लोक संस्कृति

गांव अगर खो गए, नहीं बचेगा देश और नहीं बचेगी संस्कृति

डॉ.राजश्री देवी गांव शब्द में ही एक अद्भुत आकर्षण है। गांव बोलते ही मन में हरे-भरे खेत, गाय-बैलों के चरने के लिए विशाल मैदान, पानी भरती औरतों का खिल-खिलाकर हंसना, शाम के समय नामघर (कीर्तनघर ) से आती शंख, घंटा, डबा की सम्मिलित मांगलिक ध्वनि, युवक-युवतियों का मिलकर मैदान में बरगद के नीचे बिहु नाचना, …

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यमुना किनारे से कला केंद्र तक लिट्टी चोखा और संवाद का सफर

संतोष कुमार सिंह लिट्टी चोखा ओर संवाद का सफर यमुना किनारे से चलकर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र तक पहुंच गया है। प्रत्येक वर्ष की भांती इस वर्ष भी गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली में 12 जनवरी 2020 को इस अनूठे कार्यक्रम का विशाल आयोजन किया जाएगा। ‘दिल से लोकल सोच से ग्लोबल’ टैग …

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​तीस्ता की याद हुई ताजा, बहन सृष्टि ने दी अभूतपूर्व श्रद्धाजलि

संतोष कुमार सिंह सारण: किसी भी कलाकार के लिए इतनी बड़ी श्रद्धाजलि न कभी किसी ने देखा होगा और न ही सुना होगा। लेकिन इतिहास नये रूप में सामने इतनी जल्दी सामने आयेगा इसकी कल्पना तो शायद ही किसी को रही होगी। कुछ ऐसा ही दृश्य था छपरा जिला अंतर्गत रिवीलगंज निवासी व टीवी कलाकार …

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बंद होठों की चीत्कार ‘धुमकुड़िया’

जीतेन्द्र सिंह धुमकुड़िया नागपुरिया भाषा में बनी फिल्म लीक से हट कर बनाई गयी है,जो निर्देशक की जीवन में प्राप्त अनुभवों से बनी है। यह फिल्म स्थानीय स्तर पर अपने समाज की बात कहती है,लेकिन उसका प्रभाव पुरे विश्व के आदिवासियों के लिए समानांतर रूप से सामान्य हो जाता है। ‘धुमकुड़िया’ झारखंड के आदिवासियों लड़कियों …

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बिहार उत्सव में जूट से बना सामान लोगों को कर रहा अकर्षित

दिल्ली मे जारी बिहार उत्सव के दौरान जूट से बने घरेलू सामानों और नक्काशी कला युवाओं को बेहद प्रभावित कर रही है। यही कारण है कि युवक और युवतियां बिहार उत्सव में जमकर खरीदारी कर रहे हैं। बिहार के 107वां स्थापना दिवस के अवसर पर दिल्ली में बिहार उत्सव 2019 का यह कार्यक्रम बिहार की …

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दिल्ली में बिखरेगी बिहार की संस्कृति की छठा

बिहार स्थापना दिवस के अवसर पर 15 दिवसीय बिहार उत्सव 2019 का आयोजन देश की राजधानी दिल्ली में 16 से 31 मार्च 2019 तक होने जा रहा है। दिल्ली में बिहार उत्सव 2019 का आयोजन बिहार सरकार उद्योग विभाग और बिहार सरकार के बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) के तत्वाधान में किया जा रहा …

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…अबहीं नाम भइल बा थोरा, करब याद..जब ई छुट जाई तन मोरा

निराला सब अकेले जाते हैं, अकेला भी अकेले गये लेकिन वे समूह के मानस में हमेशा रहेंगे बात तब की है,जब बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव का ताजा—ताजी उभार हो रहा था. अपने खास अंदाज की वजह से मशहूर हो चुके थे. लालू प्रसाद के उभार के वक्त एक गाना बहुत मशहूर हुआ …

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अब पियवा के लागल बा कचहरी.. भेजले बा डोलिया कहारी…

अनूप नारायण सिंह कौड़ी—कौडी जोड़ के संचय कइनी खजाना पूंजी , सब खर्चा हो गईले करब से कवन बहाना त पल भर समय ना घटिहे बढिहे समय से खुली सवारी अब पियवा के लागल बा कचहरी भेजले बा डोलिया कहारी  यह निर्गुण अकसर गुरू अकेला जी गाया करते थे………. गुरु अजित कुमार अकेला से पहली …

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भोजपुरी गीत-गवनई की परंपरा को यूनेस्को द्वारा सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मिली मान्यता

अमितेश सिंह वाराणसी:भोजपुरी की गीत—गवनई की परंपरा को भोजपुरी सिनेमा से जोड़ते हुए हमेशा यह तर्क दिया जाता रहा है, कि भोजपुरी गानों मे अश्लीलता है। ज्यादातर गाने द्विअर्थी होते हैं लेकिन इन्हीं भोजपुरी की गीत गवनई की परंपरा को यदि यूनेस्को द्वारा विश्व की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी जाये तो यह …

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बिदेसिया राम कथा से होड़ लेती हुई कृति

सदानन्द शाही,निदेशक भोजपुरी अध्ययन केंद्र,बीएचयू भिखारी ठाकुर की रचना ‘बिदेसिया’ 1917 में हुई थी। सौ साल होने जा रहे हैं इस महान कृति के। आजकल कृतियों के महत्व का अन्दाजा इस बात से भी लगाया जाता है कि उसके कितने संस्करण हुए। इस पैमाने पर देखेंगे तो एकदम से अलग दृश्य सामने होगा। बिदेसिया का …

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