पूजा
Chaiti Chhath Puja 2025: चैती छठ एक महत्वपूर्ण हिंदू महापर्व है, जो खासकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देवता और छठी माई की पूजा के लिए समर्पित है। इसके अलावा बिहार में लोक आस्था का यह महापर्व चार दिवसीय चैती छठ नहाय खाय से शुरू हो गया है। सभी छठ व्रती सुबह से ही नदी या तालाब में स्नान कर कद्दू, चावल और चने की दाल का प्रसाद बनाने में जुट गई। हालांकि चैती छठ चैत्र नवरात्रि के बीच में पड़ती है। इस छठ पूजा में 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है। इसके साथ कठिन नियमों का पालन भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, संतान और सुहाग की रक्षा, परिवार की खुशहाली और कामना पूर्ति के लिए यह व्रत किया जाता है।
चावल और चने की दाल की परंपरा
चैती छठ पर इन दिनों घाटों पर सुरक्षा, साफ सफाई और रंग रोगन की तैयारी चल रही है। इसी के साथ आज नहाय-खाय के दिन चावल, कद्दू की सब्जी और चने की दाल बनाने की परंपरा रही है। पारंपरिक गीतों के साथ उन सभी ने प्रसाद ग्रहण किया है, और कल से खरना की तैयारी में जुट गई हैं।
छठ के प्रसाद से स्वास्थ्य लाभ
वैदिक मान्यता के अनुसार, छठ के प्रसाद ग्रहण करने से शरीर निरोग होता है। खरना के प्रसाद में ईख के कच्चे रस , गुड़ के सेवन से आंखों की पीड़ा समाप्त होने के साथ तेजस्विता, निरोगिता व बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है। स्वस्थ जीवन के लिए छठ जरूरी है। प्रकृति में फास्फोरस सबसे ज्यादा गुड़ में पाया जाता है। मौसमी फल प्रसाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। परिवार की सुख समृद्धि तथा कष्टों के निवारण के लिए किए जाने वाले इस व्रत की खासियत है कि इस पर्व को करने के लिए किसी पुरोहित पंडित की आवश्यकता नहीं होती और नहीं मंत्रोच्चारण की कोई जरूरत है। छठ पर्व में साफ-सफाई का विशेष महत्व रखा जाता है।
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चैती छठ कब से कब तक है
1 अप्रैल, मंगलवार: नहाय खाय होगा।
2 अप्रैल, बुधवार: खरना होगा।
3 अप्रैल, गुरुवार: संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य)
4 अप्रैल, शुक्रवार: उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य) और पारण (प्रसाद ग्रहण) होगा।
चैती छठ नहाय खाय
चैती छठ पूजन के पहले दिन चैत्र शुक्ल चतुर्थी तिथि यानी 1 अप्रैल को नहाय खाय होगा। इस दिन व्रती पवित्र नदी, तालाब में स्नान करने का महत्व है। इसके बाद पूरी सफाई और शुद्धता के साथ बनाया गया भोजन ग्रहण किया जाता है। इसमे कद्दू की सब्जी, चावल और चने की दाल आदि होती है। नहाय खाय के जरिए व्रती का तन और मन शुद्ध होता है। इसके बाद वह तीन दिन का कठिन व्रत रखते है।
चैती छठ का तीसरा दिन ‘अहम’
चैती छठ पूजन का तीसरा दिन यानी चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि (3 अप्रैल) अहम दिन होता है। इस दिन व्रती शाम के समय पवित्र नदी या तालाब के किनारे सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। इसमें फल, फूल, ठेकुआ आदि होता है। मान्यता है कि चैती छठ मनोकामना पूरी होने का पर्व है। इसके अलावा दीवाली के बाद होने वाली छठ की तरह यह छठ सभी लोगों नहीं करते हैं। इसलिए इसमें ज्यादा भीड़ नहीं होती है। धारणा यह है, कि जिनकी मनोकामना पूरी हो जाती है। वे चैती छठ व्रत करते हैं। अलग-अलग मान्यताओं के मुताबिक, इसे एक, तीन या पांच साल तक किया जाता है। वहीं कई लोग मनोकामना पूरी होने तक इसे करते हैं।


