वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ी कृषि की हिस्सेदारी

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अंकित पाण्डेय

नीति आयोग के सदस्य और आर्थिक विकास संस्थान के अध्यक्ष रमेश चंद ने कहा कि 2006 के वित्तीय संकट के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन उलट गया है, जिसमें कृषि क्षेत्र में वृद्धि देखी गई है, जबकि विनिर्माण और गैर-कृषि क्षेत्र धीमा हो गए हैं। कौटालिया के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए रमेश चंद ने कहा कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान 2006 में 3.2% से बढ़कर 2021 में 4.3% हो गया है, जबकि विनिर्माण और गैर-कृषि क्षेत्रों में विकास दर विकासशील देशों में भी धीमी हो गई है।
चंद के अनुसार, गैर-कृषि क्षेत्र और विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में मंदी के कारण भी इन क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा नहीं हो रहे हैं। चंद ने कहा कि उद्योग और गैर-कृषि क्षेत्र कार्यबल को कृषि से बाहर निकालने में विफल रहे हैं और जो युवा कृषि क्षेत्र से बाहर जाना चाहते हैं वे वहीं फंस गए हैं।


इसके अलावा, कृषि और गैर-कृषि श्रमिकों की आय के बीच बढ़ता अंतर वैश्विक अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का एक गंभीर निहितार्थ है।
कृषि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 4.3% का योगदान देती है लेकिन विश्व कार्यबल के 26.4% को रोजगार प्रदान करती है। चंद ने कहा, “जब हम विकासशील देशों को देखते हैं, तो हम पाते हैं कि अर्थव्यवस्था में कृषि का हिस्सा रोजगार में उसके हिस्से का आधा या एक-चौथाई है।
भोजन तक पहुंच के मुद्दे पर बोलते हुए, चंद ने कहा कि हालांकि अधिकांश देशों में प्रति व्यक्ति भोजन का उत्पादन बढ़ रहा है, लेकिन इसने हाल के वर्षों में वैश्विक दक्षिण में भूख और कुपोषण मे कमी धीमी पड़ती दिख रही है और असल समस्या भोजन की उपलब्धता के बजाय लोगों तक पहुंच की है।
चंद के मुताबिक, यह मंदी 2012-2014 के आसपास अफ्रीकी देशों में शुरू हुई और फिर लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया तक फैल गई।

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