education in village

कुटुंब को बचाना होगा…

डॉ शांतेश कुमार सिंह गांव ही भारत का वास्तविक स्वरूप दर्शाता है क्योंकि वहां हम सामूहिक जीवन जीते है। खेलकूद हो, सांस्कृतिक कार्यक्रम हो, महोत्सव हो या दूसरी गतिविधियां गांव में शहरों की अपेक्षा ज्यादा जिन्दादिली के साथ होती हैं। मैंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा गांव में ही बिताया है। जब से शहर में …

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बदल रहा है गांवों का माहौल

ललिता जोशी ‘भारत की आत्मा उसके गांव में रहती है- महात्मा गांधी का यह वक्तव्य आज भी सटीक हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार 121 करोड़ भारतीयों की आबादी में 37.7 करोड़ शहरों में और 83.3 करोड़ गांवों में रहती है। हमारे गांव हमारे देश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग रहे हैं, बावजूद इसके गांव …

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दादी के जीवन का आकर्षण नानी के जीवन से गायब दिखा…

डॉ सुधा सिंह दादी की तुलना में नानी कमला देवी को मैंने अधिकतर सबमिसिव भाव में देखा। उनके चार बेटे और बहुओं का परिवार था उसका तनाव बिल्कुल नहीं लेती थीं। घर के अंदर सेवा-टहल और आज्ञापालन के लिए समर्थ बहुएं थीं। वे घर के कमाऊ और आधुनिक मिजाज मुखिया की पत्नी थीं और इसी …

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सैनिकों के गांव में खेती-बाडी

हरीश रसगोत्रा भारत के मुकुट यानी जम्मू में मेरा एक छोटा-सा गांव है ‘संगवाल’। भारत के अन्य गांवों की तरह यहां का जीवन भी मुख्य रूप से खेती-किसानी पर ही निर्भर है। आधुनिक कृषि के इस दौर में भी मेरे गांव के लोग परंपरागत खेती को ही आधार बनाए हुए हैं। मुख्य रूप से गेहूं, मक्का, बाजरा …

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कतहीं जियरा लागत नइखे…

महेन्द्र प्रसाद सिंह भोजपुर जिले के कोइलवर ब्लॉक में पड़ने वाला मेरा गांव चांदी है। इसे नरहीं के साथ जोड़कर पहचाना जाता है क्योंकि भोजपुर जिले में चांदी नाम के दो गांव हैं। इसके पूरब में बहियारा, उत्तर में नरबीरपुर, दक्खिन में हरदास टोला और ​पश्चिम में जमीरा, लक्ष्मणपुर गांव हैं। चांदी को जोड़ने वाली …

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हम गांव के गंवार हैं साहिब

डॉक्टर सिद्धार्थ सोनकर गांव मतलब एक शहरी के लिए भौगोलिक रूप से पिछड़ा इलाका और मेरे जैसे लोगों के लिए गांव मतलब.क्या? आज तक गांव का मतलब नहीं निकाल पाया। इसलिए कहते रहे हैं कि “ गांव के गंवार है साहिब”। आज तक उसका ना कोई अर्थ समझ में आया है, ना कोई परिभाषा। बस …

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सबको अपना मानता है गांव

डॉ गोपाल सिंह भारतीय ग्रामीण परिवेश को समझने के लिए हमें थोड़ा-सा पीछे जाना पड़ेगा। और इसके लिए मुंशी प्रेमचंद की रचना से थोड़ी जानकारी लेनी होगी। उनकी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए डॉ सुप्रभात सिंह ने अपने उपन्यास-अमर अवध बेतरणी में लिखा कि आज का गांव ग्रामीण परंपराओं को संजोए हुए है। गांव में …

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संसाधनों के अभाव में कम हो रहा है ग्राम्य जीवन का सद्भाव

डाॅ सदानंद शाही जिस गांव से जीवन की यात्रा शुरू हुई उस गांव का नाम सिंगहां है। जब मेरा जन्म हुआ तब यह गांव देवरिया जिले की सीमा में आता था। आगे चलकर देवरिया से नया जिला बना कुशीनगर। रामकोला कस्बा से 10 किलोमीटर उत्तर की ओर है हमारा गांव। एक जमाने में देवरिया जिले …

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खुशहाल गांव, जाने पर या तो कुछ बच्चे मिलते हैं या बूढ़े

विजय शंकर सिंह कहते हैं, चंदौली जिला के रामगढ़ गांव में अकबर सिंह के घर में एक संत जन्में जो बाद में बाबा कीनाराम नाम से विख्यात हुए। बाबा कीनाराम की एक चाची थीं जो विधवा थीं और उनको एक पुत्र था। परिवार में उस चाची का सम्मान कम था। बाबा कीनाराम को यह देख …

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गांधी के रास्ते चलकर ही बदलेगा गांव सोभानपुर

मनोज मीता गांधी जयंती 2016 के पहले मैंने “सोभानपुर” का नाम भी नहीं सुना था। यह भागलपुर-अमरपुर-बांका रोड पर इंगलिश मोड़ से तीन किलोमीटर उत्तर स्थित है जो अमरपुर प्रखंड का सबसे बड़ा पंचायत है। सोभानपुर पंचायत में एक ही राजस्व गांव है। मेरे सोभानपुर गांव पहुंचने की यात्रा भी अनोखी है। दिशा ग्रामीण विकास …

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