पूजा
Chaiti Chhath Puja 2025: हिन्दू धर्म में चैती छठ व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है, जिसे साल में दो बार मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देवता और छठी माई की पूजा के लिए समर्पित है। छठ पूजा विशेष रूप से चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होकर सप्तमी तिथि पर समाप्त होती है। इस व्रत में व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं, जिसका उद्देश्य आत्म-निर्बलता और शुद्धता के साथ सूर्य देवता से आशीर्वाद प्राप्त करना होता है। इस पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इसके अलावा खरना और उसके बाद संध्या अर्घ्य और ऊषा अर्घ्य के साथ पूजा पूरी होती है। आइए जानते हैं अगर आप भी पहली बार छठ पूजा कर रहे हैं तो आपको किन चीजों की आवश्यकता होगी।
चैती छठ पूजा के लिए सामग्री
छठ पूजा में बांस की टोकरी और सूप का विशेष महत्व होता है। बांस को शुभ, पवित्र, और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। अब सामग्री रखने के लिए एक साफ थाली रखें। इसके बाद पूजा स्थल पर जलाने के लिए मिट्टी से बने पारंपरिक भारतीय दीपक जिनका उपयोग धार्मिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। छठ पूजा में चढ़ाया जाता है, खाजा, गुड़ और अदरक का पौधा चावल, आटा आदि शामिल है। इसके अलावा जल, शहद, गंगाजल और चंदन, सिंदूर, धूपबत्ती, कुमकुम और कपूर, बांस या पीतल का सूप, दूध और जल के लिए गिलास, ऋतुफल, कलावा, सुपारी, फूल और माला, तांबे का कलश और बड़ी टोकरी आदि शामिल किए जाते हैं।
प्रसाद की सामग्री
छठ पूजा में प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है, चम्मच, लड्डू, हल्दी, नाशपाती पत्ते लगे हुए ईख, दूध, तेल और बाती, इसी के साथ नारियल, शरीफा, दूध से बनी मिठाइयाँ और बड़ा नींबू, सिंघाड़ा, सुथनी, शकरकंदी, मूली, बैंगन, केले, गेहूं।
चैती छठ पर किस की पूजा होती है
चैती छठ पूजा सूर्य देवता और छठी माई की पूजा से संबंधित है। यह पर्व विशेष रूप से उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का है। व्रति इस दौरान सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कठिन व्रत रखते है। इसके अलावा यह पूजा समृद्धि, सुख-शांति, और समग्र कल्याण की प्राप्ति के लिए की जाती है। हालांकि यह व्रत परिवार के कल्याण और सशक्त संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
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चैती छठ पर इन नियमों का रखें ध्यान
1. चैती छठ पूजा कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि इस पूजा में साफ-सफाई का विशेष महत्व है इसलिए सफाई का विशेष ध्यान रखें।
2. नहाय-खाय के दिन से लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक लहसुन और प्याज का सेवन न करें।
3. व्रत के सभी नियमों को सख्ती से पालन करना चाहिए, जिससे पूजा सही विधि से पूरी हो सके।
4. पूजा के दौरान घर के सभी सदस्य शुद्ध भोजन ग्रहण करें।
5. चैती छठ के दिन व्रती को प्रसाद स्वयं बनाएं, यदि आप प्रसाद नहीं बना पा रहे हैं तो किसी न किसी रूप में मदद जरूर करें।
6. प्रसाद बनाते समय स्वच्छता और शुद्धता का ध्यान रखें। इसके अलावा इस बात का विशेष ध्यान रखें कि छठ पूजा से जुड़े सभी प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाए जाएं।
7. पूजा के कपड़ों में सुई का उपयोग न करें।
8. छठ पूजा में बांस से बनी सूप और टोकरी का ही इस्तेमाल करें।
9. व्रती पूरी पूजा के दौरान जमीन पर चटाई बिछाकर ही सोए।


