अमितेश सिंह
रोविंग एडिटर पंचायत खबर
गाजीपुर: भारत एक कृषि प्रधान देश है। लेकिन इस कृषि प्रधान देश में सबसे ज्यादा मार जनसंख्या के किसी वर्ग पर होती रही है तो वो किसान ही है। एक तरफ वो लॉकडाउन से परेशान है तो दूसरी तरफ मौसम की मार से। इस वर्ष तो ऐसा लगता है कि महामारी और मौसम दोनों एक दूसरे से होर लगाये हुए हैं। महामारी के कारण बाजार बंद है तो मौसम की ये खुशमिजाजी है कि किसानों के पास इतना वक्त भी नहीं है कि वे अपनी तैयार फसल खेत से बाजार ले जा पायें या फिर घर में भंडार कर सकें। कुछ यही आलम गाजीपुर जनपद का करयिल क्षेत्र प्याज के किसानों का है। यह क्षेत्र प्याज के पैदावार के लिए जाना जाता है लेकिन प्याज उगाने वाले किसान अपनी अच्छी फसल के बावजूद परेशान हैं। एक तरफ लॉक डाउन के कारण वह प्याज मंडी में ले जाकर नहीं बेच पा रहे हैं। तो दूसरी तरफ बिन मौसम बरसात नें प्याज कुड़ाई के काम को बुरी तरीके से प्रभावित किया है।
खेतों में रखी प्याज को बोरों में भरते इन किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है ।एक तरफ कोरोना किसानों की पैदावार को मंडी तक पहुंचने में अवरोध पैदा किया है। वहीं बिन मौसम हो रही बरसात ने प्याज कुड़ाई के लिए तैयार हो चुके प्याज को बर्बादी के कगार पर ला दिया है ।किसानों की माने तो अगर ऐसे ही एक दो और बरसाते हुई तो प्याज खेतों में ही सड़ जाएंगे ।
ऐसे ही एक किसान संतोष राय से जब प्याज के फसल के बाबत बात की गई तो उन्होंने कहा कि एक बीघा खेत में प्याज की रोपाई का खर्च ₹10000 आता है जब की कुड़ाई और अन्य चीजों को करने के उपरांत कुल खर्च 35 हजार से ₹ 40 हजार प्रति बीघे पड़ता है ऐसे में अगर किसान ₹10 प्रति किलो के हिसाब से प्याज की बिकवाली करते है तो लागत भी निकालना मुश्किल हो जाएगा।
इसी इलाके के अन्य किसान जयगोविंद राय और मिथिलेश राय भी संतोष राय की बात से इत्तफाक रखते हैं। उन्होंने बताया कि अगर प्याज की कीमत ₹14 रुपए किलो के आसपास जाती है तब जाकर प्याज की लागत आएगी और ₹14 से ऊपर प्याज का भाव होने पर कुछ फायदा मिल पाएगा। ऐसे में किसान समझ नहीं पा रहे हैं कि वे कुदरत को दोष देंं या कोरोना को। क्योंकि इन दोनों पर उनका कोई वश नहीं है। जिस पर वश है वो सुनने को तैयार नहीं। स्वाभाविक है इन प्याज किसानों की समस्या पर सरकार को ध्यान देना चाहिए तभी जाकर कोई रास्ता निकल सकता है। रास्ता भी सरकार को ही बनाना होगा और एक निर्धारित मूल्य भी प्याज किसानों के लिए तय करना होगा ताकि गेहूं और धान की तरह किसानों को उनकी फसल का एक निश्चित आय प्राप्त हो सके। किसान को यह ज्ञात हो सके की अमूमन प्याज का क्या रेट क्या चल रहा है। लेकिन समस्या है कि सरकार के पास प्याज उत्पादक किसानों की समस्या को लेकर कोई ठोस योजना नहीं है इस मसले पर जब जिला उद्यान अधिकारी शैलेन्द्र दुबे से बात किया गया तो उन्होंने प्याज किसानों की बदहाली पर यह कहते हुए अपनी जिम्मेदारी पूरी करने की कोशिश की कि प्याज जल्दी खराब होने वाली चीज नहीं है और ऐसे में किसान जब ज्यादा कीमत मिले तब इसकी बिकवाली कर सकते है।
उल्लेखनीय है कि देश के ज्यादातर किसानों को अपनी पैदावार के लिए मौसम पर निर्भर रहना पड़ता है ऐसे में लॉक डाउन में हो रही बरसात में प्याज उत्पादक किसानों की परेशानी की मार को और गहरा कर दिया है ।
