पंचायत खबर टोली
- केवीके पिलखी में बंंद कमरे की शोभा बढ़ा रही मृदा परीक्षण प्रयोगशाला
- पूर्वांचल के सभी 17 केवीके में मृदा परिक्षण प्रयोगशाला है बंद, सड़ रही मशीनें
मऊ : एक तरफ जहां केंद्र की मोदी सरकार और कृषि मंत्रालय तीन वर्षों के शासन की उपलब्धयां गिनाने में लगी है वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों के स्वायल टेंस्टिंग कार्ड और स्वॉयल हेल्थ कार्ड योजना चलाने की कवायद पूर्वांचल में दम तोडती नजर रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर इस क्षेत्र के माटी की सेहत सुधारने के लिए कृषि विज्ञान में केंद्र में स्थापित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला बंद हो गए हैं। नरेंद्रदेव कृषि एंव प्रौद्यौगिकी विश्वविद्यालय के अधीन चलने वाले 17 केंद्रों में कई करोड़ों की मशीनों से कभी परीक्षण हो नहीं पाया। विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही और स्थानीय प्रशासन की उपेक्षा से मिट्टी की जांच करने वाली मशीनें जहां सड़ रही हैं, वहीं उनमें प्रयोग किए जाने वाले रसायन एक्सपायर हो चुके हैं। बिजली और पानी की अनुपलब्धता के अभाव में अंधाधुंध रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग से पूर्वांचल की बांझ हो रही माटी की जांच करने वाला प्रयोग ताले में बंद है। वैज्ञानिक परेशान और प्रशासनिक व्यवस्था उदासीन होने से किसान इसकी उपयोगिता का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

केवीके पिलखी में शोभा बनी जांच मशीनें
कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी पर स्थित मृदा परीक्षण केंद्र का हाल यह कि आने बाद से मशीनों को जिस कमरे में रखा गया, आज तक वह वैसे ही है। रसायन एक्सपायर हाेने के साथ जंग लगी मशीने ताले में बंद हैं। ताले को देखकर ही लगता है कि यह कमरा कई महीनों से खोला नहीं गया है। मिट्टी की जांच करते समय बिजली और पानी का होना नितांत आवश्यक है। केंद्र में इन सुविधाओं को आलम यह कि किसी तरह बल्ब और पंखा चला सकने भर कामचलाऊ बिजली तो मिल भी रही है लेकिन पानी की समस्या वर्षों से बनी हुई है। मशीनों के संचालन के लिए हैवी पावर की बात तो दूर अपना अंतिम दिन गिर रहा एकमात्र ट्यूबवेल भी दो वर्षों से खराब पड़ा हुआ है। लैब स्थापित होने के समय कुछ जागरूक किसानों द्वारा जमा मिट्टी का नमूना चारो ओर बिखरा पड़ा हुआ है। खराब होती मशीनों को देख लाचार वैज्ञानिक प्रशासनिक व्यवस्था के दोष का रोना रोते हैं।
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
केवीके प्रभारी डा.डीपी सिंह ने कहा कि मृदा परीक्षण के लिए हैवी पावर सप्लाई व जल का नियमित प्रबंधन होना आवश्यक है। केंद्र पर उपलब्ध काम चलाऊ बिजली से मशीनों का संचालन नहीं हो सकता। दो वर्षों से खराब ट्यूबवेल के कारण मृदा परीक्षण के साथ परिसर में माडल प्रयोग भी बाधित हो गया है। इसके संदर्भ में कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखा गया। स्थिति वही ढाक के तीन वाली है। ऐसे में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला को चला पाना संभव नहीं है।
