सरकार का प्रयास..यूनिसेफ का मिला साथ, कोविड के खिलाफ लड़ाई में… मिली सफलता का यही है राज

माउंट आबू से लौटकर संतोष कुमार सिंह

सिरोही/नयी दिल्ली:कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार के प्रयासों से कदमताल मिलाते हुए जिस प्रकार से जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य महकमा, गैर सरकारी संगठन, डेवलपमेंटल सेक्टर में काम करने वाले यूनिसेफ जैसे संगठन लगातार काम कर रहे हैं उसी का परिणाम है कि न सिर्फ लोक कलाकार, बल्कि लोक व जमीनी स्तर पर लोक के द्वारा चुने गए पंचायती राज प्रतिनिधी भी इस अभियान को सफल बनाने और कोविड को दूर भगाने के लिए हर तरह का प्रयास करते दिखते हैं और उनके प्रयास को सफलता भी मिल रही है। इन प्रयासों को इस बात से समझा जा सकता है कि एक तरफ कोरोना के आंकड़े में लगातार गिरावट दर्ज की गई है वहीं दूसरी तरफ टीकाकरण के आंकड़े में लगातार होती बढ़ोतरी दुनिया का ध्यान बरबस अपनी ओर खींचती है।
कोरोना को लेकर एक ओर संदेह का वातावरण रहा तो दूसरी ओर सफलता की कहानी और इन दोनों के बीच ही तैयार होता है कोरोना  डैशबोर्ड जो भारत की महामारी से लड़ाई की सफलता की कहानी को रेखांकित करता है।

बावजूद इन सब तथ्यों के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर भारत जैसे बड़ी आबादी वाला देश सोशल डिस्टेंसिंग और अधिक से अधिक टीकाकरण के अपने लक्ष्य को जमीन पर सफल कैसे बना पा रहा है तो इसका जवाब इन तथ्यों से समझा जा सकता है। उस मॉडल के जरिए समझा जा सकता है जिसे अपनाकर भारत जैसा देश दुनिया को राह दिखा रहा है और दुनिया के लिए अनुकरणीय बना हुआ है। कोविड 19 के खिलाफ प्रबंध और महामारी से देश को बचाने की इस लड़ाई में भारत को निरंतर सफलता की कहानी को देश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया इन शब्दों के जरिए सामने रखते हैं।

क्या कहते हैं डॉ मंडाविया
डॉ मनसुख मंडाविया कहते हैं कि भारत में कोविड 19 प्रबंधन ने केंद्र और राज्यों के साथ मिलकर काम करने के साथ एक अनुकरणीय मॉडल प्रदर्शित किया, जिसे दुनिया भर में सराहा गया है। उन्होंने कहा कि कई अध्ययनों ने भारत में महामारी के प्रभावों के बारे में गलत धारणाएं और भविष्यवाणियां की थीं। हालांकि, निर्णायक और रणनीतिक कार्रवाइयाँ, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और सरकार के समुचित प्रयास और समाज के पूर्ण सहयोग के जरिए घातक वायरस के प्रसार को रोकने में कामयाबी मिली जो महामारी का प्रबंधन करने के लिए महत्वपूर्ण थी।

 

सभी हितधारकों का मिला साथ
स्वास्थ्य मंत्री ने कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में एनजीओ, सीएसओ, उद्योग, विकास भागीदारों और मीडिया जैसे विभिन्न हितधारकों के साथ ही समुदायिक स्तर स्वयं के पहल से किये जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक आंदोलनों (जन आंदोलन) और लोगों की भागीदारी (जन भागीदारी) ने भारत के सफल कोविड 19 के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय और अन्य हितधारकों के साथ काम करते हुए, भारत सरकार स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को उन्नत करके और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को मजबूत करके देश भर में प्रभावी रूप से प्रभावी कोविड 19 का प्रबंधन का अनुसरण कर रही है। उन्होंने अर्थव्यवस्था पर वायरस के प्रभाव और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा कोरोना के दूसरी घातक लहर की चुनौती का मुकाबला किये जाने के उपायों का विशेष उल्लेख किया। .कोविड से बचाव सुनिश्चित करने के लिए नवीन संचार माध्यमों द्वारा मास्क, सामाजिक दूरी और हाथ धोने सहित कोविड उपयुक्त व्यवहारों का पालन करने संबंधित जागरूकता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मंडाविया ने कहा कि देश के भौगोलिक विविधता और व्यापक जनसंख्या के बावजूद भारत में एक विशाल टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक चलाया गया।
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में डब्लूएचओ, यूनिसेफ,यूएनडीपी,यूएसएड, एडीबी, और बीएमजीएफ जैसे डेवलपमेंटल सेक्टर से जुड़ी संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारत के ​टीकाकरण अभियान और कोविड प्रबंधन की सराहना की।

