बिहार में पंचायत चुनाव में राजनीतिक पार्टी का झंडा लगाने की नहीं होगी अनुमति

अमरनाथ झा
नयी दिल्ली: बिहार में पंचायत चुनाव को दलगत आधार पर करने की मांग समय-समय पर उठती रही है लेकिन सैद्धांतिक तौर पर बिहार में दलगत आधार पर पंचायत चुनाव नहीं होते रहे हैं। इस बार भी बिहार में पंचायत चुनाव दलगत आधार पर नहीं होंगे। अगर किसी उम्मीदवार ने किसी पार्टी का झंडा लगाया या पार्टी का नाम लिया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव को लेकर जारी आचार संहिता में इसका स्पष्ट उल्लेख किया है। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव योगेन्द्र राम ने यह आचार-संहिता जारी किया है। वहीं यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष सभी राजनीतिक दल पंचायत चुनाव में भले ही दलगत आधार पर शिरकत न कर रहे हों लेकिन भीतर खाने अपने राजनीतिक कार्यकर्ताओं को आगे कर पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं जिससे अधिक से अधिक उम्मीदवारों को जिताया जा सके और स्थानीय लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चत किया जा सके।

 

चुनाव आयोग का बिहार में पंचायत चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता जिला निर्वाचन पदाधिकारी, पंचायत सह जिलाधिकारी कार्यालयों को भेज दिया गया है। जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही यह आचार संहिता प्रभावी हो जाएगा और मतदान व मतगणना समाप्त होने तक उस जिला में प्रभावी रहेगा। इस दौरान किसी उम्मीदवार द्वारा कोई ऐसा काम नहीं किया जाना चाहिए जिससे धर्म, संप्रदाय या जाति के लोगों की भावनाओं को ठेस लगती हो या उनमें विद्वेष फैलने या तनाव होने का अंदेशा हो। उपासना स्थल जैसे-मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर या गुरुद्वारा आदि का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
क्या है जमीनी स्थिती
बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने भले किसी पार्टी का झंडा लेने पर उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात करे, पर इसबार दोनों प्रमुख पार्टियां पंचायत चुनाव में काफी दिलचस्पी ले रही है। भाजपा ने तो बकायदा पंचायत चुनाव सेल बनाया है और जिला परिषद सदस्य के पद पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। वह उम्मीदवार पार्टी के चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल भले नहीं कर पाए, पर पार्टी के चुनावी संरचना का लाभ उसे मिलेगा। जिला स्तर पर पार्टी नेता विभिन्न उम्मीदवारों के पक्ष में सक्रिय होंगे।

कांग्रेस व अन्य दलों की खास​ दिलचस्पी
इसी तरह कांग्रेस भी बिहार में पंचायत चुनाव में दिलचस्पी ले रही है। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस की बैठक हुई है। केन्द्रीय पर्यवेक्षक भक्तचरण दास की उपस्थिति में हुई इस बैठक में प्रदेश के सभी प्रमुख नेता उपस्थित थे। प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा कि पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए यह जरूरी है कि पार्टी को पंचायत स्तर पर मजबूत किया जाए। पंचायत चुनाव इसके लिए बेहतरीन अवसर है। बैठक में चर्चा हुई कि पंचायत चुनावों में पार्टी की हिस्सेदारी किस तरह सुनिश्चित किया जाए। इसपर भी चर्चा हुई कि कैसे उम्मीदवार को समर्थन दिया जाए और समर्थन का स्वरुप कैसा हो।
वामपंथी पार्टियां पहले से बिहार में पंचायत चुनाव में दिलचस्पी लेती रही हैं। उनके उम्मीदवार भी उतरते हैं। पर चुनावों के दलगत आधार पर नहीं होने से पार्टी का झंडा या चुनाव चिन्ह का उपयोग नहीं होता। इतना ही नहीं बिहार के चुनावी राजनीति के लिहाज से आम आदमी पार्टी जैसे नये राजनीतिक दल भी बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारी के लिए अपने कार्यकर्ताओं का पूरा सहयोग कर रहे हैं।

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