self dependent village

कोरोना का संकट : आत्मनिर्भर गांव

डॉ चन्द्रशेखर प्राण विगत 17 मई 2020 को तीसरी सरकार अभियान द्वारा ‘कोरोना का संकट और आत्मनिर्भर गांव’ विषयक वेबिनार का आयोजन मीट ऐप के माध्यम से किया गया। इस चर्चा में देश के विभिन्न क्षेत्रों से 40 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इन प्रतिनिधियों में जहां एक और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय सामाजिक …

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लॉक डाउन 4 के लिए रहें तैयार…20 लाख करोड़ के पैकेज से आत्मनिर्भर होगा भारत

मंगरूआ नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के नाम किये गये संबोधन में लॉक डाउन 4 शुरू किये जाने की बात कही। लॉकडाउन का चौथा चरण, लॉकडाउन 4, पूरी तरह नए रंग रूप वाला होगा, नए नियमों वाला होगा। हालाकि उन्होनें यह भी कहा कि इसके प्रक्रिया के विषय में 18 मई से पहले विस्तार …

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गांव में रहना हुआ आसान, रोजगार सृजन की है दरकार

प्रो डॉ प्रदीप कांत चौधरी कोरोना महामारी के दौरान गांव में हूं और यहां के जीवन की सहूलियतों से अभिभूत हूं। इस महामारी के बाद दुनिया में क्या बदलाव आएंगे, इस बात पर बड़े बड़े विद्वान घनघोर चर्चा कर रहें हैं। इस चर्चा में एक तत्व यह भी है कि शायद प्रकृतिक वातावरण के प्रति …

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आंखों में विकास का ख्वाब

मनोज कुमार, युवा पत्रकार मेरा गांव भी भारत के लाखों गांवों जैसा ही है। लगभग तीन सौ घरों की इस छोटी-सी बस्ती का नाम अवर्हिया है जो बिहार के कैमूर जिला अंतर्गत दुर्गावती प्रखंड में पड़ता हैं। इस गांव के बारे में एक पुरानी उक्ति है कि पांडे पूरा बांधे जूरा, दरौली पीसे पिसान, नार …

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कतहीं जियरा लागत नइखे…

महेन्द्र प्रसाद सिंह भोजपुर जिले के कोइलवर ब्लॉक में पड़ने वाला मेरा गांव चांदी है। इसे नरहीं के साथ जोड़कर पहचाना जाता है क्योंकि भोजपुर जिले में चांदी नाम के दो गांव हैं। इसके पूरब में बहियारा, उत्तर में नरबीरपुर, दक्खिन में हरदास टोला और ​पश्चिम में जमीरा, लक्ष्मणपुर गांव हैं। चांदी को जोड़ने वाली …

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अपने प्रयास से आगे बढ़ा दानियाल परसौना

प्रवेश कुमार मिश्र महात्मा गांधी की कर्मभूमि चम्पारण के साठी थाना में दानियाल परसौना गांव आज विकास की गति के साथ कदमताल करने को तैयार है। कभी शहर व बाजार से महरूम रहा यह गांव आज बड़े-बड़े शहरों से आने वाले धन पर इठला रहा है। लोग देश-विदेश तक अपनी पहुंच बना चुके हैं। कभी …

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परंपराओं से जुड़कर वापस आ सकती है गांव की खुशहाली

वेंकटेश नारायण सिंह मेरा गांव हेमतपुर आरा शहर से 13 किमी की दूरी पर है। यह 1961 दिसंबर से पक्की सड़क से जुड़ा हुआ था लेकिन शहरीकरण से बचते हुए भारतीय संस्कृति को संजोए हुए था। गाँव की गलियां कच्ची थी तथा गाँव में शायद ही कोई चप्पल पहनता था। बरसात में पैरों में कीचड़ …

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खुशहाल गांव, जाने पर या तो कुछ बच्चे मिलते हैं या बूढ़े

विजय शंकर सिंह कहते हैं, चंदौली जिला के रामगढ़ गांव में अकबर सिंह के घर में एक संत जन्में जो बाद में बाबा कीनाराम नाम से विख्यात हुए। बाबा कीनाराम की एक चाची थीं जो विधवा थीं और उनको एक पुत्र था। परिवार में उस चाची का सम्मान कम था। बाबा कीनाराम को यह देख …

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कर्मठ लोगों का गांव है भेलारी

कन्हैया भेलारी गांव के सबसे बुजुर्ग 90 वर्षीय जय किशोर सिंह भी यह बताने में असमर्थ हैं कि गांव का नाम भेलारी क्यों रखा गया। नामकरण के पीछे कोई ठोस कारण तो जरूर रहा होगा। हालांकि दो किलोमीटर के रेडियस में तीन भेलारी है। पूर्वी भेलारी, बिचली भेलारी तथा पश्चिमी भेलारी। पर आजकल तीनों गांव …

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गांव छोड़ना..गांव के स्वाभिमान को तोड़ने जैसा

एक दिन मेरे बाबा काॅलेज जाने को तैयार थे। तभी बाबा को खोजते बादशाह मियां किसी काम से दरवाजे पर आए। मैं ही दरवाजे पर था। बाबा को संदेश दिया कि ‘बादशाह मियां आए हैं।’ बादशाह मियां कहना और मेरे गाल पर बाबा का थप्पड़ पड़ना, गांव के संबंधों की कथा कहता है। डाॅ रजनीश …

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