गंगा-यमुना ही नहीं सभी नदियों को जीवित ईकाईं मानते हुए कानून बने: राजेंद्र सिंह

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संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: नदियों के पुर्नजीवन के सवाल पर एक तरफ सरकार चिंतित दिख रही है वहीं दूसरी ओर पानी पर काम वाले जनसंगठन भी नदियों और देश में पानी की समस्या देखकर और उसके कारन उत्पन्न होने वाली समस्या को लेकर चिंतित है। यही कारण है कि एकतरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नर्मदा सेवा यात्रा के समापन के अवसर पर अपने संबोधन में इस बात को लेकर चिंता जताते हैं कि भारत में नक्शे पर नदियां बहुत हैं लेकिन इनमें पानी कम है। कुछ इसी तरह की चिंता लिए जल बिरादरी और जल जन जोड़ो अभियान के बैनर तले देश भर से आये कार्यकर्ता जंतर—मंतर पर एकजुट हुए।
पानी के सवाल पर गहन मंथन किया गया..सरकार से अपेक्षा की गयी..संघर्ष के लिए आवाज बुलंद किया गया..नदियों के पुर्नजीवन से जुड़े विभिन्न पहलूओं पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खुल कर अपनी राय रखी। साथ ही मंच पर भाषण दे रहे लोगों ने अपनी बातों के जरिए सामने जमीन पर बैठे लगभग 500 की संख्या में जुटे इन जल के लिए लड़ रह लोगों को भरोसा दिलाया कि लड़ाई सतत जारी रहेगी और खत्म तभी होगी जब नदियों का पुर्नजीवन हो,गंगा—यमुना एवं अन्य नदियों की धारा अविरल बहे।

वक्ताओं में शामिल स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भारत सरकार ने गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किया है। जैसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने वालों जेल की सजा होती है वैसे ही गंगा को दूषित करने वालों पर भी कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। हम कैसी संताने हैं जो मां गंगा के मार्ग पर बाधांए खड़ी कर दी हैं। यदि सरकार गंगा के प्राटोकॉल की रक्षा नहीं करेगी तो हमें अंतिम सांस तक आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा। गंगा में किन कारणों से समस्या है। किस तरह की समस्या है य​ह सबको पता है। और जब कारन पता है तो हमें निदान के लिए भी संकल्प लेना होगा। हमारी संकल्प शक्ति जितनी बड़ी होगी हुक्मरान भी हमारी बात उतनी ही गंभीरता से सुनेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी नदियां भारतीय एकता का प्लेटफार्म हो सकती हैं, और पानी का सवाल जर्रे—जर्रे में बिखड़ रहे भारतीय समाज को एकाकार कर सकता है।

जल पुरूष के नाम से प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह ने कहा कि कम बारिश को जल संकट के लिए जिम्मेवार बताया जा रहा है जो कि एक तरह का षड्यंत्र है। निरंतर जो अकाल पड़ रहे हैं उसके कारन हम खुद हैं। इस अकाल को मिटाने के लिए हमें एकजुट होने की जरूरत है। लोगों को जल संचयन के प्रति जागरूक किये जाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश में लोगों को जल संचय के प्रति सजग करने के लिए जल साक्षरता अभियान चलाया जाएगा। जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने कहा कि तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद भारत की नदियां सूख रही हैं। भू जल स्तर निरंतर गिर रहा है और पानी के प्रदूषण की शिकायतें भी लगातार बढ़ रही हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि किसान बर्बाद हो गया है। नौजवानों का रोजगार छिन रहा है, बीमारियां बढ़ रही है। इसका सीधा असर लोगों के रोजगार और देश के विकास पर हो रहा है।

गांधी के रास्ते चल होगा निदान
सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष महावीर भाई और एकता परिषद के अध्यक्ष रण सिंह परमार ने कहा कि वर्तमान स्थिति में गांधी द्वारा सुझाए गए रचना एवं सत्याग्रह के रास्ते चलकर ही इस समस्या का निदान संभव है। अकाल की समस्या पर विचार के साथ ही गंगा में गाद व कटान की समस्या पर प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा ​गया। जल कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई कि यदि गंगा में गाद और कटान की समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में माल्दा टाउन और मुर्शिदाबाद भारत के नक्शे में नहीं होंगे।

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