चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध बढ़ाया गया, चावल के निर्यात में ढील दी गई

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अंकित पाण्डेय

भारत सरकार ने देश में चावल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए गैर बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला उन देशों की चिंता बढ़ाने वाला था, जहां भारत के चावल निर्यात होते हैं। हालांकि खबर यह है कि भारत ने सिंगापुर को चावल निर्यात करने की अनुमति दे दी है।

सिंगापुर को चावल का निर्यात की मंजूरी

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बयान जारी कर कहा है कि ‘भारत और सिंगापुर के बीच मजबूत रणनीतिक संबंध हैं। दोनों देशों के साझा हित हैं और आर्थिक स्तर पर और लोगों के लोगों से संबंध भी दोनों देशों के मजबूत हैं। ऐसे में इस विशेष संबंध को देखते हुए भारत ने सिंगापुर की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए चावल का निर्यात करने का फैसला किया है। इस संबंध में जल्द ही औपचारिक आदेश जारी कर दिए जाएंगे।’ दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को देखते हुए ऐसा फैसला किया गया है।

सरकार ने कमजोर-मानसून की चिंताओं के कारण घरेलू उत्पादन की चिंताओं के कारण चीनी की सभी किस्मों- कच्ची, सफेद, परिष्कृत और जैविक के निर्यात पर प्रतिबंध 31 अक्टूबर से आगे बढ़ा दिया है। वर्तमान में चीनी 31 अक्टूबर तक प्रतिबंधित सूची में है। हालांकि, खाद्य मंत्रालय उद्योग को उपलब्धता के आधार पर कुछ मात्रा में निर्यात करने की अनुमति देता रहा है। हालाँकि, ये प्रतिबंध सीएक्सएल और टैरिफ दर कोटा (टीआरक्यू) रियायतों के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को निर्यात की जाने वाली चीनी पर लागू नहीं होंगे। इन क्षेत्रों में कम टैरिफ पर एक निश्चित मात्रा में चीनी का निर्यात किया जाता है।

गैर-बासमती चावल

भारत ने बुधवार को नेपाल, कैमरून और मलेशिया सहित सात देशों को 10,34,800 टन गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात की अनुमति दी। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा, राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) के माध्यम से निर्यात की अनुमति है।

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