केएससीएफ के जस्टिस फॉर एवरी चाइल्‍ड अभियान के ब्रांड अम्‍बेसडर बनेंगे फरहान अख्तर

मंगरूआ
नई दिल्ली: ‘ जस्टिस फॉर एवरी चाइल्‍ड’ का सपना लिए अभिनेता फरहान अख्तर ने नोबेल पुरस्कार विजेता और बच्चों के बेहतरी के लिए काम करने वाले कैलाश सत्यार्थी ने साथ आकर बच्चों के हित में काम करने का फैसला किया है। फरहान अब कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन (केएससीएफ) द्वारा यौन शोषण और बलात्कार के शिकार बच्चों और उनके परिवारों को तय समय पर न्याय, स्वास्थ्य सहायता और पुनर्वास सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए देशव्‍यापी ‘ जस्टिस फॉर एवरी चाइल्‍ड ’ अभियान से जुड़ेंगे। फांडडेशन द्वारा आगामी 21 मार्च को देश के अलग-अलग जिलों में चलाया जायेगा जिसे एक वर्ष तक चलाया जायेगा। विशेष रूप से यह अभियान देश के उन 100 जिलों में चलाया जाएगा जो बाल उत्पीडन और बच्चों के बलात्कार के दृष्टिकोण से अति संवेदनशील हैं। अभियान के सरोकार और उद्देश्‍यों से लोगों को अवगत कराने के लिए हिंदी फिल्‍मों के मशहूर अभिनेता और निर्देशक फरहान अख्‍तर इस अभियान से बतौर ब्रांड अम्बेसडर शामिल हुए हैं।

क्या कहते हैं फरहान
कार्यक्रम से जुड़ने कर बच्चों के हित में काम करने की इच्छा रखने वाले फरहान अख्‍तर ने बाल यौन शोषण की भयावहता को राष्ट्रीय आपातकाल की संज्ञा देते हुए कहा, ‘‘भारत में हर घंटे तीन बच्चों का बलात्कार होता है और पांच बच्‍चे यौन उत्‍पीड़न के शिकार होते हैं। उन्‍हें न्याय के लिए लम्‍बा संघर्ष करना पड़ता है, जो उन्‍हें जीवनभर पीड़ा देने का काम करता है। यह एक राष्ट्रीय आपातकाल है और भारत के बच्चों को हमारी मदद की आवश्यकता है। ऐसे में “ जस्टिस फॉर एवरी चाइल्ड ” मुहिम में कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन से जुड़ कर हम सब को इस लड़ाई को आगे बढ़ाना चाहिए।’’
बढ़ रहा है देश में बाल यौन शोषण का मामला
देश में बच्चों के यौन शोषण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। बच्चों के शोषण पर रोक लगाने के खिलाफ बने कानून पॉक्सो अधिनियम के अनुसार एक निश्चित समय में जांच प्रकिया पूरी कर पीड़ितों को न्याय दिलाने का प्रावधान है। लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है।

100 जिलों में चलेगा “जस्टिस फॉर एवरी चाइल्ड” अभियान
“ जस्टिस फॉर एवरी चाइल्ड ” अभियान का लक्ष्‍य बच्चों के यौन उत्पीडन के मामले में देश के उन 100 संवेदनशील जिलों में यौन अपराधों से बच्‍चों का संरक्षण (पॉक्‍सो) अधिनियम के तहत चल रहे कम से कम 5000 मामलों में बच्‍चों को तय समय में त्वरित न्‍याय दिलाना है। इस अवधि के दौरान केएससीएफ यौन शोषण और बलात्कार के पीडि़त बच्‍चों को कानूनी और स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं, पुनर्वास, शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों की सुविधाएं प्रदान करेगा। बाल यौन शोषण के पीडि़तों और उनके परिवारों को विशेष रूप से मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य सहायता भी संगठन मुहैया कराएगा। इस दौरान केएससीएफ लोगों को “बाल मित्र” बनाने की प्रक्रिया के तहत न्यायपालिका और प्रशासनिक प्रणालियों से संबंधित हितधारकों को संवेदनशील बनाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यशालाओं का भी आयोजन करेगा।