क्या कहते हैं यूनिसेफ प्रतिनिधि

देश भर में बड़े कोविड 19 टीकाकरण अभियान को सफलतापूर्वक प्रबंधित करने के लिए भारत सरकार की सराहना करते हुए, यासुमासा किमुरा, डिप्टी यूनिसेफ इंडिया प्रतिनिधि ने कहा, “यह हमारे इतिहास में पहली बार है जब टीकों को युद्ध स्तर पर अरबों की आबादी तक सुगमता से पहुंचने के लिए विकसित किया गया था। कोविड 19 महामारी के वैश्विक प्रक्षेपकों को परिभाषित करने में भारत का टीकाकरण मॉडल बहुत महत्वपूर्ण रहा है। ”

भारत की टीकाकरण सफलता महामारी से निपटने में देश के नेताओं द्वारा प्रदर्शित गतिशीलता और प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है। महामारी की लहर के बाद लहर का मुकाबला करने के लिए, भारत ने अधिक से अधिक लोगों की सुरक्षा के लिए देश भर में टीकाकरण के प्रयासों को तेजी से बढ़ाया। इसके अलावा, सरकार ने देश भर में वैक्सीन रोलआउट, वैक्सीन उत्पादन, और वैक्सीन झिझक के साथ-साथ गलत सूचना से लड़ने जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए लक्षित उपाय किए।

कोविड 19 वैक्सीन अब तक 1.8 बिलियन से अधिक लोगों को दी जा चुकी है और इसने तीसरे उछाल के सफल प्रबंधन में बहुत योगदान दिया है। इसके अतिरिक्त, टीके की पहली खुराक 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के 96 प्रतिशत भारतीयों को पहले ही दी जा चुकी है। एक एकीकृत सरकारी दृष्टिकोण, मजबूत संचार रणनीतियों के उपयोग और जमीनी स्तर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की एक सेना के अथक प्रयासों ने अपने लोगों को टीकाकरण में भारत की सफलता में योगदान दिया था।

इस मौके पर अंजलि कौर, एशिया की उप सहायक प्रशासक, यूएसएआईडी ने कहा कि भारत का विशाल टीकाकरण अभियान अन्य देशों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करता है। भारत ने वैक्सीन उत्पादन और डिलीवरी के मामले में दुनिया में नाम कमाया है। अपनी आबादी की रक्षा करने के अलावा, भारत ने कई देशों को कोविड 19 टीके, पीपीई किट और चिकित्सा उपकरण प्रदान करके वैश्विक समुदाय की भी मदद की है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, “महामारी के प्रबंधन में भारत की सफलता की कहानी अन्य देशों के लिए एक सबक के रूप में काम कर सकती है। हम हमेशा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखना चाहते हैं।”

बीएमजीएफ के अध्यक्ष डॉ क्रिस इलियास ने कोविड-19 महामारी के प्रबंधन की दिशा में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों और विशाल प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “नवाचार नियामक निर्णय में है, टीकों के संबंध में सुरक्षा के साथ गति को संतुलित करना, जिसे भारत ने तुरंत और सक्रिय रूप से लिया है। COWIN का विकास एक सार्वजनिक हित है जिसका उपयोग कहीं और भी किया जा सकता है ताकि टीकों के वितरण की गति को बढ़ाया जा सके।”

लोक को जागरूक करते लोक कलाकार

बहना चेत, चेत सखी रे… टीके का दिन आयो रे…हर काम छोड़ दियो टीको लेके आयो रे..

परंपरागत लिबास से सजी राजस्थान के सिरोही जिले के आबू तहसील की लोक कलाकार 30 वर्षीय, नवली कुमारी गरासिया का कोरोना जैसी महामारी की खबर फैलने और सरकार द्वारा इस बीमारी से बचाव के लिए एक मात्र रामबाण टीकाकरण है जरूरी, दो गज की रखें दूरी जैसे मंत्र को बताये जाने और इस दिशा में सबका साथ, सबका प्रयास की कवायद शुरू कर महामारी से लड़ने का संकल्प लेने के बाद से शायद की कोई दिन ऐसा गुजरा हो जब उनके मुंह से टीकाकरण गीत के बोल न फूटे हों। मानो नवली ने ठान लिया हो तब तक गाते रहना है,यानी लोगों को जागरूक करते रहना है जबतक इस बीमारी का प्रकोप न्यूनतम स्तर पर पहुंचे। और यह तभी संभव हो पायेगा जब हरेक व्यक्ति मास्क लगाये और संपूर्ण टीकाकरण हो। यानी हरेक व्यक्ति को टीके का दोनो डोज न लग जाये। कोरोना के फैलाव के शुरूआती दिनों से लेकर अब तक लवली गरासिया आस पास के लगभग 30 गांव के लोगों को खुद के द्वारा तैयार किये गये टीकाकरण गीत से टीका लगवाने को प्रेरित कर रही हैं और उनके संकल्पों की ही जीत है आज लगभग गांवों में टीके का दोनो डोज ग्रामीणों ने ले लिया है।

