तारीख पर तारीख..सुलझ नहीं पा रहा बिहार पंचायत चुनाव में ईवीएम का पेंच

अमरनाथ झा
पटना: बिहार में पंचायत चुनाव में ईवीएम का पेंच फंस गया है। राज्य सरकार के निर्देश पर राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनावों के दौरान मतदान में मल्टी-पोस्ट ईवीएम का इस्तेमाल करने का फैसला तो कर लिया, पर भारत के चुनाव आयोग ने अभी तक इसके लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं दिया है। चुनाव आयोग के अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं मिलने से ईवीएम बनाने वाली कंपनी ईसीआईएल राज्य निर्वाचन आयोग को मल्टीपोस्ट ईवीएम की आपूर्ति नहीं कर रही है।

भारत के चुनाव आयोग से एनओसी मिलने में देर होने पर राज्य चुनाव आयोग ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वहां भी तारीख पर तारीख पड़ रही है और ईवीएम का पेंच सुलझता नहीं दिख रहा है।
अब नौ अप्रैल की तारीख पड़ी है। लेकिन इसबीच हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग को आपस में बातचीत कर आपसी सहमति से मामले को सुलझाने के लिए कहा जरूर है। साथ ही चुनाव आयोग को जबाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए भी कहा है। राज्य के महाधिवक्ता को अदालत में हाजिर होकर अदालत का सहयोग करने और आदेश की प्रति महाधिवक्ता के कार्यालय को भेजने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की एकल पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया।

याचिका में चुनाव आयोग के 21 जुलाई 2020 के निर्देश के उस हिस्से को चुनौती दी गई है जिसमें राज्य निर्वाचन आयोगों को ईवीएम की आपूर्ति व डिजाइन के पहले चुनाव आयोग की मंजूरी लेना अनिवार्य है। इस वर्ष बिहार में होने वाले पंचायत चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल करने का फैसला होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने जरूरी अनुमति के लिए 27 जनवरी 21 को ही चुनाव आयोग के पास अनुरोध पत्र भेजा था। लेकिन इस अनापत्ति प्रमाण पत्र में मिलने में देरी होने से पंचायत चुनाव में देर होने की संभावना उत्पन्न हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि राजस्थान और छत्तीसगढ में पंचायतों के चुनावों के लिए ईवीएम की आपूर्ति की अनुमति दी गई थी। पर बिहार के साथ इस मामले में भेदभाव किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि इन ईवीएम मशीनों की खरीद के बाद उनके संचालन के संबंध में पहले चुनाव कराने वाले सरकारी कर्मचारियों और फिर आम मतदाताओं को प्रशिक्षण देना होगा। पंचायत चुनाव में एकसाथ छह पदों के लिए मतदान होगे। इसलिए इन चुनावों में उस मशीन से काम नहीं चलेगा जिनका इस्तेमाल लोकसभा और विधानसभा चुनावों में होता है। इसलिए मल्टी पोस्ट मशीन की जरूरत होगी।

राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव प्रमंडलवार और नौ चरणों में कराने की तैयारी की है ताकि आचार-संहिता की वजह से स्थानीय स्तर पर विकास काम में रुकावट नहीं आए। इसलिए पूरे जिले में एक ही मतदान कराया जाएगा। नौ चरणों में चुनाव कराने से यह लाभ भी है कि एक ही ईवीएम मशीन का कई जगहों पर इस्तेमाल हो सकेगा। फिरभी चुनाव में लगभग 15 हजार कंट्रोल यूनिट और 90 हजार बैलेट यूनिट का इस्तेमाल होगा। पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत राज्य में 2 लाख 58 हजार पदों के चुनाव कराए जाने हैं। राज्य में 8386 पंचायत और एक लाख 14 हजार वार्ड हैं।

लोकसभा और विधानसभा चुनाव ईवीएम से ही होते हैं। उनकी तैयारी पहले ही शुरू हो जाती है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह ही पंचायत चुनावों की तैयारी भी छह महीने पहले आरंभ हो जाना चाहिए। इस तैयारी का पहला चरण पंचायतों का पुर्नगठन होता है। अभी राज्य में 8386 ग्राम पंचायतें थी, अब करीब 300 कम हो जाएगी। लेकिन परिसीमन के पहले पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जाएगा क्योंकि जिन पंचायतों का कुछ इलाका नगर निकायों में गया है, उनमें अगर बचे इलाके में चार हजार से अधिक आबादी होगी, तब तो ग्राम-पंचायत का दर्जा बरकरार रहेगा अन्यथा उन्हें दूसरे पंचायत में मिला दिया जाएगा। हालाकि इसके लिए पंचायत कानून में संशोधन करना होगा।

अभी सात हजार की जनसंख्या पर पंचायत के गठन का प्रावधान है। पंचायती राज विभाग के सूत्रों के अनुसार विभाग ने तीन हजार से अधिक आबादी वाले इलाके के पंचायत का दर्जा देने का प्रावधान करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे मंत्रीमंडल की मंजूरी के बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। पंचायतों के गठन के बाद मतदाता सूचियों का पंचायत व वार्डवार विखंडन किया जाता है। यह काम जनवरी से ही चल रहा है। लेकिन इसके बाद ईवीएम मशीनों की जांच और प्रशिक्षण का काम आरंभ होगा। मतदाताओं के प्रशिक्षण के लिए डमी ईवीएम भी बनाए जाते हैं, लेकिन अभी मशीनें ही नहीं खरीदी जा सके हैं तो डमी तैयार कराने का सवाल ही नहीं है। वैसे ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग में ही दो महीने का समय लगता है। जाहिर है कि ईवीएम के पेंच की वजह से पंचायत चुनाव में देर होने की पूरी संभावना है।

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