समर्पण ने पूरे समर्पण के साथ मनाया अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम, उत्साहित दिखी महिलायें

पंचायत खबर टोली

नयी दिल्ली: अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर समर्पण सोशल वेलफेयर ट्रस्ट,झरोदा द्वारा महिलाओं के सम्मान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में महिलायें व लड़कियां एकत्रित हुईं और संस्था द्वारा किये गये इस आयोजन में बढ़चढ़ कर भागीदारी की। साथ ही संस्था के अध्यक्ष शैल का हौसला बढ़ाया और आगे भी इस तरह के आयोजनों में बढ़ चढ़कर भागीदारी करने का भरोसा जताया।

इस मौके पर कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए संस्था की अध्यक्षा शैल ने कहा कि, वैसे तो मातृ शक्ति के एक दिन क्या सब दिन होता है। 365 दिन होता है..माता और समाज का जन्म—जन्मांतर का साथ होता है लेकिन घोषित तौर पर हम 8 मार्च को महिला दिवस के रूप में मनाते हैं। बावजूद इसके कहा जाता है कि नारी का कोई घर नहीं होता अरे आप ये क्यों नहीं समझते की नारी के बिना कोई घर ही नहीं होता। और जिस दिन ये छोटी सी बात समझ आ जाएगी..समस्त नारी जाती के लिए ये धरा यानी धरती स्वर्ग से सुंदर हो जाएगी।


इसलिए संकल्प लें..नारी दिवस बस एक दिवस क्यों नारी के नाम मनाना है हर दिन हर पल नारी उत्तम मानो , यह नया ज़माना है यहां तक की महात्मा गांधी ने भी कहा था कि एक पुरूष को पढ़ाओगे तो एक व्यक्ति शिक्षित होगा जबकी एक नारी पढ़ेगी तो दो परिवार शिक्षित होगा।


वैसे तो ये कोरोना काल चल रहा है। हर साल जिस तरह के कार्यक्रम महिला दिवस को लेकर होते थे इस बार नहीं होंगे। लेकिन यहां जानकारी देना जरूरी है इस साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम है – #ChooseToChallenge
यह थीम इस विचार से चुना गया है कि बदलती हुई दुनिया एक चुनौतीपूर्ण दुनिया है और व्यक्तिगत तौर पर हम सब अपने विचार और कार्य के लिए ज़िम्मेदार हैं।


अभियान में कहा गया है कि “हम सब लैंगिक भेदभाव और असमानता को चुनौती दे सकते हैं। हम सब महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मना सकते हैं। सामूहिक रूप से, हम सब एक समावेशी दुनिया बनाने में योगदान दे सकते हैं।”
लोगों से पूछा जा रहा है कि क्या वे असमानता दूर करके बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

भारत समेत कई देशों ने महिलाओं ) के लिए कई कानूनी अधिकार भी बनाएं हैं लेकिन आज भी कई महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें इन कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी भी नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आज हम महिलाओं को उनके इन्ही अधिकारों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं इन खास अधिकारों के बारे में जिनका पता हर महिला को होना बेहद जरूरी है-


समान वेतन का कानूनी अधिकार- पुरूषों की तरह महिलाएं को भी वर्कप्लेस पर समान वेतन का अधिकार है। भारतीय श्रमिक कानून के मुताबिक, किसी भी जगह पर अगर आप काम करती हैं तो वेतन में लिंग के आधार पर आपके साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।


घरेलू हिंसा से सुरक्षा- इस अधिकार को महिलाओं के प्रति हिंसा को रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत अगर किसी महिला के साथ उसके घर पर, ससुराल में कोई भी हिंसा होती है तो वह इसके खिलाफ केस दर्ज कर सकती है।


मातृत्व संबंधी अधिकार- इस अधिकार के तहत जब भी कोई महिला गर्भवती होती है तो उसे 26 सप्ताह की छुट्टी लेने का अधिकार है। इस दौरान महिला के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी। और वह फिर से काम शुरू कर सकती है।


रात में गिरफ्तार ना होने क अधिकार- इस कानून के तहत किसी भी महिला को कोई भी पुलिसकर्मी सूरज ढलने के बाद गिरफ्तार नहीं कर सकता है। इसके लिए पुलिसकर्मी को सूरज उगने का इंतजार करना होगा।


अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर संस्था के कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता डायना एनी ओमीन, लता, उषा गौतम, रिशी सरदाना, विजय लक्ष्मी, जेपी प्रकाश भी शामिल हुए। इसके छात्र ही बड़ी संख्या में संस्था से जुड़ी महिलाओं व लड़कियों ने भी कार्यक्रम में न सिर्फ शिरकत किया बल्कि रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया। ये बालिकायें हैं माया देवी, सुनीता, अंजली, सोनम, पूनम शाह, संगीता, पूजा, मुस्कान, पलक, मीनता, अर्चना, प्रीती, अर्चना, साक्षी और मीनाक्षी ने भागीदारी की।

 

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