केवल नवली गरासिया ही क्यों निचला गढ़ पंचायत,सिरोही की पूर्व सरपंच और वर्तमान पंचायत समिती सदस्य शरमी बाई गरासिया जब अपने संग की महिलाओं के साथ गीत के ये बोल उठाती हैं कि
टीका उड़े रे गुलाल..लायो रंग केसरियो

मारी रे मंगेतर..कोरोना वाली
हांथो नारो उड़े रे गुलाल..लायो रंग के​सरियो
दूर दूर रहयो रे उदास लायो रंग के​सरियो

…मानो शरमी बाई गरासिया कोविड के दौरान कोविड से बचाव के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मूल मंत्र से लोगों को सजग कर रही हों। केवल नवली गरासिया और सरमी बाई ही क्यों? ईलाके के भोपा हो या मौलवी  कोरोना के खिलाफ इस जंग में सरकार के आह्वान और दिशा निर्देशों के साथ न सिर्फ खड़े दिखे बल्कि उसका प्रचार प्रसार भी करते रहे और कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि हूजी बाई गरासिया….उम्र 106 साल, माउंट आबू ने भी कोरोना टीकाकरण के दौरान दोनो डोज लगवाया….अब जब दादी ने लगवा लिया तो बाकी लोग तो आएंगे ही।

लेकिन कोरोना के खिलाफ ये जंग अभी खत्म नहीं हुई है। बूस्टर डोज लगाने का काम चल रहा है। 12 वर्ष से उपर के किशोरों को टीका लगाने का अभियान जोड़ो पर है। साथ ही कोरोना के व्यापक प्रभाव के काल में लगभग भूला सा दिया गया नियमित टीकाकरण अभियान ने भी फिर से गती पकड़ ली है और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रो में जच्चा-बच्चा फिर से जीवन रक्षक टीका के लिए आते दिखाई दे रहे हैं। ये भी कहा जा सकता है कि कोविड ने सभी लोगों को टीके की जरूरत के प्रति सजग करने में अहम भूमिका निभाई है।  एक तरफ लवली गरासिया जैसे लोक कलाकार जागरूकता अभियान का मोरचा संभाले हुए हैं तो दूसरी तरफ शरमी बाई गरासिया जैसी सजग पंचायत प्रतिनिधी। चाहे नवली कुमारी गरासिया हों या फिर शरमी बाई गरासिया या स्थानीय भोपा और मौलवी…कोरोना महामारी की खबर आने के बाद से ही यूनिसेफ के सहयोग से कोरोना के खिलाफ जंग में स्थानीय स्तर पर सहयोग दे रही एनजीओ जन चेतना संस्थान और उसकी अध्यक्षा रीचा और उनकी टीम ने इनको प्रशिक्षित और जागरूक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है और इसके परिणाम कोरोना के घटते संक्रमण और टीकाकरण के बढ़ते आकड़ों में साफ तौर पर दिखाई देता है। जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे एएनएम,आशा को इनके प्रयासों से बल मिल रहा है और वो दिन दूर नहीं जब देश में शत प्रतिशत टीकाकरण का कार्य पूरा हो जाये और जिंदगी की गाड़ी पहले की तरह रफ्तार पकड़ ले।

अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानें खुलने के साथ, ‘जन आंदोलन’ या कोविड उपयुक्त व्यवहार के लिए सामुदायिक भागीदारी और कोविड 19 टीकाकरण की सभी खुराक लेना और भी अधिक महत्व रखता है, ताकि महामारी के सफल प्रबंधन के माध्यम से मिली सफलता को बनाये रखा जाए। इस लड़ाई में लोक हो या लोक कलाकार, विश्वस्तरीय डेवलपमेंटल संस्थाएं हों या एनजीओ सब सरकार के साथ खड़े नजर आते हैं।

 

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