क्या कहती है रिपोर्ट
केएससीएफ द्वारा हालिया प्रकाशित एक अध्‍ययन रिपोर्ट ‘पुलिस केस डिस्‍पोजल पैटर्न: एन इन्‍क्‍वायरी इनटू द केसेस फाइल्‍ड अंडर पॉक्‍सो एक्‍ट 2012’ के अनुसार बच्चों के यौन शोषण के पॉक्‍सो के तहत दर्ज लगभग 3000 मामले हर साल निष्पक्ष सुनवाई के लिए अदालत तक पहुंचने में विफल रहते हैं। यानी हर दिन यौन शोषण के शिकार चार बच्‍चों को न्याय से इसलिए वंचित कर दिया जाता है, क्योंकि यौन उत्पीडित होने के बावजूद पर्याप्‍त सबूत और सुराग के अभाव में पुलिस द्वारा उनके मामलों को थाने में ही बंद कर दिया जाता है। लिहाजा, ये मामले सुनवाई के लिए अदालत तक पहुंच ही नहीं पाते। रोंगटे खड़े कर देने वाले ये आंकड़े बताते हैं कि वक्‍त का तकाजा है कि बच्‍चों के लिए न्‍याय को सुनिश्चित करने के लिए ‘जस्टिस फॉर एवरी चाइल्ड’ अभियान की शुरुआत की जाए।
क्या कहते हैं संस्थान के अधिकारी
यौन शोषण के शिकार पीडितों और उनके परिवारवालों के दर्द औ पीड़ा को उजागर करते हुए केएससीएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एससी सिन्हा कहते हैं, “जब बच्‍चों के साथ यौन दुर्व्‍यवहार होता है, तो उन्‍हें न केवल शारीरिक यातना के दौर से गुजरना पड़ता है, बल्कि उन्‍हें असहनीय मानसिक आघात का भी सामना करना पड़ता है। पुलिस जांच प्रकिया के दौरान पीड़ित और उनके परिवार की पीड़ा उस समय और बढ़ जाती है, जब उन्हें बार-बार उस घटना का उल्‍लेख करना पड़ता है। न्‍याय के लिए भी उनको लंबा इंतजार करना पड़ता है। ये सारी प्रतिकूलताएं उनकी हताशा और दुश्चिंताओं को बढ़ाने का काम करती हैं और न्‍याय पाने की उनकी आकांक्षाओं को समाप्‍त कर देती हैं।” इसी संदर्भ में ​जस्टिस फॉर एवरी चाईल्ड अभियान शुरू किया गया है।

‘जस्टिस फॉर एवरी चाइल्ड’ अभियान का उद्देश्य
सिन्हा ने जस्टिस फॉर एवरी चाइल्ड अभियान के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि अभियान ऐसे पीड़ित बच्‍चों को सहायता उपलब्‍ध कराएगा, ताकि उन्‍हें न केवल समय पर न्याय मिले, बल्कि उन्‍हें उचित मानसिक, पुनर्वास और शैक्षिक सहायता भी मिल सके। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सिन्‍हा कहते हैं, “कानून के मुताबिक बच्चों के यौन उत्पीडन के मामले में एक साल में अदालत में ट्रायल पूरा हो जाना चाहिए। हम एक संगठन के रूप में बाल संरक्षण के लिए सरकार और न्यायपालिका के साथ काम करना चाहते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर बच्चे को न्याय और उसका प्राकृतिक अधिकार मिले। जिससे वह एक खुशहाल और उन्‍मुक्‍त बचपन का आनंद उठा सके।
गौरतलब है कि केएससीएफ लंबे समय से बाल यौन शोषण के खिलाफ अभियान चला रहा है। संगठन ने 2017 में नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित  कैलाश सत्‍यार्थी के नेतृत्‍व में बाल यौन शोषण और ट्रैफिकिंग (दुर्व्‍यापार) के खिलाफ कन्याकुमारी से कश्मीर तक 12,000 किलोमीटर की ‘भारत यात्रा’ का भी आयोजन किया था। जिसमें बाल यौन शोषण के शिकार रहे बच्‍चे, सिविल सोसायटी संगठन, विभिन्‍न राजनीतिक दलों के नेताओं, फिल्‍मी हस्तियों, धर्मगुरुओं, जजों आदि ने भाग लिया था।

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