अमितेश सिंह
रोविंग एडिटर पंचायत खबर
पूरे देश में लॉक डाउन की वजह आम जनमानस परेशान है। लोग इस महामारी का फैलाव और ज्यादा न हो यह ध्यान में रखते हुए अपने घरों में कैद है। स्वाभाविक है कि अन्नदाताओं पर दोहरी मार पड़ी है। कोरोना अपना करतब दिखा ही रहा है साथ ही मौसम की बदमिजाजी से उनके होश उड़े हुए है। किसानों के फसल को खलिहान और खलिहान से घर तक पहुंचाने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालाकि सरकार अपने स्तर पर अन्नदाताओं को हर संभव राहत देने की कोशिश कर रही है। प्रशासन की मदद से मंडियों तक पहुंच पा रहे हैं फिर भी उसका उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
लेकिन इन सब के बीच गाजीपुर जनपद के एक प्रगतिशील किसान ने राह दिखाई है। जी हां कोरोना के लॉक डाउन के बीच जनपद के एक किसान की मिर्च और लौकी ने सात समुंदर पार इंग्लैंड तक पहुंच चुका है और यह सब हुआ है वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय नई दिल्ली एपीडा के द्वारा जिसने गाजीपुर के खेतों में पैदा हुई पंद्रह सौ किलो मिर्च और 500 किलो लौकी का डिमांड किया इतना ही नहीं इन सभी चीजों को गाजीपुर से नई दिल्ली तक पहुंचाने का वातानुकूलित वाहन का भी व्यवस्था किया।

जनपद गाजीपुर के भावर कोल ब्लॉक के लोचाइन गांव के रहने वाले यह जितेंद्र राय हैं यह एक जागरूक किसान हैं और परंपरागत खेती को वैज्ञानिक तरीकों से और मानक के अनुसार अपनी पैदावार को अपने गांव की मंडियों तक ही नहीं बल्कि सात समंदर पार इंग्लैंड तक भेज कर ना न सिर्फ अपने गांव का बल्कि जनपद गाजीपुर का भी नाम रोशन किया है जी हां 21 अप्रैल को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय नई दिल्ली ने वाराणसी के मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने गाजीपुर की पंद्रह सौ किलो मिर्च तथा 500 किलो लौकी का डिमांड किया जो नई दिल्ली एयरपोर्ट से लंदन कार्गो तक जाना था जिसके लिए मंत्रालय ने वातानुकूलित वाहन का भी व्यवस्था किया और यह वाहन गाजीपुर मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर लोचईन गांव पहुंचकर 3 दिन पूर्व जितेंद्र राय के खेतों की लौकी और हरी मिर्च को दिल्ली तक पहुंचाया जो अब इंग्लैंड तक पहुंच चुका है और वहां की रसोइयों में अपना जाएका विखेर रहा है इस बारे में जितेंद्र ने बताया कि इसके पहले भी वह कई बार कार्गो के माध्यम से अपने खेतों की टमाटर,मिर्च और मटर भेज चुके हैं उन्होंने बताया कि इसके लिए मंत्रालय के द्वारा एक मानक तय किया गया है और उसी मानक के आधार पर इन सब्जियों का चयन कर कार्गो तक भेजा जाता है साथ ही उन्होंने बताया कि इन सब्जियों का जनपद के मंडियों के रेट का डबल रेट हमें मिल जाता है। साथ ही उन्होंने बताया कि अगली खेप 3 मई को पुनः जाने वाला है
वही अपने गांव के मिर्च और लौकी विदेशों तक पहुंचने और उसके बदले में विदेशी मुद्रा उनके गांव पहुंचने पर खुशी जताई और बताया कि हमें इनके पहल से प्रेरणा लेकर अपने भी खेती को इनके अनुसार करने का प्रयास करेंगे।
