अंकित पाण्डेय
75 साल पहले जब हमारा देश आजाद हुआ, तब महात्मा गांधी ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया था- स्वच्छता का संदेश। वे कहते थे, “स्वच्छता के साथ ही समरसता, समरसता के साथ ही शांति, और शांति के साथ ही समृद्धि होती है।” महात्मां गांधी जी के अनुसार, स्वच्छता मनुष्य के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और स्वच्छता में ईश्वर का वास होता है। स्वच्छता न केवल हमारे स्वास्थ्य को सुरक्षित रखती है, बल्कि हमें पर्यावरण की भी देखभाल करने की जिम्मेदारी प्रदान करती है। स्वच्छता के माध्यम से हम बीमारियों को रोक सकते हैं। यह हमें खुशहाल और स्वस्थ रखती है। महात्मा गांधी ने स्वच्छता के महत्व को समझते हुए अपने आसपास सफाई रखने के लिए लोगों को प्रेरित किया।
वे कहते थे, “स्वच्छता देश का प्रतीक है।” हमें अपने घरों, स्कूलों, कॉलेजों, और संस्थानों को स्वच्छ और सुरक्षित रखना चाहिए।
स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था। उन्होंने “स्वच्छ भारत” का सपना देखा था जिसके लिए वह चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें। गांधी जी ने प्रत्येक नागरिक को सफाई करने की दिशा में प्रतिवर्ष 100 घंटे के श्रमदान के लिए प्रेरित किया। महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के स्वप्न को पूरा करने के लिए, प्रधानमंत्रा नरेंद्रमोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया और इसके सफल कार्यान्वयन हेतु भारत के सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की।

स्वच्छता तन (बाहर) की ही नहीं बल्कि मन (आंतरिक) की भी जरुरी
स्वच्छता का महत्व सिर्फ हमारे शरीर तथा हमारे आस-पास की सफाई नहीं होता है, बल्कि हमारे मन अर्थात आंतरिक सफाई भी जरुरी है। महात्मा गांधी कहते थे, “स्वच्छ मन, स्वच्छ जीवन।” हमें नकारात्मकता, भ्रष्टाचार, और दुष्टता को दूर रखना चाहिए।महात्मा गांधी के स्वच्छता संदेश को अपने जीवन में अमल में लाने के लिए हमें स्वयं को संयमित करना होगा। हमें प्लास्टिक के प्रयोग को कम करना, संक्रमित खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना, और पेड़-पौधों की देखभाल करना चाहिए।
स्वच्छता हमारे समुदाय, हमारे देश, और हमारी संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण है। हम सभी को महात्मा गांधी के संदेश को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। यह हमारा दायित्व है, और इसे पूरा करने के लिए हमें संगठित होना चाहिए। स्वच्छता को आगे बढ़ाने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। जैसे महात्मा गांधी कहते थे, “आपको तय करना होगा कि आप स्वच्छता की पहली सीढ़ी पर कहां से उतरेंगे।” लेकिन हम सभी सामुहिक रुप से इस मुहिम में सक्रिय हो सकते हैं, और महात्मा गांधी के स्वच्छता संदेश को पूरी दुनिया में प्रसारित कर सकते हैं। तो इस गांधी जयंती पर हम सभी मिलकर महात्मा गांधी के स्वच्छता संदेश को आगे बढ़ाते हैं और हमारे देश को स्वच्छ और सुंदर बनाते हैं।

