट्टी है, जो सिवान जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गांव में पहले 22 टोला हुआ करता था लेकिन समय के साथ जैसे—जैसे जनसंख्या में बढ़ोतरी होती गई, गांव का भी विस्तार होता चला गया और वर्तमान गांव लगभग 30 टोलों में फैला है। सुविधाओं के लिहाज से …

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गांधी का गंगौर: मैय्यो के लिए विनोबा…बिनो बाबाजी थे, तो गांधी जी…गन्धी महतमा

साठ साल पहले ओलापुर-गंगौर की चोहद्दी बड़ी दिलचस्प हुआ करती थी। बल खाती बूढ़ी गंडक के किनारे गांव लम्बा बसा हुआ था। गांव के बीच से एक कच्ची सड़क गुजरती थी। एक सिरे पर शराब की कलारी और ताड़ीखाना था। शाम को गाछी गुलजार हो जाती थी। जब पहली दफा मैला आंचल पढ़ा तो लगा, …

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जातीय विविधता के लिहाज से खास पहचान रखता है पैतृक गांव पिपलाज

  सार्वजनिक नल ने प्यास बुझाने के जतन शुरू किये ही थे कि पिताश्री के रिटायरमेंट और तीन सौ किलोमीटर दूर अपने पैतृक गांव पिपलाज की तरफ बढ़ने का फरमान आ गया। एक शिक्षक के सेवानिवृत्त होने और अपने गांव जाने के फैसले से पूरा गांव ही नहीं,आसपास की ढाणियां किस तरह दुःखी हो सकती …

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अजमेर के पीपलाज और झुंझुनू के मोहनवाड़ी गांव से जुड़ी हुई है स्मृतियां

सौभाग्यशाली हूं क्योंकि मेरे एक नहीं,दो-दो गांव हैं। पहला-पिपलाज। जहां जन्म हुआ। दूसरा-मोहनवाड़ी। जहां,बचपन बीता। पांचवीं-छठी तक पढ़ाई की। पिपलाज राजस्थान के अजमेर जिले का आखिरी गांव ,जिसकी सीमा भीलवाड़ा जिले से सटी है। मोहनवाड़ी राजस्थान के ही झुंझुनू जिले का एक गांव,जहां बचपन में सुनी नवजात कन्याओ की हत्या की कहानियों ने जन्म के …

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एकौना गांव के रग-रग में बसा हुआ है रामचरित मानस

बक्सर जिले के सुदूर उत्तर में गंगा नदी बहती है। गंगा नदी से करीब 5 किलोमीटर पहले एकौना गांव है। गांव की चौहद्दी की बात की जाये गांव के उत्तर में राजापुर दक्षिण में सिंघनपुरा, पश्चिम में सहियार और पूरब में दुबौली गांव है। एकौना गांव का ग्राम पंचायत एकौना के नाम से ही है …

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सहसराम का नया टोला हमारा गांव कुम्हउ

कुम्हउ. यही नाम है मेरे गांव का. बिहार के मशहूर शहर सासाराम से अगर बनारस की ओर जीटी रोड पकड़कर बढ़ें, तो बाईपास पर ही एक रंगीन चमकता हुआ गेट दिखेगा. गांव कुम्हउ, लिखा हुआ. अगर रेल से गया, डेहरी-आन-सोन या सासाराम से बनारस की ओर जाएंगे तो पैसेंजर ट्रेन का सासाराम के बाद अगला …

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संस्मरण: ऐसे ही एक दिन गाँव मर कर शहर हो जायेगा

  मेरे गाँव का नाम कटसारी है जो सुलतानपुर जिले के कादीपुर तहसील में है। गांव के दक्षिण गोमती नदी बहती है, पश्चिम ग्राम राई बीगो, उत्तर दिशा में पदारथपुर और राघवपुर गाँव हैं जबकि पूरब में ग्रामसभा बरवारी पुर है। मेरे परिवार के ज़्यादातर लोग कलकत्ता रहते हैं। गर्मियों की छुट्टियों या शादी-ब्याह में …

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गाँव गोधनी ने दिया पुनर्जीवन

मेरा गाँव गोधनी. बहुत छोटा सा गाँव है. कोई दो-ढाई सौ घरों का गाँव. महाराष्ट्र की उत्तरी सीमा से बहुत करीब. बैतूल जिले की मुलताई तहसील से महाराष्ट्र के अमरावती की ओर दक्षिण में जाने वाली सड़क पर प्रभात पट्टन कस्बे से पश्चिम की ओर तीन किलोमीटर दूर. अभी कुछ साल पहले ही सड़क से …

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