यूपी के राजभवन में कालानमक किरन धान की फसल हुई तैयार, जल्द होगी कटाई

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अंकित पाण्डेय

नई दिल्ली: बुद्ध के प्रसाद के रूप में प्रतिष्ठित पूर्वांचल की खास पहचान कालानमक धान की सुंगध से उत्तर प्रदेश का राजभवन परिसर भी महक रहा है। कालानमक धान एक जिला एक उत्पाद योजना में भी शामिल है। इस धान की तमाम खूबियां हैं। सुगंध के साथ-साथ इसमें तमाम तरह के पौष्टिक गुण भी हैं।

योगी की ओडीओपी में भी शामिल है कालानमक

उल्लेखनीय है कि कालानमक धान को भगवान गौतम बुद्ध का प्रसाद माना जाता है। स्वाद, सुगंध और पोषक तत्त्वों के लिहाज से बेमिसाल यह धान योगी की पसंदीदा योजना ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) में शामिल है।
जियोग्राफिकल इंडिकेटर का मिला है टैग
कालानमक धान को सिद्धार्थनगर, महराजगंज, गोरखपुर, संतकबीर नगर, बहराइच, बस्ती, कुशीनगर, गोंडा, बाराबंकी, देवरिया एवं गोंडा का जियोग्राफिकल इंडिकेटर (जीआई) टैग भी हासिल है। डॉ. चौधरी के मुताबिक कालानमक चावल में सुगंध एवं स्वाद के अलावा आयरन, प्रोटीन, बीटा कैरोटीन भी मिलता है।

 नर्सरी पूरी तरह जैविक

पीआरडीएफ के चेयरमैन डॉक्टर आर सी चौधरी एवम राजभवन के उद्यान अधीक्षक डॉक्टर डी के मिश्रा ने बताया कि नर्सरी पूरी तरह जैविक है। इसमें अब तक सिर्फ बीजामृत और जीवामृत का ही प्रयोग किया गया है। आगे भी इसमें जरूरत के अनुसार खाद और कीटनाशक के रूप में सिर्फ जैविक उत्पादों का ही प्रयोग होगा।

उत्तर प्रदेश के राज भवन में कालानमक की यह पहली बार खेती

पहली बार यहां काला नमक की रोपाई हुई है। कालानमक किरण और बीना कालानमक 102 प्रजाति पक कर तैयार हैं। जल्द ही ही इनकी कटाई होगी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर सी चौधरी ने राजभवन के डॉ. डीके मिश्र के साथ पकी फसल का हाल जाना। यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की इच्छा पर खरीफ सत्र में राजभवन परिसर में पहली बार आधा एकड़ रकबे में कालानमक धान की रोपाई कराई गई थी। इसके लिए बेहन गोरखपुर से तैयार करा कर डॉ. रामचेत चौधरी स्वयं लेकर राजभवन पहुंचे थे। राजभवन परिसर के कृषि क्षेत्र में कालानमक किरण एवं बौना कालानमक 102 प्रजाति की रोपाई कराई गई थी। अब यह फसल पककर तैयार है। यहां कालानमक धान की खेती प्राकृतिक पद्धति से की गई फसल में किसी तरह के रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल नहीं किया गया। जैविक खाद एवं जैविक कीटनाशक ही इस्तेमाल किए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कोशिशों से कालानमक धान का न केवल निरंतर रकबा बढ़ता जा रहा है बल्कि विदेशों में उसकी मांग बढ़ रही है। सरकार की पहल पर सिद्धार्थनगर में कालानमक धान के लिए सीएफसी भी संचालित कर दी गई है। कुशीनगर के कप्तानगंज ब्लॉक के 4 गांवों में 100 किसान तकरीबन 100 एकड़ में कालानमक धान की प्राकृतिक खेती कर हैं। कौड़ीराम में 100 एकड़ में कालानमक धान की प्राकृतिक खेती की गई है।

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